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वीर अब्दुल हमीद को किया याद
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श्रावस्ती। वीर अब्दुल हमीद की शहादत को याद करते हुए गुरुवार को भिनगा में कार्यक्रम आयोजित हुआ। यूनाइटेड इदरीशी फ्रंट की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत वीर अब्दुल हमीद के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई।
कार्यक्रम में यूनाइटेड इदरीशी फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी अब्दुल समद इदरीशी ने कहा कि शहीद वीर अब्दुल हमीद की वीरता को हम सब नमन करते हैं। उन्होंने 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान अपना साहस और वीरता दिखाते हुए दुशमनों के कई टैंकों को ध्वस्त कर दिया था।
प्रदेश अध्यक्ष कैसर जमाल इदरीशी ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धरमपुर नामक छोटे से गांव में एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद उस्मान कपड़ों की सिलाई कर परिवार की जीविकोपार्जन करते थे।
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अब्दुल हमीद का दिल इस काम में नहीं लगता था। दूसरों की मदद करना उन्हें बेहद पसंद था। एक बार अपने प्राणों की बाजी लगा कर गांव में आई भीषण बाढ़ में डूबती दो युवतियों की जान बचा कर उन्होंने अपने साहस का परिचय दिया था। परशुराम त्रिपाठी ने कहा कि वह 1954 में सेना में भर्ती हुए। 8 सितंबर 1965 की रात पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया था।
दोनों देश के बीच जंग शुरू हो गई। तब वीर हमीद को अपनी जन्म भूमि के लिए कुछ करने का मौका मिला। इस मोर्चे में जाने से पहले वीर हमीद ने अपने भाई के नाम एक खत लिखा। उसमें उन्होंने लिखा था कि हम जंग में लड़कर कोई न कोई चक्र लेकर जरूर लौटेंगे। इस मौके पर फ्रंट के जिलाध्यक्ष मेराज अहमद इसरीशी, लाल बादशाह इदरीशी, सलमान इदरीशी, उबैद इदरीशी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में यूनाइटेड इदरीशी फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी अब्दुल समद इदरीशी ने कहा कि शहीद वीर अब्दुल हमीद की वीरता को हम सब नमन करते हैं। उन्होंने 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान अपना साहस और वीरता दिखाते हुए दुशमनों के कई टैंकों को ध्वस्त कर दिया था।
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प्रदेश अध्यक्ष कैसर जमाल इदरीशी ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धरमपुर नामक छोटे से गांव में एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद उस्मान कपड़ों की सिलाई कर परिवार की जीविकोपार्जन करते थे।
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अब्दुल हमीद का दिल इस काम में नहीं लगता था। दूसरों की मदद करना उन्हें बेहद पसंद था। एक बार अपने प्राणों की बाजी लगा कर गांव में आई भीषण बाढ़ में डूबती दो युवतियों की जान बचा कर उन्होंने अपने साहस का परिचय दिया था। परशुराम त्रिपाठी ने कहा कि वह 1954 में सेना में भर्ती हुए। 8 सितंबर 1965 की रात पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया था।
दोनों देश के बीच जंग शुरू हो गई। तब वीर हमीद को अपनी जन्म भूमि के लिए कुछ करने का मौका मिला। इस मोर्चे में जाने से पहले वीर हमीद ने अपने भाई के नाम एक खत लिखा। उसमें उन्होंने लिखा था कि हम जंग में लड़कर कोई न कोई चक्र लेकर जरूर लौटेंगे। इस मौके पर फ्रंट के जिलाध्यक्ष मेराज अहमद इसरीशी, लाल बादशाह इदरीशी, सलमान इदरीशी, उबैद इदरीशी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।