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Shravasti News: जन्म और मरण का चक्र दुखों का मूल कारण
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली मंगलवार को अनुयायियों से गुलजार रही। कोरियाई दल के सदस्यों ने अंगुलिमाल स्तूप के पास कोरिया मंदिर के मठाधीश के नेतृत्व में प्रार्थना कर विश्व शांति की कामना की।
इस दौरान मठाधीश दे ईन ने कहा कि बुद्ध के अनुसार, संसार में सभी वस्तुएं दुखमय हैं। उन्होंने जन्म और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना और धर्म का मूल उद्देश्य इससे छुटकारा दिलाना बताया। दुखों की वजह तृष्णा है इसलिए इसका उन्मूलन आवश्यक है। प्रिय वस्तुओं की इच्छा त्यागकर दुखों से मुक्त हुआ जा सकता है।
बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति को सरल बनाने के लिए दस शीलों पर बल दिया। ये अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, किसी प्रकार की संपत्ति न रखना, मधु सेवन न करना, असमय भोजन न करना, सुखप्रद बिस्तर पर न सोना, धन संचय न करना, स्त्रियों से दूर रहना और नृत्य-गायन से दूर रहना है। गृहस्थों के लिए प्रथम पांच शील व भिक्षुओं के लिए सभी शील मानना अनिवार्य हैं।
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इस दौरान मठाधीश दे ईन ने कहा कि बुद्ध के अनुसार, संसार में सभी वस्तुएं दुखमय हैं। उन्होंने जन्म और मरण के चक्र को दुखों का मूल कारण माना और धर्म का मूल उद्देश्य इससे छुटकारा दिलाना बताया। दुखों की वजह तृष्णा है इसलिए इसका उन्मूलन आवश्यक है। प्रिय वस्तुओं की इच्छा त्यागकर दुखों से मुक्त हुआ जा सकता है।
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बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति को सरल बनाने के लिए दस शीलों पर बल दिया। ये अहिंसा, सत्य, चोरी न करना, किसी प्रकार की संपत्ति न रखना, मधु सेवन न करना, असमय भोजन न करना, सुखप्रद बिस्तर पर न सोना, धन संचय न करना, स्त्रियों से दूर रहना और नृत्य-गायन से दूर रहना है। गृहस्थों के लिए प्रथम पांच शील व भिक्षुओं के लिए सभी शील मानना अनिवार्य हैं।
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