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खैरी में फिर मरे नौ पशु
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:19 PM IST
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परसा (सिद्धार्थनगर)। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित खैरी शीतल प्रसाद के खैरी टोली में अज्ञात बीमारी से पशुओं के मरने का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटे में नौ और पशु बीमारी की भेंट चढ़ गए। गांव में अब तक 51 पशुओं की मौत हो चुकी है। सौ से अधिक पशु बीमार हैं। लगातार कैंप के बाद भी पशुपालन विभाग अब तक बीमारी की पहचान ही नहीं कर पाया है। विभाग ने गांव में सिर्फ 9 पशुओं के मरने की बात कही है।
हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलने वाला खैरी टोला इस बार एक पखवाड़े तक लगातार बाढ़ के पानी से घिरा रहा। पानी घटने के साथ यहां बीमारी फैलने लगी है। बीमारी की चपेट में आने से 29 अगस्त को गांव में 26 पशुओं की मौत हो गई थी। इसके बाद डीएम, सीडीओ सहित पशुपालन विभाग की टीम गांव में पहुंची थी। टीम ने पांच दिनों तक गांव में कैंप भी किया। इसके बावजूद न तो बीमारी पर अंकुश लगा है और न ही पशुओं के मरने का सिलसिला थम सका।
शुक्रवार को पांच व शनिवार को चार पशुओं की मौत हो गई। टोले में मरने वाले गायों की संख्या 51 तक पहुंच गई है। इसमें शिवकुमार की 11, नंदलाल की नौ, भदई की आठ, राजकुमार की पांच, बिरजे व सहतराम की चार-चार व रामलाल की तीन गाय व बछड़े शामिल हैं। टोले बुझावन, राजकुमार, बैतुल्लाह, असलम का कहना है कि गायों की बीमारी का अभी तक चिकित्सक पता नहीं लगा पाए हैं। इलाज तो हो रहा है, लेकिन जब रोग ही नहीं पता तो फायदा कहां होगा। लोगों के मुताबिक पहले गायों के शरीर पर घाव हो जाते हैं और फिर वे मर जाती हैं।
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अज्ञात बीमारी की नहीं हुई पहचान : सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीश सिंह का कहना है कि खैरी गांव में अभी नौ पशुओं की मौत हुई है। पशुओं की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र से दो वैज्ञानिकों को बुलाया गया था। कई पशुओं का पीएम कराया गया, बीमारी का लक्षण जानने के लिए ब्लड सेंपल भी लिया गया है। बाहर से आई टीम के सुझाव के अनुसार इलाज किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारियों का पता चल पाएगा।
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हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलने वाला खैरी टोला इस बार एक पखवाड़े तक लगातार बाढ़ के पानी से घिरा रहा। पानी घटने के साथ यहां बीमारी फैलने लगी है। बीमारी की चपेट में आने से 29 अगस्त को गांव में 26 पशुओं की मौत हो गई थी। इसके बाद डीएम, सीडीओ सहित पशुपालन विभाग की टीम गांव में पहुंची थी। टीम ने पांच दिनों तक गांव में कैंप भी किया। इसके बावजूद न तो बीमारी पर अंकुश लगा है और न ही पशुओं के मरने का सिलसिला थम सका।
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शुक्रवार को पांच व शनिवार को चार पशुओं की मौत हो गई। टोले में मरने वाले गायों की संख्या 51 तक पहुंच गई है। इसमें शिवकुमार की 11, नंदलाल की नौ, भदई की आठ, राजकुमार की पांच, बिरजे व सहतराम की चार-चार व रामलाल की तीन गाय व बछड़े शामिल हैं। टोले बुझावन, राजकुमार, बैतुल्लाह, असलम का कहना है कि गायों की बीमारी का अभी तक चिकित्सक पता नहीं लगा पाए हैं। इलाज तो हो रहा है, लेकिन जब रोग ही नहीं पता तो फायदा कहां होगा। लोगों के मुताबिक पहले गायों के शरीर पर घाव हो जाते हैं और फिर वे मर जाती हैं।
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अज्ञात बीमारी की नहीं हुई पहचान : सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीश सिंह का कहना है कि खैरी गांव में अभी नौ पशुओं की मौत हुई है। पशुओं की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र से दो वैज्ञानिकों को बुलाया गया था। कई पशुओं का पीएम कराया गया, बीमारी का लक्षण जानने के लिए ब्लड सेंपल भी लिया गया है। बाहर से आई टीम के सुझाव के अनुसार इलाज किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारियों का पता चल पाएगा।