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श्रावस्ती में दिखा बाघ, ग्रामीणों में दहशत
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श्रावस्ती। उत्तमापुर के मजरा लोहरासपुर निरहा में सोमवार सुबह एक बाघ देखा गया। इससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। वन विभाग का दावा है कि यह कतर्निया या फिर नेपाल से आया है। बाघ को पकड़ने के लिए विभाग ने पिंजड़ा लगा दिया है।
लोहरासपुर निरहा गांव में सुबह खेतों की ओर जा रहे कुछ किसानों ने एक बाघ को खेत से झाड़ियों की ओर जाते हुए देखा। इसकी सूचना तत्काल किसानों ने गांव में अन्य लोगों को दी। देखते ही देखते पूरा गांव बाघ को देखने के लिए एकत्र हो गया और उसे भगाने के लिए हांका लगाने लगा। इसी बीच बाघ गांव के बाहर झाड़ियों में छिप कर बैठ गया।
ग्रामीण इलाके में बाघ आने की सूचना पाते ही वन विभाग की टीम के साथ ही सोनवा थाना प्रभारी देवेंद्र पांडे, एसडीएम जमुनहा जेपी चौहान व सीओ हौसला प्रसाद मौके पर पहुंच गए। यहां एकत्रित ग्रामीणों को दूर करके वहां पिंजड़ा लगाया गया है। ताकि बाघ को पकड़ा जा सके। इस दौरान मौके पर पहुंची फारेस्ट टीम ने खेतों में बाघ के पंजे का निशान देख कर यह बताया कि यह वास्तव में मादा व वयस्क बाघ है।
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इस दौरान सीओ हौसला प्रसाद ने ग्रामीणों से कहा कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जा रहा है। वह रात में खेतों की ओर न जाएं। घर के दरवाजे बंद करके सोएं। जो लोग फूस के मकान में रह रहे हैं वह भी सुरक्षा के इंतजाम कर लें। यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो समूह में व पर्याप्त रोशनी लेकर ही जाएं।
ग्रामीण इलाके में देखे गए टाइगर की पहचान उसके पैरों के निशान से हुई। गेहूं के खेत में पंजे के निशान से यह अनुमान लगाया गया है कि आया हुआ टाइगर मादा और वयस्क है।
वन संरक्षित क्षेत्र सोहेलवा व भिनगा जंगल के आसपास विगत 20 वर्ष में पहली बार टाइगर की उपस्थिति दर्ज की गई है। इससे पहले कई बार तेंदुआ जंगल से निकल कर ग्रामीण क्षेत्रों में आ चुके हैं। जिन्हें वन विभाग द्वारा पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया था।
डीएफओ एपी यादव ने बताया कि श्रावस्ती क्षेत्र में स्थित जंगल में बाघ नहीं है। यह अब्दुल्लागंज रेंज की तरफ से आया है। संभव है कि या तो कतर्निया के जंगल से या फिर नेपाल की ओर से माइग्रेट होकर बाघ आया हो। पिंजड़ा मंगवाया गया है। जल्द ही उसे पकड़ कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाएगा।
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लोहरासपुर निरहा गांव में सुबह खेतों की ओर जा रहे कुछ किसानों ने एक बाघ को खेत से झाड़ियों की ओर जाते हुए देखा। इसकी सूचना तत्काल किसानों ने गांव में अन्य लोगों को दी। देखते ही देखते पूरा गांव बाघ को देखने के लिए एकत्र हो गया और उसे भगाने के लिए हांका लगाने लगा। इसी बीच बाघ गांव के बाहर झाड़ियों में छिप कर बैठ गया।
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ग्रामीण इलाके में बाघ आने की सूचना पाते ही वन विभाग की टीम के साथ ही सोनवा थाना प्रभारी देवेंद्र पांडे, एसडीएम जमुनहा जेपी चौहान व सीओ हौसला प्रसाद मौके पर पहुंच गए। यहां एकत्रित ग्रामीणों को दूर करके वहां पिंजड़ा लगाया गया है। ताकि बाघ को पकड़ा जा सके। इस दौरान मौके पर पहुंची फारेस्ट टीम ने खेतों में बाघ के पंजे का निशान देख कर यह बताया कि यह वास्तव में मादा व वयस्क बाघ है।
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इस दौरान सीओ हौसला प्रसाद ने ग्रामीणों से कहा कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जा रहा है। वह रात में खेतों की ओर न जाएं। घर के दरवाजे बंद करके सोएं। जो लोग फूस के मकान में रह रहे हैं वह भी सुरक्षा के इंतजाम कर लें। यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो समूह में व पर्याप्त रोशनी लेकर ही जाएं।
ग्रामीण इलाके में देखे गए टाइगर की पहचान उसके पैरों के निशान से हुई। गेहूं के खेत में पंजे के निशान से यह अनुमान लगाया गया है कि आया हुआ टाइगर मादा और वयस्क है।
वन संरक्षित क्षेत्र सोहेलवा व भिनगा जंगल के आसपास विगत 20 वर्ष में पहली बार टाइगर की उपस्थिति दर्ज की गई है। इससे पहले कई बार तेंदुआ जंगल से निकल कर ग्रामीण क्षेत्रों में आ चुके हैं। जिन्हें वन विभाग द्वारा पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया था।
डीएफओ एपी यादव ने बताया कि श्रावस्ती क्षेत्र में स्थित जंगल में बाघ नहीं है। यह अब्दुल्लागंज रेंज की तरफ से आया है। संभव है कि या तो कतर्निया के जंगल से या फिर नेपाल की ओर से माइग्रेट होकर बाघ आया हो। पिंजड़ा मंगवाया गया है। जल्द ही उसे पकड़ कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाएगा।