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घर जाकर आशा-एएनएम जांचेंगी नमक की गुणवत्ता
siddharthnagar
Updated Fri, 26 Oct 2018 10:49 PM IST
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- फोटो : Internet
सिद्धार्थनगर। नमक में आयोडीन की कमी से शिशु का विकास नहीं हो पाता है। बच्चे अविकसित न हों इसके लिए सिद्धार्थनगर समेत प्रदेश के 24 जिलों आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर नमक की गुणवत्ता जांचेंगी। इस दौरान घर के लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी। नमक की गुणवत्ता की जांच के लिए इन्हें किट उपलब्ध कराई जाएगी। एक किट से 50 घरों में जांच की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिले में 6000 लोगों में आयोडीन की कमी है।
दरअसल, स्वास्थ्य के लिए नमक में आयोडीन का होना आवश्यक है। बावजूद इसके अभी भी बड़ी संख्या में लोग आयोडीनयुक्त नमक का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कई कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक किए जाने के बाद भी आशातीत सफलता नहीं मिली। प्रदेश में 24 ऐसे जिले हैं, जहां पर आयोडीन की कमी से लोग कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आए हैं। इस कार्यक्रम के द्वारा 2019 तक आयोडीन की कमी से होने वाले बीमारियों को 10 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत आशा और एएनएम घर-घर जाकर नमक में आयोडीन की जांच करेंगी।
बर्डपुर पीएचसी के चिकित्सक डॉ. सुबोध चंद्रा ने बताया कि किशोर व व्यस्कों के लिए प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम, एक से 11 साल के बच्चों के लिए 90-100, एक वर्ष कम के शिशु के लिए 50 से 90 और गर्भवती महिलाओं के लिए 200 से 220 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है। अगर इससे कम का प्रयोग किया गया तो तमाम तरह की बीमारियां उत्पन्न होंगी। वयस्क ब्लड प्रेशर की चपेट में आएंगे। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से बच्चों पर सबसे ज्यादा असर होता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि जल्द ही आशा और एएनएम को जांच के लिए लगाया जाएगा। जिससे की आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से लोगों को बचाया जा सके।
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ये जिले हैं शामिल
नमक में आयोडीन की जांच के लिए जिन जिलों को चिह्नित किया गया है उनमें सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया, गोरखपुर, आजमगढ़, बनारस, सुल्तानपुर सहित 24 जिले शामिल हैं।
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दरअसल, स्वास्थ्य के लिए नमक में आयोडीन का होना आवश्यक है। बावजूद इसके अभी भी बड़ी संख्या में लोग आयोडीनयुक्त नमक का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। कई कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक किए जाने के बाद भी आशातीत सफलता नहीं मिली। प्रदेश में 24 ऐसे जिले हैं, जहां पर आयोडीन की कमी से लोग कई प्रकार की बीमारियों की चपेट में आए हैं। इस कार्यक्रम के द्वारा 2019 तक आयोडीन की कमी से होने वाले बीमारियों को 10 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत आशा और एएनएम घर-घर जाकर नमक में आयोडीन की जांच करेंगी।
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बर्डपुर पीएचसी के चिकित्सक डॉ. सुबोध चंद्रा ने बताया कि किशोर व व्यस्कों के लिए प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम, एक से 11 साल के बच्चों के लिए 90-100, एक वर्ष कम के शिशु के लिए 50 से 90 और गर्भवती महिलाओं के लिए 200 से 220 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है। अगर इससे कम का प्रयोग किया गया तो तमाम तरह की बीमारियां उत्पन्न होंगी। वयस्क ब्लड प्रेशर की चपेट में आएंगे। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से बच्चों पर सबसे ज्यादा असर होता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि जल्द ही आशा और एएनएम को जांच के लिए लगाया जाएगा। जिससे की आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों से लोगों को बचाया जा सके।
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ये जिले हैं शामिल
नमक में आयोडीन की जांच के लिए जिन जिलों को चिह्नित किया गया है उनमें सिद्धार्थनगर, बस्ती, देवरिया, गोरखपुर, आजमगढ़, बनारस, सुल्तानपुर सहित 24 जिले शामिल हैं।