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पहले 40 था, अब 64 हुआ छात्र-शिक्षक अनुपात

Wed, 26 Jul 2017 10:38 PM IST
Updated Wed, 26 Jul 2017 10:38 PM IST
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पहले 40 था, अब 64 हुआ छात्र-शिक्षक अनुपात
सिद्धार्थनगर। शिक्षकों की कमी झेल रहे जिले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नया संकट खड़ा हो गया है। करीब 21 सौ शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने से हर ब्लॉक में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है। फैसले के बाद समायोजित शिक्षकों के न आने से बुधवार को तमाम स्कूलों का ताला भी नहीं खुल सका। सरप्लस शिक्षकों के समायोजन से पढ़ाई सुचारू करने की कोशिश में जुटे विभाग को भी तगड़ा झटका लगा है। अफसर पूरे दिन इसी माथापच्ची में लगे रहे कि स्कूलों का नियमित संचालन कैसे कराएं।
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जिले में 1924 प्राथमिक स्कूलों में नामांकित 2.33 लाख बच्चों के अध्यापन के लिए कुल 5778 शिक्षक नियुक्त हैं। इनमें 2128 वह शिक्षक भी हैं, जिन्हें शिक्षामित्र से समायोजित किया गया था। शिक्षकों की इतनी संख्या के बावजूद प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 40 का ही है, जो शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के मानक (35) से भी कम है। 15 प्राथमिक स्कूल शिक्षक विहीन हैं, जबकि 217 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। अब शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। छात्र-शिक्षक का अनुपात 64 तक हो गया है। समायोजित शिक्षकों के सहारे संचालित तमाम स्कूलों पर बुधवार को ताला ही नहीं खुला।
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इटवा, भनवापुर, डुमरियागंज, खुनियांव, मिठवल, बांसी, बर्डपुर, बढ़नी व लोटन ब्लॉकों में महज 25 फीसदी स्कूल ही खुले रहे। इन स्कूलों में भी समायोजित शिक्षकों के हटने का असर साफ दिखा। कहीं एक शिक्षक पूरे स्कूल को संभाले हुए थे तो कहीं समायोजन से वंचित शिक्षा मित्रों के भरोसे स्कूल थे।
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अचानक आए संकट से विभागीय अफसर भी पशोपेश में हैं। उनके सामने सभी स्कूलों का नियमित संचालन सुचारू करने की समस्या खड़ी हो गई है। इस बाबत बीएसए मनीराम सिंह ने बताया कि कोर्ट के फैसले के बाद शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। उसके अनुरूप कदम उठाया जाएगा। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।


इस्तीफा देकर समायोजित हुए थे शिक्षामित्र
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने शिक्षामित्रों को दोहरा झटका दिया है। कोर्ट ने उनका समायोजन रद्द किया है और साथ ही शिक्षा मित्र बने रहने की बात भी कही है। इस फैसले से शिक्षामित्र असमंजस में हैं। समायोजन के वक्त विभाग ने उनसे शिक्षामित्र पद से इस्तीफा ले लिया था। लिहाजा अब वह शिक्षा मित्र भी नहीं हैं। ऐसे में अब वापस उन्हें किस तरह शिक्षा मित्र बनाया जाएगा, इस पर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है।
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