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साढ़े तीन वर्ष से ग्राम न्यायालय का इकौना में हो रहा इंतजार

Tue, 12 Nov 2019 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2019 10:45 PM IST
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villege court counstration panding by last 3 and half year.
श्रावस्ती। ग्राम न्यायालय के लिए इकौना पिछले साढ़े तीन साल से इंतजार कर रहा है। लेकिन इंतजार की घड़ियां अभी कम नहीं हो रही है। जबकि इस कोर्ट के लिए कोर्ट रूम सहित अन्य संसाधनों की व्यवस्था पहले ही हो चुकी है।
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यही नहीं ग्राम न्यायालय में अन्य संसाधन के लिए दो लाख का बजट भी डीएम को पहले मिल चुका है। न्यायिक अधिकारियों की टीम कई बार मौके का निरीक्षण भी कर चुके है। इसके बाद भी न्यायालय संचालन की फाइल अभी ठंडे बस्ते में हैं। वहीं आम लोग इस न्यायालय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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इकौना के लोगों को सुगम न्याय मिल सके। इसलिए मार्च 2016 में ग्राम न्यायालय की अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना में तत्काल इस कोर्ट की स्थापना कर संचालन करने को कहा गया था। इस अधिसूचना के बाद न्यायिक अधिकारियों ने निरीक्षण करके इकौना तहसील में कोर्ट स्थापना के लिए कमरे का चयन कर लिया था।
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तहसील प्रशासन ने कोर्ट संचालन के लिए पुर्नीचर की भी व्यवस्था कर दी थी। ताकि आम लोगों को स्थानीय स्तर पर ही न्याय मिल सके। उन्हें भटकना न पड़े। लेकिन लगभग साढ़े तीन वर्ष बीत गए। इस कमरे का स्थलीय निरीक्षण या फिर हाईकोर्ट में पत्राचार के अतिरिक्त इसे भौतिक रूप से जमीन पर नहीं उतारा जा सका।
ग्राम न्यायालय में भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए डीएम के खाते में दो लाख रुपये का बजट भी आया था। बजट का पैसा अभी भी डीएम के खाते में है। इस पर डीएम ने न्याया विभाग को पत्र जारी कर प्रस्ताव भी मांगा। लेकिन इस पर अभी कोई विशेष कार्य नहीं हो पाया।
शेट्टी कमीशन रिपोर्ट के मुताबिक सिविल प्रकृति के दो हजार व आपराधिक प्रकृति के पांच सौ मामले हो तो अतिरिक्त न्यायालय का गठन हो सकता है। जबकि देखा जाए तो ग्राम न्यायालय के लिए प्रस्तावित थाना क्षेत्र इकौना, गिलौला व सोनवा आंशिक के ही लगभग पांच से छह हजार मुकदमों की फाइलें कई कोर्ट में चल रही हैं। ऐसे में लोगों को इकौना के बजाए भिनगा आना पड़ता है।

इकौना तहसील अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बुद्धसागर मिश्र ने बताया कि ग्राम न्यायालय आम जनता के लिए बहुत ही उपयोगी है। वैसे भी शेट्टी कमीशलन की रिपोर्ट को ही यदि आधार माना जाए तो भी इकौना, गिलौला व सोनवा क्षेत्र के लगभग छह हजार मुकदमें चल रहे हैं। इसके लिए दो लाख का बजट भी डीएम को मिला है। फिर देरी क्यों हो रही है। यह एक सोचने का विषय है। आम जनता के हित को देखते हुए इस न्यायालय की स्थापना शीघ्र होनी चाहिए।
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