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नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर दो फीट आया पानी, आवागमन बाधित
Updated Thu, 17 Aug 2017 11:28 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नेपाल से आने वाली पहाड़ी नदियों में उफान के चलते जिला मुख्यालय की स्थिति टापू जैसी होती जा रही है। सभी प्रमुख संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ने से सड़क यातायात बुरी तरह बाधित हो गया है। जिले से बाहर जाने के लिए ट्रेन कासहारा लोग ले रहे हैं। अपनी जरूरतों के लिए लोग जान जोखिम में डालकर निजी वाहनों के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं।
नौगढ़-बांसी व ढेबरुआ-इटवा मार्ग पर पहले से ही पानी चढ़ा था। बुधवार को नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर पानी चढ़ना शुरू हुआ, जो गुरुवार की सुबह तक इस स्थिति तक पहुंच गया कि वाहनों का संचालन बंद करना पड़ा। लोग अपने रिस्क पर छोटे चार पहिया व दो पहिया वाहनों को पार कर रहे हैं। मार्ग पर पकड़ी चौराहे से मधवापुर के बीच तीन जगहों पर पानी चढ़ा हुआ है। पानी के बहाव से सड़क पर बन गए गड्ढों को पार करना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है। बावजूद लोग अपने साधनों से रिस्क लेकर आ-जा रहे हैं। इन प्रमुख मार्गों पर पानी चढ़ने से जिला मुख्यालय इटवा, डुमरियागंज व बांसी तहसीलों से कट गया है। इसके अलावा नौगढ़-बर्डपुर मार्ग पर पुरानी नौगढ़ के पास भी पानी चढ़ने से यातायात प्रभावित है। वहीं जिला मुख्यालय को लोटन क्षेत्र से जोडने वाली सड़क नौगढ़-सोहांस मार्ग पर पिठनी घाट के पास पहले से पानी चल रहा है। इस मार्ग पर इतना पानी है कि वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप है। लोग मजबूरन नावों के सहारे आ-जा रहे हैं। नौगढ़ तहसील क्षेत्र के अन्य इलाकों की हालत भी बाढ़ के चलते दयनीय बनी हुई है। बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण सौ से ज्यादा गांवों के लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर उसका बाजार से पहले महुलानी व छितरापार जाने वाले मार्ग पर पांच फिट से अधिक पानी चल रहा है। जिसके चलते इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। सबसे बुरा हाल उसका-सोहांस मार्ग का है। यहां परसा खुर्द से लेकर सोहांस तक कई जगह मार्ग पर पानी चल रहा है। गौशाला चौराहा, फुलवरिया, करछुलिया के पास सड़क पर पानी का तेज बहाव है। लोग जान जोखिम में डाल कर अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आवाजाही को मजबूर हैं। करछुलिया घाट से सटा भलुहा गांव टापू में तब्दील हो गया है। गांव के चारो तरफ बना रिंग बाध पानी से घिरा हुआ है। गांव के लोग नांव के सहारे किसी तरह सड़क तक पहुंच रहे हैं।
पानी से घिरे दो निजी स्कूल, भारी नुकसान
सिद्धार्थनगर। पकड़ी में बने दो स्कूलों सेम्फोर्ड व सेंट्रल एकेडमी पूरी तरह पानी से घिरे हुए हैं। इन स्कूलों की पहली मंजिल में छह फीट से ज्यादा पानी भर गया है। हालत यह है कि स्कूल में लगी खिड़की से पानी घुस रहा है। बाढ़ के चलते दोनों स्कूल वैसे तो पहले से ही बंद कर दिए गए थे लेकिन अचानक आए सैलाब से स्कूल का काफी नुकसान हुआ। पहली मंजिल के फर्नीचर व दफ्तरों में रखे सामान डूब गए और परिसर में खड़े वाहन भी पानी में फंसे हुए हैं।
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लोगों तक नहीं पहुंच रही प्रशासन की मदद
उसका बाजार। बाढ़ प्रभावित गांव फुलवरिया के पूर्व ग्राम प्रधान राम किशोर ने बताया कि पिछले कई दिनों से बाढ़ के पानी से क्षेत्र घिरा हुआ है। लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। राहत के नाम पर अब तक कुछ नहीं मिला है। बाढ़ से घिरे लोग किसी तरह से अपनी जरूरत की चीजों का इंतजाम कर रहे हैं। ग्राम बसावनपुर के आनंद सिंह ने बताया कि न तो बाढ़ चौकी और न ही राहत कैंप कहीं काम करता नजर आ रहा है। लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। महुलानी निवासी सूर्यमणि ने बताया कि उनके गांव के साथ पूरा क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित है। संपर्क मार्गों पर काफी पानी है, लिहाजा लोगों की आवाजाही बंद है। प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय है। लोगों को राहत सामग्री के नाम पर अब तक कुछ नहीं मिला है। कटकी के राम प्रकाश ने बताया कि बाढ़ से घिरे लोगों को राहत पहुंचाने में प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। जिले में हर साल बाढ़ से तबाही मचती है बावजूद इसके प्रशासन ने समय रहते कोई तैयारी नहीं की।
नौगढ़-बांसी व ढेबरुआ-इटवा मार्ग पर पहले से ही पानी चढ़ा था। बुधवार को नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर पानी चढ़ना शुरू हुआ, जो गुरुवार की सुबह तक इस स्थिति तक पहुंच गया कि वाहनों का संचालन बंद करना पड़ा। लोग अपने रिस्क पर छोटे चार पहिया व दो पहिया वाहनों को पार कर रहे हैं। मार्ग पर पकड़ी चौराहे से मधवापुर के बीच तीन जगहों पर पानी चढ़ा हुआ है। पानी के बहाव से सड़क पर बन गए गड्ढों को पार करना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है। बावजूद लोग अपने साधनों से रिस्क लेकर आ-जा रहे हैं। इन प्रमुख मार्गों पर पानी चढ़ने से जिला मुख्यालय इटवा, डुमरियागंज व बांसी तहसीलों से कट गया है। इसके अलावा नौगढ़-बर्डपुर मार्ग पर पुरानी नौगढ़ के पास भी पानी चढ़ने से यातायात प्रभावित है। वहीं जिला मुख्यालय को लोटन क्षेत्र से जोडने वाली सड़क नौगढ़-सोहांस मार्ग पर पिठनी घाट के पास पहले से पानी चल रहा है। इस मार्ग पर इतना पानी है कि वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप है। लोग मजबूरन नावों के सहारे आ-जा रहे हैं। नौगढ़ तहसील क्षेत्र के अन्य इलाकों की हालत भी बाढ़ के चलते दयनीय बनी हुई है। बाढ़ के पानी से घिरे होने के कारण सौ से ज्यादा गांवों के लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। नौगढ़-गोरखपुर मार्ग पर उसका बाजार से पहले महुलानी व छितरापार जाने वाले मार्ग पर पांच फिट से अधिक पानी चल रहा है। जिसके चलते इस क्षेत्र के दर्जनों गांवों का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। सबसे बुरा हाल उसका-सोहांस मार्ग का है। यहां परसा खुर्द से लेकर सोहांस तक कई जगह मार्ग पर पानी चल रहा है। गौशाला चौराहा, फुलवरिया, करछुलिया के पास सड़क पर पानी का तेज बहाव है। लोग जान जोखिम में डाल कर अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आवाजाही को मजबूर हैं। करछुलिया घाट से सटा भलुहा गांव टापू में तब्दील हो गया है। गांव के चारो तरफ बना रिंग बाध पानी से घिरा हुआ है। गांव के लोग नांव के सहारे किसी तरह सड़क तक पहुंच रहे हैं।
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पानी से घिरे दो निजी स्कूल, भारी नुकसान
सिद्धार्थनगर। पकड़ी में बने दो स्कूलों सेम्फोर्ड व सेंट्रल एकेडमी पूरी तरह पानी से घिरे हुए हैं। इन स्कूलों की पहली मंजिल में छह फीट से ज्यादा पानी भर गया है। हालत यह है कि स्कूल में लगी खिड़की से पानी घुस रहा है। बाढ़ के चलते दोनों स्कूल वैसे तो पहले से ही बंद कर दिए गए थे लेकिन अचानक आए सैलाब से स्कूल का काफी नुकसान हुआ। पहली मंजिल के फर्नीचर व दफ्तरों में रखे सामान डूब गए और परिसर में खड़े वाहन भी पानी में फंसे हुए हैं।
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लोगों तक नहीं पहुंच रही प्रशासन की मदद
उसका बाजार। बाढ़ प्रभावित गांव फुलवरिया के पूर्व ग्राम प्रधान राम किशोर ने बताया कि पिछले कई दिनों से बाढ़ के पानी से क्षेत्र घिरा हुआ है। लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। राहत के नाम पर अब तक कुछ नहीं मिला है। बाढ़ से घिरे लोग किसी तरह से अपनी जरूरत की चीजों का इंतजाम कर रहे हैं। ग्राम बसावनपुर के आनंद सिंह ने बताया कि न तो बाढ़ चौकी और न ही राहत कैंप कहीं काम करता नजर आ रहा है। लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। महुलानी निवासी सूर्यमणि ने बताया कि उनके गांव के साथ पूरा क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित है। संपर्क मार्गों पर काफी पानी है, लिहाजा लोगों की आवाजाही बंद है। प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय है। लोगों को राहत सामग्री के नाम पर अब तक कुछ नहीं मिला है। कटकी के राम प्रकाश ने बताया कि बाढ़ से घिरे लोगों को राहत पहुंचाने में प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। जिले में हर साल बाढ़ से तबाही मचती है बावजूद इसके प्रशासन ने समय रहते कोई तैयारी नहीं की।