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Shravasti News: वियतनामी दल ने बोधि वृक्ष की पूजा की
Tue, 12 Aug 2025 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 12 Aug 2025 12:48 AM IST
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बोधि वृक्ष की पूजा करते वियतनामी दल के सदस्य। -संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को वियतनाम से आए अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए 20 सदस्यीय दल ने तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण किया और अपने रीति-रिवाज से बोधि वृक्ष की पूजा-अर्चना की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में बौद्ध सभा का आयोजन किया गया, जिसमें देवानंद ने बताया कि शुद्धोधन ने सिद्धार्थ के लिए भोग-विलास के सभी प्रबंध किए थे और तीन ऋतुओं के लायक तीन सुंदर महल बनवाए थे। वहां पर नाच-गान और मनोरंजन की सारी सामग्री भी थी और दास-दासी उनकी सेवा के लिए तत्पर थे, लेकिन ये चीजें उन्हें बांधकर नहीं रख सकीं।
एक दिन सैर के दौरान उन्हें एक बूढ़ा आदमी मिला, जो हाथ में लाठी पकड़े धीरे-धीरे कांपता हुआ चल रहा था। दूसरी बार सैर पर निकलने पर उन्हें एक बीमार आदमी दिखा। वहीं, तीसरी बार सिद्धार्थ को एक अर्थी मिली, चार आदमी उसे उठाकर लिए जा रहे थे। अर्थी के पीछे-बहुत से लोग थे, कोई रो रहा था, कोई छाती पीट रहा था।
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इन सभी दृश्यों ने सिद्धार्थ को बहुत विचलित किया। चौथी बार सैर पर निकलने पर उन्हें एक संन्यासी दिखाई दिए, जो संसार की सारी भावनाओं और कामनाओं से मुक्त प्रसन्नचित्त दिखे। संन्यासी ने सिद्धार्थ को आकृष्ट किया और उन्हें सांसारिक ज्ञान की प्राप्ति हो गई।
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इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में बौद्ध सभा का आयोजन किया गया, जिसमें देवानंद ने बताया कि शुद्धोधन ने सिद्धार्थ के लिए भोग-विलास के सभी प्रबंध किए थे और तीन ऋतुओं के लायक तीन सुंदर महल बनवाए थे। वहां पर नाच-गान और मनोरंजन की सारी सामग्री भी थी और दास-दासी उनकी सेवा के लिए तत्पर थे, लेकिन ये चीजें उन्हें बांधकर नहीं रख सकीं।
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एक दिन सैर के दौरान उन्हें एक बूढ़ा आदमी मिला, जो हाथ में लाठी पकड़े धीरे-धीरे कांपता हुआ चल रहा था। दूसरी बार सैर पर निकलने पर उन्हें एक बीमार आदमी दिखा। वहीं, तीसरी बार सिद्धार्थ को एक अर्थी मिली, चार आदमी उसे उठाकर लिए जा रहे थे। अर्थी के पीछे-बहुत से लोग थे, कोई रो रहा था, कोई छाती पीट रहा था।
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इन सभी दृश्यों ने सिद्धार्थ को बहुत विचलित किया। चौथी बार सैर पर निकलने पर उन्हें एक संन्यासी दिखाई दिए, जो संसार की सारी भावनाओं और कामनाओं से मुक्त प्रसन्नचित्त दिखे। संन्यासी ने सिद्धार्थ को आकृष्ट किया और उन्हें सांसारिक ज्ञान की प्राप्ति हो गई।