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सड़ा आलू मिलने पर भड़के बाढ़ पीड़ित
Updated Sun, 03 Sep 2017 10:12 PM IST
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इटवा (सिद्धार्थनगर)। राहत सामग्री के नाम पर सड़ा आलू मिलने पर इमिलिया व गदाखौवा गांव के लोगों का गुस्सा फूट गया। नाराज ग्रामीणों में आलू मिलते ही हंगामा खड़ा कर दिया। वितरण करने आए कर्मचारियों ने समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन ग्रामीण माने नहीं मान रहे थे और अन्य सामग्री लेने से इनकार कर दिया। काफी कोशिशों के बाद ग्रामीणों के शांत होने पर वितरण शुरू हो सका।
बाढ़ग्रस्त गांवों में प्रशासन की ओर से आटा-चावल, दाल आदि राहत सामग्री का वितरण किया गया था। बाद में पीड़ितों में तेल-मसाला, बिस्किट, चना-लाई सहित 16 सामानों का एक अन्य पैकेट भी दिए जाने का निर्देश हुआ। वंचित परिवारों में यह सामग्री बांटी जा रही है। रविवार को ग्राम इमिलिया, गदाखौवा में शेष बची राहत सामग्री का वितरण होना था। वितरण शुरू होते ही सड़ा आलू देख ग्रामीण हंगामा करने लगे। कर्मचारियों ने काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण राजी नहीं हुए। बाद में आलू साथ लेने पर ही अन्य सामग्री दिए जाने की बाध्यता ठहराने पर ग्रामीणों ने सामग्री प्राप्त की। हालांकि आलू लेने के कुछ देर बाद ही ग्रामीणों ने उसे वहीं फेंक दिया। गदाखौवा निवासी रामबुझावन, मकसूद, लैमुननिशा, धनीराम, घमालू, मूसे, बदरुन्निशा, शकील अहमद, किशुन, रामकेवल, छबीले, मायाराम, अख्तर आदि का कहना था कि 502 परिवारों को शेष बचा राशन मिलना है। मजबूरी में सड़े आलू को लिया गया है, न लेने की स्थिति में अन्य सामानो को फिर दोबारा न देने की बात कही जा रही थी। शेष राशन की लालच में सड़े आलू को लेना पड़ा है। उधर, इस बाबत एसडीएम एम. जुबेर बेग का कहना था कि सड़ा आलू देने का मामला संज्ञान में नहीं लाया गया है। किसी भी हाल में सड़ा आलू बंटने नहीं दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ है तो संबंधितों से जवाब तलब किया जाएगा।
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बाढ़ग्रस्त गांवों में प्रशासन की ओर से आटा-चावल, दाल आदि राहत सामग्री का वितरण किया गया था। बाद में पीड़ितों में तेल-मसाला, बिस्किट, चना-लाई सहित 16 सामानों का एक अन्य पैकेट भी दिए जाने का निर्देश हुआ। वंचित परिवारों में यह सामग्री बांटी जा रही है। रविवार को ग्राम इमिलिया, गदाखौवा में शेष बची राहत सामग्री का वितरण होना था। वितरण शुरू होते ही सड़ा आलू देख ग्रामीण हंगामा करने लगे। कर्मचारियों ने काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण राजी नहीं हुए। बाद में आलू साथ लेने पर ही अन्य सामग्री दिए जाने की बाध्यता ठहराने पर ग्रामीणों ने सामग्री प्राप्त की। हालांकि आलू लेने के कुछ देर बाद ही ग्रामीणों ने उसे वहीं फेंक दिया। गदाखौवा निवासी रामबुझावन, मकसूद, लैमुननिशा, धनीराम, घमालू, मूसे, बदरुन्निशा, शकील अहमद, किशुन, रामकेवल, छबीले, मायाराम, अख्तर आदि का कहना था कि 502 परिवारों को शेष बचा राशन मिलना है। मजबूरी में सड़े आलू को लिया गया है, न लेने की स्थिति में अन्य सामानो को फिर दोबारा न देने की बात कही जा रही थी। शेष राशन की लालच में सड़े आलू को लेना पड़ा है। उधर, इस बाबत एसडीएम एम. जुबेर बेग का कहना था कि सड़ा आलू देने का मामला संज्ञान में नहीं लाया गया है। किसी भी हाल में सड़ा आलू बंटने नहीं दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ है तो संबंधितों से जवाब तलब किया जाएगा।
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