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स्वास्थ्य मंत्री के जिले में लंबे समय से अनुपस्थित है 15 चिकित्सक 19-05-00

Thu, 28 Jan 2021 10:17 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jan 2021 10:17 PM IST
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15 doctors have long been absent in the health minister's district
स्वास्थ्य मंत्री के जिले में लंबे समय से अनुपस्थित हैं 15 चिकित्सक
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सीएमओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों की सूची शासन को भेजी
स्वास्थ्य मंत्री बोले, अनुपस्थित चिकित्सकों के खिलाफ होगी कार्रवाई
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के गृह जनपद में 15 चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित हैं। सीएमओ कार्यालय की ओर से इन चिकित्सकों पर कार्रवाई किए जाने की सिफारिश शासन से की गई है। स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह मामले की जानकारी लेने के बाद इन चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र की महिला, गर्भवती और प्रसूताओं को परामर्श और इलाज के लिए या तो जिला अस्पताल जाना पड़ता है या निजी अस्पताल। वजह, यहां करीब आठ साल से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। सीएमओ कार्यालय की ओर से यहां फरवरी 2015 में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका की तैनाती की गई थी। सीएचसी अधिकारियों के अनुसार पदभार ग्रहण करने के बाद वह कभी आई ही नहीं। डॉ. निहारिका की ही तरह जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पांच नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजे गए 15 चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित हैं। चिकित्सक नहीं होने के कारण इन सीएचसी और न्यू पीएचसी पर स्वास्थ्य प्रशासन का संचालन और चिकित्सा सुविधा और स्वास्थ्य प्रशासन सुविधाएं क्षेत्र की जनता को पूर्ण रूप से नहीं मिल पा रही हैं। अनुपस्थित चिकित्सकों के कारण इन सीएचसी और न्यू पीएचसी पर दूसरे चिकित्सकों को तैनात नहीं किया जा पा रहा है, क्योंकि उन्होंने पद नहीं छोड़ा है।
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कोट
सात चिकित्सक 2015 से अनुपस्थित हैं, जबकि छह इससे भी पहले से। एक चिकित्सक फरवरी 2018 से ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। शासन को इन चिकित्सकों की सूची बना कर भेजी गई है। इन पर कार्रवाई शासन स्तर से ही होगी।
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-डॉ. इंद्रविजय विश्वकर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सिद्धार्थनगर
कोट
लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे डेढ़ सौ चिकित्सकों को एक वर्ष पहले बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई थी। इन बर्खास्त चिकित्सकों में सिद्धार्थनगर के अनुपस्थित डॉक्टर शामिल हैं या नहीं इसकी जानकारी लूंगा। इन पर कार्रवाई की जाएगी।
-जय प्रताप सिंह, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तर प्रदेश
आकांक्षी जिले में मात्र-शिशु मृत्यु दर अधिक
पिछड़ा जिला होने के कारण सिद्धार्थनगर को आकांक्षी जनपद घोषित किया गया है। जनपद में मातृ-शिशु मृत्यु दर प्रदेश से अधिक है। ऐसे में चिकित्सिकों की अनुपस्थिति स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट की वजह साबित हो रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर की जानकारी देती है। एनएचएम रिपोर्ट के अनुसार जिले में शिशु मृत्युदर 87 प्रति एक हजार है जबकि प्रदेश में यह दर 50 प्रति हजार है। जिले में प्रति हजार नवजात में 70 मृत्यु का शिकार होते हैं जबकि प्रदेश में यह दर 35 है। मातृ मृत्यु अनुपात 304 है जबकि प्रदेश का मातृ मृत्यु अनुपात 285 था। यह आंकड़ा 2011 से 2013 के बीच का है। जिले में एक हजार बच्चों में 121 पांच साल की उम्र पूरी नहीं कर पाते जबकि प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर महज 64 प्रति हजार है।

अनुपस्थित चिकित्सकों की सूची
चिकित्सक का नाम तैनाती कब से अनुपस्थित
डॉ. संजय शाही एमओ न्यू पीएचसी सिरसिया अगस्त 2011
डॉ. अभिषेक सिंह एमओ सीएचसी शोहरतगढ़ जून 2012
डॉ. नेहा सिन्हा सीएचसी बढ़नी चाफा नवंबर 2013
डॉ. रोहित कुमार एमओ न्यू पीएचसी टिकुर अक्तूबर 2013
डॉ. विशांत कुमार एमओ सीएचसी मिठवल अगस्त 2014
डॉ. पारुल वर्मा एमओ सीएचसी खेसरहा नवंबर 2014
डॉ. ज्योत्सना ओझा स्त्री रोग वि. सीएचसी शोहरतगढ़ फरवरी 2015
डॉ. सविता गुप्ता एमओ सीएचसी इटवा जून 2015
डॉ. सुशील कुमार एमओ सीएचसी खेसरहा जून 2015
डॉ. प्रवीण आनंद एमओ न्यू पीएचसी अलीदापुर जून 2015
डॉ. रजनीश चौधरी एमओ न्यू पीएचसी चेतिया जून 2015
डॉ. अंकित श्रीवास्तव एमओ न्यू पीएचसी अकरहरा अक्तूबर 2015
डॉ. निहारिका स्त्री रोग वि. सीएचसी इटवा दिसंबर 2015
डॉ. नेहा सिंह एमओ न्यू पीएचसी मोहनकोला फरवरी 2018
डॉ. अभिषेक कुमार सिंह न्यू पीएचसी सेमरहना अगस्त 2018
जेई-एईएस प्रकोप वाले जिलों में शामिल
तराई क्षेत्र का जिला होने के कारण सिद्धार्थनगर भी परंपरागत रूप से जेई-एईएस के प्रकोप से ग्रस्त रहता है। ऐसे में प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अनुपस्थिति के कारण चिकित्सकों की कमी और परेशानी का कारण बनती है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था गौतमबुद्ध जागृति संस्था के सचिव श्रीधर पांडेय कहते हैं कि चिकित्सकों की कमी के कारण जेई-एईएस की रोकथाम के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं हो पाती। जिन सीएचसी-पीएचसी पर चिकित्सा अधिकारी नही हैं, वहां तैनात चिकित्सक मरीजों का इलाज करें, प्रशासनिक कार्य निपटाएं या फिर वेक्टर बॉर्न बीमारियों पर काबू पाने के लिए क्षेत्र में निकलें? सभी काम एक चिकित्सक के लिए मुमकिन नहीं।
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