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इस वर्ष 3.86 अरब रुपये से होगा जिले का विकास
siddharthnagar
Updated Mon, 19 Mar 2018 11:36 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नीति आयोग के गोद लेने के बाद जिले के समग्र विकास के लिए बजट में बढ़ोत्तरी की गई है। नए वित्तीय सत्र में जिले के समग्र विकास का खाका खींचने के लिए जिला योजना के तहत तीन अरब छियासी करोड़ बाइस लाख रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। यह परिव्यय वित्तीय सत्र 2017-18 के सापेक्ष 2479 लाख रुपये अधिक है। परिव्यय निर्धारित होने के बाद सभी विभागों से कार्ययोजनाएं मांगी गई हैं। इसे संकलित कर एक सप्ताह में प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
जिले के सर्वांगीण विकास में जिला योजना प्रमुख माध्यम है। गांव से लेकर जिला स्तर तक विभिन्न विभागों के माध्यम से होने वाले सभी कार्यों को समाहित कर पूरे जिले की योजना तैयार की जाती है। शासन स्तर से इसके लिए प्रति वर्ष हर जिले का परिव्यय निर्धारित होता है, जिसके अनुसार विभागों से कार्ययोजनाएं ली जाती है। वित्तीय सत्र 2018-19 के लिए शासन ने जिले में तीन अरब छियासी करोड़ बाइस लाख रुपये का परिव्यय तय किया है।
वर्ष 2017-18 में यह परिव्यय तीन अरब 61 लाख 43 करोड़ था। परिव्यय में इस वृद्धि के लिए नीति आयोग व प्रदेश सरकार की विशेष निगाह को कारण माना जा रहा है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राजेश कुमार सिंह के मुताबिक निर्धारित परिव्यय के तहत विकास की वार्षिक योजना के लिए सभी विभागों से कार्ययोजनाएं मांगी गई है। स्वीकृत प्रस्तावों के आधार पर ही जिले में विकास कार्य कराए जाएंगे।
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सात विभागों ने अब तक नहीं दिए प्रस्ताव
वित्तीय सत्र 2018-19 की वार्षिक जिला योजना तैयार करने के लिए सात विभागों ने अब तक कार्ययोजना ही पेश नहीं किया है। इसमें पंचायती राज विभाग, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, पीडब्लूडी, जलनिगम, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, डीसी मनरेगा जैसे प्रमुख विभाग भी शामिल हैं। इन विभागों को तीन दिनों के अंदर कार्ययोजनाएं पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
2017-18 में अवमुक्त हुई सिर्फ 53 फीसदी राशि
वर्ष 2017-18 में जिले के विकास के लिए तीन अरब 61 करोड़ 43 लाख रुपये का परिव्यय अनुमोदित हुआ था। इसके सापेक्ष विभिन्न विभागों में 1 अरब 91 करोड़ 45 लाख रुपये ही अवमुक्त हो सके। पशुपालन विभाग ने सवा करोड़ का प्रस्ताव दिया था, उसे महज 18 लाख रुपये ही अवमुक्त हुए। पर्यटन विभाग के 1.10 करोड़ के प्रस्ताव के सापेक्ष फूटी कौड़ी नहीं मिली। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी के मुताबिक अवमुक्त धनराशि की 95 फीसदी राशि फरवरी तक ही खर्च की जा चुकी है।
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जिले के सर्वांगीण विकास में जिला योजना प्रमुख माध्यम है। गांव से लेकर जिला स्तर तक विभिन्न विभागों के माध्यम से होने वाले सभी कार्यों को समाहित कर पूरे जिले की योजना तैयार की जाती है। शासन स्तर से इसके लिए प्रति वर्ष हर जिले का परिव्यय निर्धारित होता है, जिसके अनुसार विभागों से कार्ययोजनाएं ली जाती है। वित्तीय सत्र 2018-19 के लिए शासन ने जिले में तीन अरब छियासी करोड़ बाइस लाख रुपये का परिव्यय तय किया है।
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वर्ष 2017-18 में यह परिव्यय तीन अरब 61 लाख 43 करोड़ था। परिव्यय में इस वृद्धि के लिए नीति आयोग व प्रदेश सरकार की विशेष निगाह को कारण माना जा रहा है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राजेश कुमार सिंह के मुताबिक निर्धारित परिव्यय के तहत विकास की वार्षिक योजना के लिए सभी विभागों से कार्ययोजनाएं मांगी गई है। स्वीकृत प्रस्तावों के आधार पर ही जिले में विकास कार्य कराए जाएंगे।
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सात विभागों ने अब तक नहीं दिए प्रस्ताव
वित्तीय सत्र 2018-19 की वार्षिक जिला योजना तैयार करने के लिए सात विभागों ने अब तक कार्ययोजना ही पेश नहीं किया है। इसमें पंचायती राज विभाग, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, पीडब्लूडी, जलनिगम, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, डीसी मनरेगा जैसे प्रमुख विभाग भी शामिल हैं। इन विभागों को तीन दिनों के अंदर कार्ययोजनाएं पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
2017-18 में अवमुक्त हुई सिर्फ 53 फीसदी राशि
वर्ष 2017-18 में जिले के विकास के लिए तीन अरब 61 करोड़ 43 लाख रुपये का परिव्यय अनुमोदित हुआ था। इसके सापेक्ष विभिन्न विभागों में 1 अरब 91 करोड़ 45 लाख रुपये ही अवमुक्त हो सके। पशुपालन विभाग ने सवा करोड़ का प्रस्ताव दिया था, उसे महज 18 लाख रुपये ही अवमुक्त हुए। पर्यटन विभाग के 1.10 करोड़ के प्रस्ताव के सापेक्ष फूटी कौड़ी नहीं मिली। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी के मुताबिक अवमुक्त धनराशि की 95 फीसदी राशि फरवरी तक ही खर्च की जा चुकी है।