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मदरसा शिक्षकों को नहीं मिल रहा पूर्ण मानदेय
siddharthnagar
Updated Wed, 12 Sep 2018 11:03 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले में 292 मदरसों में कार्यरत 500 मदरसा शिक्षकों को पूर्ण मानदेय नहीं मिल पा रहा है। इस कारण तीन साल केंद्रांश से न मिलना बताया जा रहा है। राज्यांश भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मदरसा शिक्षक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
मदरसा शिक्षकों के मानदेय के लिए राज्य और कें द्र के द्वारा अलग-अलग राशि दी जाती है। तीन वर्ष से केंद्रांश की धनराशि नहीं प्राप्त हुई है। राज्यांश भी गत सत्र में करीब चार माह का नहीं मिला। वहीं इस सत्र में अब तक 4 माह 15 दिन का मिला है। राज्यांश के तहत स्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों को 2000, परास्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों को 3000 हजार देय है। वहीं केंद्रांश के तहत स्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों को 6000 और परास्नातक उत्तीर्ण 12000 हजार रुपये देय है। इस प्रकार स्नातकधारी शिक्षकों को कुल कुल 8 हजार व परास्नातकधारी शिक्षकों का मानदेय 15 हजार रुपये मानदेय मिलता है। अब इसके लिए नया नियम आ गया है। इससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अब प्रत्येक मदरसों पर तैनात शिक्षकों को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के साथ ग्रुप में फोटो खींचकर अपलोड करने के बाद ही केंद्रांश व राज्यांश की धनराशि मुहैय्या हो सकेगी। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शाहिद हुसेन कहते हैं कि केंद्रांश व राज्यांश समय से दोनों एक साथ देने की मांग को लेकर बीते 5 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया गया था। अब लखनऊ में धरने की रणनीति तैयार की जा रही है। इसकी संभावित तिथि 22 अक्टूबर है।
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निदेशालय स्तर पर से प्राप्त नए नियम के तहत संबंधित मदरसों में पहुंचकर ग्रुप फोटो खींचकर अपलोड कराने के लिए हर संभव कोशिश हो रही है। स्कूलों की संख्या अधिक होने के कारण अधिक समय लगना स्वाभाविक है। केंद्रांश तीन वर्ष से नहीं मिल रहा है। मिलने वाले राज्यांश की धनराशि संबंधित शिक्षकों के खाते में हस्तांतरित की जा रही है।
- आशुतोष पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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मदरसा शिक्षकों के मानदेय के लिए राज्य और कें द्र के द्वारा अलग-अलग राशि दी जाती है। तीन वर्ष से केंद्रांश की धनराशि नहीं प्राप्त हुई है। राज्यांश भी गत सत्र में करीब चार माह का नहीं मिला। वहीं इस सत्र में अब तक 4 माह 15 दिन का मिला है। राज्यांश के तहत स्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों को 2000, परास्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों को 3000 हजार देय है। वहीं केंद्रांश के तहत स्नातक उत्तीर्ण शिक्षकों को 6000 और परास्नातक उत्तीर्ण 12000 हजार रुपये देय है। इस प्रकार स्नातकधारी शिक्षकों को कुल कुल 8 हजार व परास्नातकधारी शिक्षकों का मानदेय 15 हजार रुपये मानदेय मिलता है। अब इसके लिए नया नियम आ गया है। इससे मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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अब प्रत्येक मदरसों पर तैनात शिक्षकों को जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के साथ ग्रुप में फोटो खींचकर अपलोड करने के बाद ही केंद्रांश व राज्यांश की धनराशि मुहैय्या हो सकेगी। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शाहिद हुसेन कहते हैं कि केंद्रांश व राज्यांश समय से दोनों एक साथ देने की मांग को लेकर बीते 5 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया गया था। अब लखनऊ में धरने की रणनीति तैयार की जा रही है। इसकी संभावित तिथि 22 अक्टूबर है।
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निदेशालय स्तर पर से प्राप्त नए नियम के तहत संबंधित मदरसों में पहुंचकर ग्रुप फोटो खींचकर अपलोड कराने के लिए हर संभव कोशिश हो रही है। स्कूलों की संख्या अधिक होने के कारण अधिक समय लगना स्वाभाविक है। केंद्रांश तीन वर्ष से नहीं मिल रहा है। मिलने वाले राज्यांश की धनराशि संबंधित शिक्षकों के खाते में हस्तांतरित की जा रही है।
- आशुतोष पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी