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Shravasti News: बुद्ध की तपोस्थली में प्रारंभ हुई वर्षावास पूजा
Fri, 11 Jul 2025 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 11 Jul 2025 12:10 AM IST
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तपोस्थली स्थित गंध कुटी को फूल से सजा कर प्रार्थना करते अनुयायी। संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को विभिन्न देशों से आए अनुयायियों से गुलजार रही। अनुयायियों ने गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हुई वर्षावास पूजा में हिस्सा लिया।इस दौरान अनुयायियों ने भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो के नेतृत्व में गंध कुटी को फूलों से सजा कर प्रार्थना की।
बुद्ध की तपोस्थली में बृहस्पतिवार को श्रीलंका से आए छह, म्यांमार से आए दो, इंडिया मंदिर के 15, यंग बोधिसत्व सोसाइटी से 15, अंबेडकर बुद्ध विहार के सात तथा महामंकोल बुद्ध विहार के छह अनुयायियों ने वर्षावास पूजन में हिस्सा लिया। यह पूजन 16 अक्तूबर कार्तिक पूर्णिमा तक होगी।
इस दौरान भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि बौद्ध धर्म में भिक्षुओं के लिए वर्षावास काल का विशेष महत्व है। भगवान बुद्ध ने भी त्रैमासिक वर्षावास काल व्यतीत किया था। इस दौरान भिक्षु एक ऊंचे स्थान पर रहकर ध्यान, साधना व पूजा-अर्चना में त्रैमासिक वर्षावास काल व्यतीत करते हैं।
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इस बुद्ध कालीन परंपरा को आज भी बौद्ध भिक्षु जीवंत रखे हैं। परंपरा के अनुसार ऐसे बौद्ध भिक्षुओं के बीच बौद्ध उपासक-उपासिकाओं द्वारा दैनिक उपयोग के सामग्री सहित चीवरदान करने का काफी महत्व माना जाता है।
यही कारण है कि आश्विन पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक विभिन्न महाविहारों में अपनी परंपरा के अनुसार कठिन चीवरदान समारोह का आयोजन किया जाता है। इस दौरान भिक्षु संघ रतन, भंते विमल तिस्स, भंते संघपाल, भिक्षु धम्म सागर व माता विद्यावती सहित अनुयायी मौजूद रहे।
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बुद्ध की तपोस्थली में बृहस्पतिवार को श्रीलंका से आए छह, म्यांमार से आए दो, इंडिया मंदिर के 15, यंग बोधिसत्व सोसाइटी से 15, अंबेडकर बुद्ध विहार के सात तथा महामंकोल बुद्ध विहार के छह अनुयायियों ने वर्षावास पूजन में हिस्सा लिया। यह पूजन 16 अक्तूबर कार्तिक पूर्णिमा तक होगी।
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इस दौरान भिक्षु श्रद्धा लोक महाथेरो ने कहा कि बौद्ध धर्म में भिक्षुओं के लिए वर्षावास काल का विशेष महत्व है। भगवान बुद्ध ने भी त्रैमासिक वर्षावास काल व्यतीत किया था। इस दौरान भिक्षु एक ऊंचे स्थान पर रहकर ध्यान, साधना व पूजा-अर्चना में त्रैमासिक वर्षावास काल व्यतीत करते हैं।
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इस बुद्ध कालीन परंपरा को आज भी बौद्ध भिक्षु जीवंत रखे हैं। परंपरा के अनुसार ऐसे बौद्ध भिक्षुओं के बीच बौद्ध उपासक-उपासिकाओं द्वारा दैनिक उपयोग के सामग्री सहित चीवरदान करने का काफी महत्व माना जाता है।
यही कारण है कि आश्विन पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक विभिन्न महाविहारों में अपनी परंपरा के अनुसार कठिन चीवरदान समारोह का आयोजन किया जाता है। इस दौरान भिक्षु संघ रतन, भंते विमल तिस्स, भंते संघपाल, भिक्षु धम्म सागर व माता विद्यावती सहित अनुयायी मौजूद रहे।