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जिले में अब भी 112 गांव बाढ़ से प्रभावित
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झुंगहवा-झुलनीपुर मार्ग पर कटान जारी रही।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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जिले में अब भी 112 गांव बाढ़ से प्रभावित
सिद्धार्थनगर। जिले की सभी नदियों का जलस्तर खतरे के लाल निशान से नीचे आने के साथ कई सड़कों से पानी हट गया है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत हो गई है। हालांकि अब भी 112 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और 48 गांव संपर्क विहीन हैं।
सोमवार को राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान से 56 सेमी नीचे पहुंच गया है। बूढ़ी राप्ती भी लाल निशान से दो मीटर नीचे बह रही है। साथ ही कूड़ा, बानगंगा, घोघी, जमुआर, तेलार भी खतरे के निशान से नीचे है। इससे बांसी, नौगढ़, शोहरतगढ़, डुमरियागंज आदि क्षेत्र के कई सड़कों से पानी हट गया है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 112 गांव बाढ़ प्रभावित हैं, जबकि 48 गांव संपर्क विहीन हैं। बाढ़ के दौरान 417 गांव बाढ़ प्रभावित थे और संपर्क विहीन गांवों की संख्या 181 है।
जैसे-जैसे नदियों का पानी कम हो रहा है, वैसे ही बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याएं कम हो रही हैं। बाढ़ के कारण गांवों से घर छोड़कर बांधों पर शरण लेने वाले लोगों अब भी ऊंचे स्थानों पर ही हैं, क्योंकि गांवों में पानी निकलने के बाद भी कहीं-कहीं जलभराव और गंदगी पड़ी हुई हैं। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से कम हो गया है। फिलहाल 112 गांव बाढ़ प्रभावित हैं और 48 गांव संपर्क विहीन हैं।
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सिद्धार्थनगर। जिले की सभी नदियों का जलस्तर खतरे के लाल निशान से नीचे आने के साथ कई सड़कों से पानी हट गया है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में सहूलियत हो गई है। हालांकि अब भी 112 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और 48 गांव संपर्क विहीन हैं।
सोमवार को राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान से 56 सेमी नीचे पहुंच गया है। बूढ़ी राप्ती भी लाल निशान से दो मीटर नीचे बह रही है। साथ ही कूड़ा, बानगंगा, घोघी, जमुआर, तेलार भी खतरे के निशान से नीचे है। इससे बांसी, नौगढ़, शोहरतगढ़, डुमरियागंज आदि क्षेत्र के कई सड़कों से पानी हट गया है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 112 गांव बाढ़ प्रभावित हैं, जबकि 48 गांव संपर्क विहीन हैं। बाढ़ के दौरान 417 गांव बाढ़ प्रभावित थे और संपर्क विहीन गांवों की संख्या 181 है।
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जैसे-जैसे नदियों का पानी कम हो रहा है, वैसे ही बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याएं कम हो रही हैं। बाढ़ के कारण गांवों से घर छोड़कर बांधों पर शरण लेने वाले लोगों अब भी ऊंचे स्थानों पर ही हैं, क्योंकि गांवों में पानी निकलने के बाद भी कहीं-कहीं जलभराव और गंदगी पड़ी हुई हैं। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से कम हो गया है। फिलहाल 112 गांव बाढ़ प्रभावित हैं और 48 गांव संपर्क विहीन हैं।
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