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रेल लाइन के लिए करना होगा दो वर्ष इंतजार
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श्रावस्ती। खलीलाबाद, बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन के पटरी पर आने के लिए अभी दो वर्ष का इंतजार करना होगा। इसमें से डेढ़ वर्ष का समय भूमि अधिग्रहण व मुआवजा वितरण में लगेगा। छह माह में टेंडर आदि की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। भूमि अधिग्रहण के लिए रेल मंत्रालय ने अभी डीएम को पत्र भेज कर नक्शा चिन्हीकरण करने का कहा है।
खलीलाबाद, बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन के लिए बहराइच के आठ गांवों में कुल 242.50 एकड़ व श्रावस्ती के 38 गांवों व दो नगरों में 535.50 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जानी है। इसमें से केवल बहराइच के डीएम ने ही भूमि का नक्शा रेलवे को उपलब्ध कराया है। जिसकी पड़ताल रेल मंत्रालय की ओर से की जा रही है। वहीं श्रावस्ती में लगभग 41 किलोमीटर व बलरामपुर में लगभग 48 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जानी है। इस परियोजना में कई अन्य जिले भी शामिल है।
श्रावस्ती एक ऐसा जिला है जहां एक इंच जमीन भी रेल लाइन को नहीं छूती। यहां के लोगों को रेल सुविधा लेने के लिए गोंडा या फिर बहराइच जाना होता है। श्रावस्ती को रेल लाइन से जोड़ने के लिए कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने खलीलाबाद बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया था। अब यह परियोजना धीरे धीरे धरातल पर उतरने लगी है।
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दो माह पूर्व इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ की गई थी, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। इससे आने वाले दो वर्ष तक इस रेल लाइन पर ट्रेन नहीं दौड़ पाएगी। इसके साथ ही रेल लाइन से जुड़ने वाले अन्य जनपदों ने भी यदि सहयोग नहीं किया तो परियोजना में और देरी हो सकती है।
इसका कारण है कि दो माह पूर्व बहराइच, श्रावस्ती व बलरामपुर के डीएम को रेल मंत्रालय ने पत्र भेज कर सेटेलाइट से चिह्नित भूमि का राजस्व नक्शा व इसमें रेलवे लाइन को चिह्नित करने का अनुरोध किया था। इसमें से केवल बहराइच ने ही अभी तक राजस्व नक्शा मंत्रालय को उपलब्ध कराया है। श्रावस्ती व बलरामपुर में अभी इस नक्शे को लेकर स्थिति स्पष्ट ही नहीं है, जबकि इस परियोजना की सबसे ज्यादा जरूरत श्रावस्ती में ही है।
श्रावस्ती के इन गांवों से निकलेगी रेल लाइन
श्रावस्ती के औरैया टिकई, तुरहनी बलराम, मोहरनिया, चौव्वा पुर पजावा, सोनवा, हुसैनपुर खुरहुरी, गिलौली, अकारा, नेवरिया, फतुहापुर, लखाही खास, खजुहा झुनझुनिया, नरायनपुर, जरकुशहा, पटना खरगौरा, गलकटवा, खैरीकला, पूरेखैरी, भिनगा खास, लक्षमनपुर इटवरिया, चकवा, रेहली विशुनपुर, बैरागीजोत, लखाही बेनीनगर, किशुनपुर रामनगर, पिपरहवा, बहादुरपुर, लक्ष्मनपुर गोड़पुरवा, गनेशपुर, सेमरी तरहर, एकघरवा, नारायनजोत, किड़िहौना, मनिकापुर कोड़री, मझौवा सुमाल, इकौना, इकौना देहात, मोहम्मदपुर राजा, खरगौरा गनेश, राजगढ़ गुलहरिया से होते हुए रेल लाइन घुघुलपुर से बलरामपुर रेलवे स्टेशन को जोड़ेगी।
बहराइच के इन गांवों से जुड़ेगी रेल लाइन
नगरौर, अशोका, तुरैला, रेवली, इटोंझा, हटवा रायब, बरागुन्नू, मुसगढ़ा सहित कुल आठ गांव।
2025 तक पूरा होना है काम
नई रेल लाइन (बड़ी लाइन) खलीलाबाद से शुरू होकर मेंहदावल, डुमरियागंज, उतरौला, श्रावस्ती, भिनगा और बहराइच तक बिछाई जानी है। इसकी दूरी 240 किलोमीटर है। इस रेल लाइन को पूरा करने के लिए 2024-25 तक का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए कैबिनेट ने 4940 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया है। इसमें से दस करोड़ रुपये का बजट प्राप्त भी हो गया है।
लगेगा लंबा समय
भूमि अधिग्रहण के लिए अभी हम बहुत ही निचले पायदान पर खड़े हैं। जिन जनपदों से परियोजना गुजरनी है, वहां के प्रशासन से भू राजस्व का नक्शा मांगा गया है। अभी तक बहराइच से ही नक्शा मिल पाया है। श्रावस्ती व बलरामपुर से लगातार संपर्क किया जा रहा है। नक्शा मिलने के बाद रेल मंत्रालय इस पर लाइन को चिह्नित करेगा। इसके बाद काश्तकारों की सूची बनेगी। भूमि अधिग्रहण के लिए गजट होगा। यदि सब कुछ ठीक रहा तो दावा आपत्ति व मुआवजा की प्रक्रिया पूरी करने में लगभग डेढ़ से दो वर्ष का समय लग सकता है। ऐसा नहीं होने पर समय बढ़ भी सकता है। भूमि लेने के बाद टेंडर प्रक्रिया होगी। फिर कहीं पटरी बिछाने का कार्य होगा। यह सब एक लंबी प्रक्रिया है।
- दीपक कुमार, अधिशासी अभियंता, एनई रेलवे
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खलीलाबाद, बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन के लिए बहराइच के आठ गांवों में कुल 242.50 एकड़ व श्रावस्ती के 38 गांवों व दो नगरों में 535.50 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जानी है। इसमें से केवल बहराइच के डीएम ने ही भूमि का नक्शा रेलवे को उपलब्ध कराया है। जिसकी पड़ताल रेल मंत्रालय की ओर से की जा रही है। वहीं श्रावस्ती में लगभग 41 किलोमीटर व बलरामपुर में लगभग 48 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जानी है। इस परियोजना में कई अन्य जिले भी शामिल है।
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श्रावस्ती एक ऐसा जिला है जहां एक इंच जमीन भी रेल लाइन को नहीं छूती। यहां के लोगों को रेल सुविधा लेने के लिए गोंडा या फिर बहराइच जाना होता है। श्रावस्ती को रेल लाइन से जोड़ने के लिए कुछ वर्ष पूर्व सरकार ने खलीलाबाद बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन बिछाने का निर्णय लिया था। अब यह परियोजना धीरे धीरे धरातल पर उतरने लगी है।
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दो माह पूर्व इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ की गई थी, लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। इससे आने वाले दो वर्ष तक इस रेल लाइन पर ट्रेन नहीं दौड़ पाएगी। इसके साथ ही रेल लाइन से जुड़ने वाले अन्य जनपदों ने भी यदि सहयोग नहीं किया तो परियोजना में और देरी हो सकती है।
इसका कारण है कि दो माह पूर्व बहराइच, श्रावस्ती व बलरामपुर के डीएम को रेल मंत्रालय ने पत्र भेज कर सेटेलाइट से चिह्नित भूमि का राजस्व नक्शा व इसमें रेलवे लाइन को चिह्नित करने का अनुरोध किया था। इसमें से केवल बहराइच ने ही अभी तक राजस्व नक्शा मंत्रालय को उपलब्ध कराया है। श्रावस्ती व बलरामपुर में अभी इस नक्शे को लेकर स्थिति स्पष्ट ही नहीं है, जबकि इस परियोजना की सबसे ज्यादा जरूरत श्रावस्ती में ही है।
श्रावस्ती के इन गांवों से निकलेगी रेल लाइन
श्रावस्ती के औरैया टिकई, तुरहनी बलराम, मोहरनिया, चौव्वा पुर पजावा, सोनवा, हुसैनपुर खुरहुरी, गिलौली, अकारा, नेवरिया, फतुहापुर, लखाही खास, खजुहा झुनझुनिया, नरायनपुर, जरकुशहा, पटना खरगौरा, गलकटवा, खैरीकला, पूरेखैरी, भिनगा खास, लक्षमनपुर इटवरिया, चकवा, रेहली विशुनपुर, बैरागीजोत, लखाही बेनीनगर, किशुनपुर रामनगर, पिपरहवा, बहादुरपुर, लक्ष्मनपुर गोड़पुरवा, गनेशपुर, सेमरी तरहर, एकघरवा, नारायनजोत, किड़िहौना, मनिकापुर कोड़री, मझौवा सुमाल, इकौना, इकौना देहात, मोहम्मदपुर राजा, खरगौरा गनेश, राजगढ़ गुलहरिया से होते हुए रेल लाइन घुघुलपुर से बलरामपुर रेलवे स्टेशन को जोड़ेगी।
बहराइच के इन गांवों से जुड़ेगी रेल लाइन
नगरौर, अशोका, तुरैला, रेवली, इटोंझा, हटवा रायब, बरागुन्नू, मुसगढ़ा सहित कुल आठ गांव।
2025 तक पूरा होना है काम
नई रेल लाइन (बड़ी लाइन) खलीलाबाद से शुरू होकर मेंहदावल, डुमरियागंज, उतरौला, श्रावस्ती, भिनगा और बहराइच तक बिछाई जानी है। इसकी दूरी 240 किलोमीटर है। इस रेल लाइन को पूरा करने के लिए 2024-25 तक का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए कैबिनेट ने 4940 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत कर दिया है। इसमें से दस करोड़ रुपये का बजट प्राप्त भी हो गया है।
लगेगा लंबा समय
भूमि अधिग्रहण के लिए अभी हम बहुत ही निचले पायदान पर खड़े हैं। जिन जनपदों से परियोजना गुजरनी है, वहां के प्रशासन से भू राजस्व का नक्शा मांगा गया है। अभी तक बहराइच से ही नक्शा मिल पाया है। श्रावस्ती व बलरामपुर से लगातार संपर्क किया जा रहा है। नक्शा मिलने के बाद रेल मंत्रालय इस पर लाइन को चिह्नित करेगा। इसके बाद काश्तकारों की सूची बनेगी। भूमि अधिग्रहण के लिए गजट होगा। यदि सब कुछ ठीक रहा तो दावा आपत्ति व मुआवजा की प्रक्रिया पूरी करने में लगभग डेढ़ से दो वर्ष का समय लग सकता है। ऐसा नहीं होने पर समय बढ़ भी सकता है। भूमि लेने के बाद टेंडर प्रक्रिया होगी। फिर कहीं पटरी बिछाने का कार्य होगा। यह सब एक लंबी प्रक्रिया है।
- दीपक कुमार, अधिशासी अभियंता, एनई रेलवे