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वरिष्ठ नागरिक समाज की रीढ़
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विधिक शिविर में मौजूद न्यायिक अधिकारी व अधिवक्ता।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को इकौना के प्राथमिक विद्यालय गनेशपुर में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। इसमें सांप्रदायिक सौहार्द, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार एवं संरक्षण तथा संवैधानिक अधिकार व कर्तव्य सहित शासन की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई। इसकी शुरुआत प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की।
शिविर में सिविल जज प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की रीढ़ हैं। हमें अपने माता पिता व अन्य वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करना चाहिए। बुजुर्ग किसी भी परिवार के हों, वह गहरी जड़ होते है। जिस पर पूरा परिवार टिका होता है। किसी घर या भवन को ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए जिस तरह गहरी नींव जरूरी है। उसी तरह परिवार को फलने फूलने के लिए व एक साथ रहने के लिए बुजुर्ग की जरूरत होती है। साठ वर्ष से ऊपर के प्रत्येक नागरिक को वरिष्ठ नागरिक का दर्जा प्राप्त है। वह सरकारी सुविधाओं के हकदार है। जिस परिवार पर बड़ों का आशीर्वाद होता है, वह परिवार हमेशा हराभरा होता हैै।
उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार एवं संरक्षण व संवैधानिक अधिकार तथा कर्तव्य एवं शासन की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी भी दी। अधिवक्ता विष्णुदत्त अस्थाना ने कहा कि बुजुर्ग व्यक्ति ही अपने अनुभव के आधार पर परिवार को सही व गलत की परख देते है।
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आज के समय में कोई भी व्यक्ति बुजुर्ग के साथ रहना नहीं चाहता। वह बुजुर्ग को साथ रखना बोझ समझता है। यह समस्या इतनी विकराल रूप धारण करती जा रही है कि बुजुर्गों के प्रति इस तरह के बर्ताव को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को यह आदेश दिया है कि देश के सभी प्रांतीय जिलों में एक ओल्ड एज होम की स्थापना करें। जिससे बुजुर्गों को इधर उधर भटक कर दुश्वारी का सामना न करना पड़े।
बुजुर्ग अपने कमाऊ पुत्र व बहुओं आदि से गुजारा भत्ता ले सकते है। शिविर में समाज कल्याण विभाग के जीवनधन मिश्र ने कहाकि यदि कोई बेटा अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता है, तो मां-बाप अपनी दी हुई संपत्ति उससे वापस ले सकते है। शिविर को उप निरीक्षक विद्यासागर पांडेय, आेंकार नाथ चौधरी, परमजीत यादव, बृजेश, राजेश, महादेव शुक्ला, बजरंगी लाल, माता प्रसाद, सोहनलाल सहित अन्य मौजूद रहे।
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शिविर में सिविल जज प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की रीढ़ हैं। हमें अपने माता पिता व अन्य वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करना चाहिए। बुजुर्ग किसी भी परिवार के हों, वह गहरी जड़ होते है। जिस पर पूरा परिवार टिका होता है। किसी घर या भवन को ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए जिस तरह गहरी नींव जरूरी है। उसी तरह परिवार को फलने फूलने के लिए व एक साथ रहने के लिए बुजुर्ग की जरूरत होती है। साठ वर्ष से ऊपर के प्रत्येक नागरिक को वरिष्ठ नागरिक का दर्जा प्राप्त है। वह सरकारी सुविधाओं के हकदार है। जिस परिवार पर बड़ों का आशीर्वाद होता है, वह परिवार हमेशा हराभरा होता हैै।
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उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार एवं संरक्षण व संवैधानिक अधिकार तथा कर्तव्य एवं शासन की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी भी दी। अधिवक्ता विष्णुदत्त अस्थाना ने कहा कि बुजुर्ग व्यक्ति ही अपने अनुभव के आधार पर परिवार को सही व गलत की परख देते है।
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आज के समय में कोई भी व्यक्ति बुजुर्ग के साथ रहना नहीं चाहता। वह बुजुर्ग को साथ रखना बोझ समझता है। यह समस्या इतनी विकराल रूप धारण करती जा रही है कि बुजुर्गों के प्रति इस तरह के बर्ताव को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को यह आदेश दिया है कि देश के सभी प्रांतीय जिलों में एक ओल्ड एज होम की स्थापना करें। जिससे बुजुर्गों को इधर उधर भटक कर दुश्वारी का सामना न करना पड़े।
बुजुर्ग अपने कमाऊ पुत्र व बहुओं आदि से गुजारा भत्ता ले सकते है। शिविर में समाज कल्याण विभाग के जीवनधन मिश्र ने कहाकि यदि कोई बेटा अपने मां-बाप की सेवा नहीं करता है, तो मां-बाप अपनी दी हुई संपत्ति उससे वापस ले सकते है। शिविर को उप निरीक्षक विद्यासागर पांडेय, आेंकार नाथ चौधरी, परमजीत यादव, बृजेश, राजेश, महादेव शुक्ला, बजरंगी लाल, माता प्रसाद, सोहनलाल सहित अन्य मौजूद रहे।