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बालिका दिवस पर हुई वर्चुअल संगोष्ठी
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श्रावस्ती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सोमवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस पर वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज न की।
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बालिका संरक्षण एवं सबलीकरण पर वेबिनार संगोष्ठी आयोजित हुई। जिसमें प्राधिकरण के सचिव मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए बालिकाओं को कानून सहित घरेलू हिंसा, बाल-विवाह रोकथाम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम के बारे में जानकारी होनी चाहिए। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा धनलक्ष्मी योजना की शुरुआत की गई है। जिसके तहत बालिका शिशु के परिवार को नकद हस्तांतरण के द्वारा मूलभूत जरूरतों जैसे असंक्रमीकरण, जन्म पंजीकरण, स्कूल में नामांकन को पूरा किया जाता है। बालिकाओं को बराबरी का दर्जा देने व लोगों को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।
विष्णुदत्त अस्थाना ने कहा कि समाज में लड़कियों की स्थिति को सुधारने व उन्हें बराबरी का दर्जा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कई क्षत्रों में बालिकाएं को बराबरी का अधिकार मिलने के लिए जागृत करने के लिए कार्यक्रम चलाने के साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के माध्यम से बालिका के सम्मान के लिए उन्हें लड़ना तथा आवाज उठाना सिखाया जा रहा है। ओमकार नाथ चौधरी ने कहा कि बालिका के प्रति असमानता को हटाना ही राष्ट्रीय बालिका दिवस का मुख्य उद्देश्य है। प्रत्येक बालिका शिशु को उचित सम्मान और महत्व दिया जाए। संगोष्ठी में जूम वर्चुअल मंच के माध्यम से 20 लोग शामिल हुए। (संवाद)
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राष्ट्रीय बालिका दिवस पर विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बालिका संरक्षण एवं सबलीकरण पर वेबिनार संगोष्ठी आयोजित हुई। जिसमें प्राधिकरण के सचिव मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए बालिकाओं को कानून सहित घरेलू हिंसा, बाल-विवाह रोकथाम, दहेज प्रतिषेध अधिनियम के बारे में जानकारी होनी चाहिए। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा धनलक्ष्मी योजना की शुरुआत की गई है। जिसके तहत बालिका शिशु के परिवार को नकद हस्तांतरण के द्वारा मूलभूत जरूरतों जैसे असंक्रमीकरण, जन्म पंजीकरण, स्कूल में नामांकन को पूरा किया जाता है। बालिकाओं को बराबरी का दर्जा देने व लोगों को जागरूक करने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।
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विष्णुदत्त अस्थाना ने कहा कि समाज में लड़कियों की स्थिति को सुधारने व उन्हें बराबरी का दर्जा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कई क्षत्रों में बालिकाएं को बराबरी का अधिकार मिलने के लिए जागृत करने के लिए कार्यक्रम चलाने के साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के माध्यम से बालिका के सम्मान के लिए उन्हें लड़ना तथा आवाज उठाना सिखाया जा रहा है। ओमकार नाथ चौधरी ने कहा कि बालिका के प्रति असमानता को हटाना ही राष्ट्रीय बालिका दिवस का मुख्य उद्देश्य है। प्रत्येक बालिका शिशु को उचित सम्मान और महत्व दिया जाए। संगोष्ठी में जूम वर्चुअल मंच के माध्यम से 20 लोग शामिल हुए। (संवाद)
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