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जागरूकता कार्यक्रम के बाद भी घट रही गन्ने की खेती

Tue, 25 Jun 2019 10:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 25 Jun 2019 10:28 PM IST
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जागरूकता कार्यक्रम के बाद भी घट रही गन्ने की खेती
ganna - फोटो : amar ujala
सिद्धार्थनगर। पूर्व में जिले की प्रमुख फसलों में शामिल रहे गन्ने की खेती का दायरा अब कम हो गया है। सरकार की तरफ से चलाए जा रहे जागरूकता व किसानों को सहायता देने वाले कार्यक्रमों के बावजूद इसकी खेती दायरा नहीं बढ़ पा रहा है। हालत यह है कि वर्तमान में जिले में चार हजार हेक्टेयर से भी कम क्षेत्र में गन्ने की खेती हो रही है।
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तीन दशक पूर्व जिले की पांचों तहसील क्षेत्रों के किसान 40 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की खेती करते थे। जबकि यहां के गन्ना किसानों को अपनी फसल बढ़नी, बलरामपुर जिले के तुलसीपुर स्थित चीनी मिलों में बिक्री करनी पड़ती थी। वर्तमान में इसकी खेती का दायरा चार हजार हेक्टेयर तक सिमट गया है। यह हालत तब है जब लाखों खर्च कर सरकार की तरफ संचालित जागरूकता और किसानों को सहयोग देने के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गन्ना विकास विभाग की तरफ से जिला योजना के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2017-18 में गन्ना के उन्नतशील बीज उत्पादन/वितरण कार्यक्रम के लिए 3.15 लाख रुपये, बीज व भूमि उपचार कार्यक्रम के लिए 1.55 लाख समेत पांच लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके सापेक्ष इन कार्यक्रमों पर सिर्फ एक लाख रुपये ही खर्च हो सका। वहीं वित्तीय वर्ष 2018-19 में विभाग की तरफ से इन कार्यक्रमों पर सिर्फ एक लाख रुपये का ही प्रस्ताव शासन को भेजा गया। जिला गन्ना अधिकारी मंजू सिंह का कहना है कि सरकार के तरफ से गन्ना का उत्पादन बढ़ाने के साथ ही खेती का दायरा बढ़ाने के लिए भी किसानों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें जरूरी सहुलियतें उपलब्ध कराने की योजनाएं संचालित है। जिले में इन योजनाओं का क्रियान्वयन भी हो रहा है।
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लक्ष्य से पीछे रहे कई सरकारी योजनाएं
वर्ष 2017-18 में चार सौ हेक्टेयर में गन्ना बीज एवं भूमि उपचार कार्यक्रम का लक्ष्य रखा गया था, इसके सापेक्ष सिर्फ 57 हेक्टेयर क्षेत्र में यह कार्यक्रम हो सका। इसी तरह दो सौ हेक्टेयर में पैडी प्रबंध कार्यक्रम होना था, इसके सापेक्ष 78 हेक्टेयर में इसको कराया जा सका। इसी तरह 25 सौ हेक्टेयर में जैव उर्वरक/वर्मी कंपोस्ट आदि कार्यक्रम संचालित होना था, इसके सापेक्ष सिर्फ 44 हेक्टेयर में ही यह योजना संचालित हो सकी।
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रुधौली मिल संचालन से बढ़ सकता है खेती का दायरा
पूर्व में यहां के किसानों को अपनी गन्ने की फसल की बिक्री करने के लिए बढ़नी व नेपाल समेत बलरामपुर के तुलसीपुर स्थित चीनी मिलों का चक्कर लगाना पड़ता था। अब नजदीक में ही बस्ती के रुधौली में चीनी मिल संचालित होने से गन्ने की फसल की बिक्री करने में किसानों को राहत मिलेगी। इससे जिले में गन्ना उैत्पादन बढ़ने के साथ खेती का दायरा भी बढ़ने की संभावना है।
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