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पीली ईंट से बना रहे दीवार
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रतनापुर (श्रावस्ती)। मवेशियों को छुट्टा न छोड़ कर उन्हें पालने वाले किसानों को शासन की ओर से सहायता मुहैया कराई जा रही है। इसके लिए चयनित लाभार्थियों के घरों में मवेशी रखने वाले स्थान पर मनरेगा योजना से तहत दीवार व भुसैले का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। इसका प्रमाण लोहरासपुर के मजरा निरहा में देखने को मिला। जहां पीली ईंट से दीवार का निर्माण कराया जा रहा है।
गांवों में ग्रामीण अपने मवेशियों को छुट्टा न छोड़े तथा उन्हें अपने घर पर बांध कर चारा पानी दें, इसके लिए शासन की ओर से उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें चारे के लिए पैसा देने के साथ ही गांवों में चयनित लाभार्थियों की भूमि पर दीवार व भुसैले का निर्माण भी कराया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप यह पैसा लाभार्थियों के खाते में दिया जाना था, जिससे किसान अपनी सुविधा के अनुसार दीवार का निर्माण करा सके, लेकिन ग्राम प्रधान ऐसा न करके मनरेगा से इसका स्वयं ही निर्माण करा रहे हैं।
इस कार्य में प्रधानों की ओर से मानकों की अवहेलना की जा रही है। निर्माण में पीली ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं मौरंग की जगह बालू का प्रयोग हो रहा है। इसका प्रमाण गिलौला के लोहरासपुर निरहा के मजरा निरहा में देखने को मिला। जहां निरहा निवासी लक्ष्मन के घर में पशुपालन के स्थान पर दीवार का निर्माण कराया जा रहा था।
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यहां भी निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप नहीं प्रयोग की जा रही थी। जानकारी करने पर लक्ष्मन ने बताया कि निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री ग्राम प्रधान मुहैया करा रहे हैं। उसे सिर्फ देख रेख की जिम्मेदारी दी गई है। गांव में जितने भी लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया गया है, सभी जगह ऐसे ही कार्य कराया गया है। वहीं इस संबंध में अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडेय बताते हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बीडीओ को भेज कर इसकी जांच कराई जाएगी।
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गांवों में ग्रामीण अपने मवेशियों को छुट्टा न छोड़े तथा उन्हें अपने घर पर बांध कर चारा पानी दें, इसके लिए शासन की ओर से उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्हें चारे के लिए पैसा देने के साथ ही गांवों में चयनित लाभार्थियों की भूमि पर दीवार व भुसैले का निर्माण भी कराया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप यह पैसा लाभार्थियों के खाते में दिया जाना था, जिससे किसान अपनी सुविधा के अनुसार दीवार का निर्माण करा सके, लेकिन ग्राम प्रधान ऐसा न करके मनरेगा से इसका स्वयं ही निर्माण करा रहे हैं।
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इस कार्य में प्रधानों की ओर से मानकों की अवहेलना की जा रही है। निर्माण में पीली ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं मौरंग की जगह बालू का प्रयोग हो रहा है। इसका प्रमाण गिलौला के लोहरासपुर निरहा के मजरा निरहा में देखने को मिला। जहां निरहा निवासी लक्ष्मन के घर में पशुपालन के स्थान पर दीवार का निर्माण कराया जा रहा था।
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यहां भी निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप नहीं प्रयोग की जा रही थी। जानकारी करने पर लक्ष्मन ने बताया कि निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री ग्राम प्रधान मुहैया करा रहे हैं। उसे सिर्फ देख रेख की जिम्मेदारी दी गई है। गांव में जितने भी लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया गया है, सभी जगह ऐसे ही कार्य कराया गया है। वहीं इस संबंध में अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडेय बताते हैं कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता है। बीडीओ को भेज कर इसकी जांच कराई जाएगी।