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सड़क पर लगती पाठशाला, फिर भी हौसले बुलंद
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मार्ग किनारे टाट पट्टी बिछा कर एमडीएम खाते प्राथमिक विद्यालय बरंगा के छात्र
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। छप्पर में पढ़ाई, सड़क पर एमडीएम फिर भी हौसले बुलंद। यह स्थिति है बाढ़ में बह गए प्राथमिक विद्यालय बरंगा का। जहां बच्चे किसी भी प्रकार की स्कूली सुविधा नहीं पा रहे। इसके बावजूद वह ककहरा के साथ संस्कार सीखने में किसी से पीछे नहीं है।
प्राथमिक विद्यालय बरंगा पांच वर्ष पूर्व राप्ती नदी की बाढ़ में बह गया था। तभी से यहां का स्कूल एक झोपड़ी में लगता है। मौसम चाहे जो हो। चाहे गर्मी की लू हो या ठंड की सर्द हवाएं, इन बच्चों के हौसलों को परास्त नहीं कर पा रही हैं। ऐसी स्थिति अभी भी है। बरंगा का प्राथमिक विद्यालय गांव की झोपड़ी में चल रहा है। लेकिन राप्ती नदी में आई बाढ़ के बाद कीचड़ में बच्चों का बैठना मुश्किल हो गया है।
अब इन बच्चों की पाठशाला सड़क पर लगती है। यही नहीं सड़क किनारे टाट-पट्टी पर बैठ कर ककहरा सीखते हैं। तो एमडीएम भी वहीं खाते हैं। स्थिति चाहे जितनी विकट हो या फिर यह कह लें कि प्रशासन की उपेक्षा चाहे जितनी हो लेकिन बच्चों का संस्कार देखते ही बनता है। (संवाद)
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प्राथमिक विद्यालय बरंगा पांच वर्ष पूर्व राप्ती नदी की बाढ़ में बह गया था। तभी से यहां का स्कूल एक झोपड़ी में लगता है। मौसम चाहे जो हो। चाहे गर्मी की लू हो या ठंड की सर्द हवाएं, इन बच्चों के हौसलों को परास्त नहीं कर पा रही हैं। ऐसी स्थिति अभी भी है। बरंगा का प्राथमिक विद्यालय गांव की झोपड़ी में चल रहा है। लेकिन राप्ती नदी में आई बाढ़ के बाद कीचड़ में बच्चों का बैठना मुश्किल हो गया है।
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अब इन बच्चों की पाठशाला सड़क पर लगती है। यही नहीं सड़क किनारे टाट-पट्टी पर बैठ कर ककहरा सीखते हैं। तो एमडीएम भी वहीं खाते हैं। स्थिति चाहे जितनी विकट हो या फिर यह कह लें कि प्रशासन की उपेक्षा चाहे जितनी हो लेकिन बच्चों का संस्कार देखते ही बनता है। (संवाद)
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