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सोया की जगह बांट रहे पाम ऑयल
Updated Sun, 03 Sep 2017 10:04 PM IST
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डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। बाढ़ पीड़ितों में सरकार गुणवत्ता पूर्ण सामग्री वितरण के दावे कर रही है। लेकिन ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं। रविवार को बाढ़ पीड़ितों में वितरण के लिए आए राहत सामग्री के पैकेट खोले गए तो अंदर सोया ऑयल की जगह पॉम आयल और भूने हुए चने की जगह सूखे चने रखे मिले। जबकि वितरण के लिए आया आलू भी सड़ा हुआ था। अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता व मात्रा भी संतोषजनक नहीं थी। एसडीएम, तहसीलदार यह देख खुद अचंभित रह गए। हालांकि आपूर्ति विभाग के जिम्मेदार चहेती फर्म का सामान खपाने के लिए उसके बचाव में जुटे रहे।
बाढ़ खत्म होने के बाद पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। आटा, चावल के साथ पीड़ितों को 16 सामग्रियों का अतिरिक्त पैकेट भी दिया जा रहा है जिसमें तेल, मसाला, लाई-भूना चना सहित अन्य सामग्री मौजूद हैं। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ राहत सामग्री वितरण के लिए शाहपुर मंडी समिति को केंद्र बनाया गया है। गुणवत्ता में गड़बड़ी की शिकायत पर रविवार को इस केंद्र पर पहुंचकर एसडीएम राजेंद्र प्रसाद व तहसीलदार लालता प्रसाद ने पैकेट खोलवाए तो अंदर मौजूद सामानों को देख भौंचक रह गए। पैकेट में भूने हुए चने की बजाय कच्चे चने रखे गए थे। इसमें कंकड़ के साथ ही एक तिहाई मिट्टी भी भरी हुई थी। चने में घुन लगे हुए थे।
नगर के व्यापारियों के मुताबिक बाजार इस क्वालिटी का चना 45 से 52 रुपये तक है, जबकि पैकेट में रखे दो किलो चने को 98 रुपये प्रति किलो की दर से लिया जा रहा है। इसी तरह खाद्य तेल में घपला हो रहा है। पीड़ितों में सोया रिफाइंड तेल की आपूर्ति होनी है, जबकि पॉम आयल की सप्लाई की जा रही है। यही नहीं पैकेट के साथ दिए जा रहे 5 किलो आलू का भी दाम बाजार के सापेक्ष बिल में दोगुना बिल में जोड़ा गया है। इस बाबत जब डीएसओ नरेंद्र तिवारी से बात की गई तो उन्होंने चने को अच्छी गुणवत्ता का बताया। कहा कि ऑयल खाने लायक है। उसके पैकेट पर आईएसआई का ट्रेडमार्क लगा है।
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उधर, डुमरियागंज एसडीएम राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि शनिवार को सड़ा हुआ आलू से भरा ट्रक आया था, उससे दुर्गंध आ रही थी। उसे सेंटर पर उतरवाने से मना कर दिया था। चने की गुणवत्ता खराब होने के साथ ही पॉम आयल की सप्लाई को गलत बताते हुए इसकी रिपोर्ट डीएम को करने के साथ ही भुगतान में रेट कम करवाने की बात कही।
जिले के व्यापारियों को भुलाकर बाहरी को दी आपूर्ति की जिम्मेदारी
डुमरियागंज। बाढ़ की विभीषिका के दौरान बाढ़ग्रस्त गांवों का संपर्क टूटने और जिला मुख्यालय पर जाने के लिए सभी मार्ग अवरुद्ध होने के बाद डीएम की पहल पर जिले के व्यापारियों को बाढ़ राहत सामग्री वितरण के लिए आमंत्रित किया गया था। नवशक्ति राइस मिल नौगढ़, श्रीलक्ष्मी फूड रमवापुर कली, केदारनाथ नारायण नाथ उसका, सावित्री देवी कटरा, श्रद्धा कंस्ट्रक्शन गोरखपुर जैसी फर्मों ने बाढ़ग्रस्त गांवों में नाव आदि के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई थी। बाढ़ कम होने के बाद सीएम ने जब पीड़ितों तक बिस्कुट, हल्दी, मिर्चा, धनिया, रिफाइन तेल, भूना हुआ चना, लाई आदि सामग्री सहित आलू की अतिरिक्त मात्रा देने का निर्देश दिया तो डीएसओ नरेंद्र तिवारी ने सभी सप्लायरों को आपूर्ति से रोककर कानपुर की फर्म को जिम्मा सौंप दिया। व्यापारी बिहारी लाल, अजय कुमार, धर्मपाल सिंह, अनूप कुमार आदि ने बताया कि उनके साथ गलत हुआ है। आफत के समय में सप्लाई हमने दिया, जब दो पैसा मिलने को हुआ तो बाहरी ठेकेदार को आपूर्ति दे दी गई।
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बाढ़ खत्म होने के बाद पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। आटा, चावल के साथ पीड़ितों को 16 सामग्रियों का अतिरिक्त पैकेट भी दिया जा रहा है जिसमें तेल, मसाला, लाई-भूना चना सहित अन्य सामग्री मौजूद हैं। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ राहत सामग्री वितरण के लिए शाहपुर मंडी समिति को केंद्र बनाया गया है। गुणवत्ता में गड़बड़ी की शिकायत पर रविवार को इस केंद्र पर पहुंचकर एसडीएम राजेंद्र प्रसाद व तहसीलदार लालता प्रसाद ने पैकेट खोलवाए तो अंदर मौजूद सामानों को देख भौंचक रह गए। पैकेट में भूने हुए चने की बजाय कच्चे चने रखे गए थे। इसमें कंकड़ के साथ ही एक तिहाई मिट्टी भी भरी हुई थी। चने में घुन लगे हुए थे।
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नगर के व्यापारियों के मुताबिक बाजार इस क्वालिटी का चना 45 से 52 रुपये तक है, जबकि पैकेट में रखे दो किलो चने को 98 रुपये प्रति किलो की दर से लिया जा रहा है। इसी तरह खाद्य तेल में घपला हो रहा है। पीड़ितों में सोया रिफाइंड तेल की आपूर्ति होनी है, जबकि पॉम आयल की सप्लाई की जा रही है। यही नहीं पैकेट के साथ दिए जा रहे 5 किलो आलू का भी दाम बाजार के सापेक्ष बिल में दोगुना बिल में जोड़ा गया है। इस बाबत जब डीएसओ नरेंद्र तिवारी से बात की गई तो उन्होंने चने को अच्छी गुणवत्ता का बताया। कहा कि ऑयल खाने लायक है। उसके पैकेट पर आईएसआई का ट्रेडमार्क लगा है।
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उधर, डुमरियागंज एसडीएम राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि शनिवार को सड़ा हुआ आलू से भरा ट्रक आया था, उससे दुर्गंध आ रही थी। उसे सेंटर पर उतरवाने से मना कर दिया था। चने की गुणवत्ता खराब होने के साथ ही पॉम आयल की सप्लाई को गलत बताते हुए इसकी रिपोर्ट डीएम को करने के साथ ही भुगतान में रेट कम करवाने की बात कही।
जिले के व्यापारियों को भुलाकर बाहरी को दी आपूर्ति की जिम्मेदारी
डुमरियागंज। बाढ़ की विभीषिका के दौरान बाढ़ग्रस्त गांवों का संपर्क टूटने और जिला मुख्यालय पर जाने के लिए सभी मार्ग अवरुद्ध होने के बाद डीएम की पहल पर जिले के व्यापारियों को बाढ़ राहत सामग्री वितरण के लिए आमंत्रित किया गया था। नवशक्ति राइस मिल नौगढ़, श्रीलक्ष्मी फूड रमवापुर कली, केदारनाथ नारायण नाथ उसका, सावित्री देवी कटरा, श्रद्धा कंस्ट्रक्शन गोरखपुर जैसी फर्मों ने बाढ़ग्रस्त गांवों में नाव आदि के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई थी। बाढ़ कम होने के बाद सीएम ने जब पीड़ितों तक बिस्कुट, हल्दी, मिर्चा, धनिया, रिफाइन तेल, भूना हुआ चना, लाई आदि सामग्री सहित आलू की अतिरिक्त मात्रा देने का निर्देश दिया तो डीएसओ नरेंद्र तिवारी ने सभी सप्लायरों को आपूर्ति से रोककर कानपुर की फर्म को जिम्मा सौंप दिया। व्यापारी बिहारी लाल, अजय कुमार, धर्मपाल सिंह, अनूप कुमार आदि ने बताया कि उनके साथ गलत हुआ है। आफत के समय में सप्लाई हमने दिया, जब दो पैसा मिलने को हुआ तो बाहरी ठेकेदार को आपूर्ति दे दी गई।