{"_id":"5de699858ebc3e5476178679","slug":"teach-daughters-self-defense-with-education-and-culture-srawasti-news-lko495721432","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटियों को शिक्षा व संस्कार के साथ सिखाएं आत्मरक्षा के गुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटियों को शिक्षा व संस्कार के साथ सिखाएं आत्मरक्षा के गुर
विज्ञापन
श्रावस्ती के राजा वीरेंद्र कांत सिंह महाविद्यालय में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद अधिक?
- फोटो : SRAWASTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रावस्ती। बेटियों को जितनी शिक्षा व संस्कार की आवश्यकता है, उतनी ही जरूरत है कि वह आत्मरक्षा के गुर भी सीखें। बेटियों को गुड व बैड टच की जानकारी देने के साथ ही उन्हें जूडो कराटे, कुंगफू, कुश्ती व दौड़ में भी दक्ष बनने के लिए प्रेरित करें। यह बातें अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत राजा वीरेंद्र कांत सिंह महाविद्यालय भिनगा में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहीं।
वक्ताओं ने कहा कि बेटियां कोमल हैं, लेकिन कमजोर नहीं। उन्हें शिक्षा के साथ युद्ध कौशल भी सीखना चाहिए। तभी बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी। समाज में कुछ ऐसे दानव भी मौजूद हैं जो बहन बेटियों पर कुदृष्टि रखते हैं। उन्हें सबक सिखाने के लिए जरूरी है कि बेटियां आत्मरक्षा का गुर सीखें। जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन किसी निर्भया के साथ कोई अनहोनी नहीं होगी। यदि किसी ने ऐसा करने की कोशिश भी की तो बेटियां उसको उसी की भाषा में सबक सिखाने में दक्ष होंगी।
बेटियों के साथ घटी घटनाओं से लोगों में भय है, लेकिन उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। सतर्क रहें, एहतियात बरतें। पुलिस हर कदम आपके साथ है। कोई भी विषम परिस्थिति का आभास हो तो तत्काल टोल फ्री नंबर 112, 1090 अथवा स्थानीय पुलिस व थाना प्रभारी को सूचना दें। - सुनीता सिंह, सब इंस्पेक्टर
विज्ञापन
बेटियों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ साथ उन्हें खुला आसमान भी दें। इससे वह अच्छे व बुरे की पहचान कर सकें। विद्यालय में आत्मरक्षा का भी प्रशिक्षण दिलाया जाए। अभिभावक भी वक्त बेवक्त विद्यालय जाकर माहौल का हाल लेते रहें, ताकि बेटियां सुरक्षित रहें। - डॉ. मुकेश मातन हेलिया, एसीएमओ
नेताओं व राष्ट्र द्रोहियों के लिए न्यायालय रात में भी खुल जाता है। उनके विरोध व समर्थन में सत्ता पक्ष व विपक्ष कई कई दिनों तक प्रदर्शन भी करता है, जब कभी निर्भया के साथ घटना होती है तो सब गायब हो जाते हैं। ऐसे में अपराधियों के लिए फांसी की सजा देने का प्रावधान हो। - रिया त्रिपाठी
जिस देश में बेटियों को देवी के रूप में पूजा जाता है। उसी देश की बेटियों के भक्षण को दानव आगे पीछे लगे रहते हैं। इन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। यदि ऐसे अपराधियों को तत्काल सुनवाई कर फांसी देने का कानून लाया जाए, तभी अपराधियों में कानून का खौफ दिखेगा। - हंसनुमा बानो
महिलाओं व बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का सबसे पहले समाज को बहिष्कार करना चाहिए। इसके बाद ऐसे लोगों के मुंह में कालिख पोत कर पूरे नगर व गांव में घुमाना चाहिए। इन सबके बाद ऐसी गंदी सोच रखने वाले लोगों को तत्काल फांसी दी जानी चाहिए। - दर्खसा
बेटियां अब न तो मां की कोख में सुरक्षित हैं, और न ही बाहर। आज जब बेटियां घर से बाहर निकलती हैं तो माता पिता को उनकी चिंता रहती है। इसके पीछे हमारा समाज ही जिम्मेदार है। जो भी बहन बेटियों पर गलत निगाह उठाए, उसे समाज में कठोर दंड का प्रावधान किया जाए। - रुबीना खातून
आज लोगों का नैतिक पतन हो चुका है। लोग पोती की उम्र की लड़कियों पर भी गलत निगाह रखने लगे हैं। उन्हें यह भी शर्म नहीं आती कि उनके घर में भी बहन बेटियां हैं। जो व्यवहार आप अपनी बहन बेटियों के लिए बर्दाश्त नहीं कर सकते वह कोई और कैसे बर्दाश्त करेगा। - आफरीन बानो
हमारे देश में इस्लामिक देशों जैसा कठोर कानून जब तक नहीं बनेगा, तब तक कोई भी निर्भया खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगी। जब तक हमारे देश में भी दुष्कर्म करने वालों को चौराहे पर फांसी देने का कानून नहीं बनेगा, तब तक अपराधियों में कानून का खौफ नहीं नजर आएगा। - अल्तिसा खातून
ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि लड़कों की गलतियों पर उंगलियां बेटियों पर उठाई गईं। यह घर के अंदर की बात हो चाहे बाहर की। कदम कदम पर बेटियों को ही अपमानित होना पड़ता है। जब तक यह भेद भाव समाज में रहेगा, तब तक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। - सीमा खातून
हर साल रावण का पुतला दहन किया जाता है लेकिन लोग खुद के अंदर छिपे रावण को कभी नहीं जलाते। आज के समाज से तो रावण अच्छा था, जिसने माता सीता को हाथ तक नहीं लगाया था। आज तो लोग रिश्तों की मर्यादाओं को तार तार करने से नहीं चूकते हैं। - आरती
देश में हो रही घटनाओं से माताओं व बेटियों में दहशत है। वह यह निर्णय नहीं ले पा रही हैं कि वह किसके साथ सुरक्षित हैं और किसके साथ नहीं। विद्यालय परिसर, रास्ते, बस व ट्रेन हर जगह उनको नजरें घूरती रहती है। समाज में बदलाव के लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। - श्रद्धा सिंह
‘मत छेड़ किसी की बेटी को पाप होगा, आज नहीं तो कल तू भी किसी की बेटी का बाप होगा’ जिस दिन लोगों के अंदर यह भावना होगी उस दिन कोई भी बहन बेटी खुद को असुरक्षित महसूस नहीं करेगी। वह किसी भी समय कहीं भी आसानी से आ जा सकेंगी। - शिल्पा पांडेय
देश के कानून में तत्काल संशोधन किया जाए। बालक-बालिकाओं व महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के लिए अपराधियों को तत्काल सजा का प्रावधान किया जाए। निर्भया जैसे मामलों को नियमित सुनवाई कर पंद्रह दिन के अंदर दोषी को सजा देने का नियम किया जाए। - रेहनुमा खातून
विज्ञापन
वक्ताओं ने कहा कि बेटियां कोमल हैं, लेकिन कमजोर नहीं। उन्हें शिक्षा के साथ युद्ध कौशल भी सीखना चाहिए। तभी बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी। समाज में कुछ ऐसे दानव भी मौजूद हैं जो बहन बेटियों पर कुदृष्टि रखते हैं। उन्हें सबक सिखाने के लिए जरूरी है कि बेटियां आत्मरक्षा का गुर सीखें। जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन किसी निर्भया के साथ कोई अनहोनी नहीं होगी। यदि किसी ने ऐसा करने की कोशिश भी की तो बेटियां उसको उसी की भाषा में सबक सिखाने में दक्ष होंगी।
विज्ञापन
बेटियों के साथ घटी घटनाओं से लोगों में भय है, लेकिन उन्हें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। सतर्क रहें, एहतियात बरतें। पुलिस हर कदम आपके साथ है। कोई भी विषम परिस्थिति का आभास हो तो तत्काल टोल फ्री नंबर 112, 1090 अथवा स्थानीय पुलिस व थाना प्रभारी को सूचना दें। - सुनीता सिंह, सब इंस्पेक्टर
विज्ञापन
बेटियों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ साथ उन्हें खुला आसमान भी दें। इससे वह अच्छे व बुरे की पहचान कर सकें। विद्यालय में आत्मरक्षा का भी प्रशिक्षण दिलाया जाए। अभिभावक भी वक्त बेवक्त विद्यालय जाकर माहौल का हाल लेते रहें, ताकि बेटियां सुरक्षित रहें। - डॉ. मुकेश मातन हेलिया, एसीएमओ
नेताओं व राष्ट्र द्रोहियों के लिए न्यायालय रात में भी खुल जाता है। उनके विरोध व समर्थन में सत्ता पक्ष व विपक्ष कई कई दिनों तक प्रदर्शन भी करता है, जब कभी निर्भया के साथ घटना होती है तो सब गायब हो जाते हैं। ऐसे में अपराधियों के लिए फांसी की सजा देने का प्रावधान हो। - रिया त्रिपाठी
जिस देश में बेटियों को देवी के रूप में पूजा जाता है। उसी देश की बेटियों के भक्षण को दानव आगे पीछे लगे रहते हैं। इन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। यदि ऐसे अपराधियों को तत्काल सुनवाई कर फांसी देने का कानून लाया जाए, तभी अपराधियों में कानून का खौफ दिखेगा। - हंसनुमा बानो
महिलाओं व बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का सबसे पहले समाज को बहिष्कार करना चाहिए। इसके बाद ऐसे लोगों के मुंह में कालिख पोत कर पूरे नगर व गांव में घुमाना चाहिए। इन सबके बाद ऐसी गंदी सोच रखने वाले लोगों को तत्काल फांसी दी जानी चाहिए। - दर्खसा
बेटियां अब न तो मां की कोख में सुरक्षित हैं, और न ही बाहर। आज जब बेटियां घर से बाहर निकलती हैं तो माता पिता को उनकी चिंता रहती है। इसके पीछे हमारा समाज ही जिम्मेदार है। जो भी बहन बेटियों पर गलत निगाह उठाए, उसे समाज में कठोर दंड का प्रावधान किया जाए। - रुबीना खातून
आज लोगों का नैतिक पतन हो चुका है। लोग पोती की उम्र की लड़कियों पर भी गलत निगाह रखने लगे हैं। उन्हें यह भी शर्म नहीं आती कि उनके घर में भी बहन बेटियां हैं। जो व्यवहार आप अपनी बहन बेटियों के लिए बर्दाश्त नहीं कर सकते वह कोई और कैसे बर्दाश्त करेगा। - आफरीन बानो
हमारे देश में इस्लामिक देशों जैसा कठोर कानून जब तक नहीं बनेगा, तब तक कोई भी निर्भया खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगी। जब तक हमारे देश में भी दुष्कर्म करने वालों को चौराहे पर फांसी देने का कानून नहीं बनेगा, तब तक अपराधियों में कानून का खौफ नहीं नजर आएगा। - अल्तिसा खातून
ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि लड़कों की गलतियों पर उंगलियां बेटियों पर उठाई गईं। यह घर के अंदर की बात हो चाहे बाहर की। कदम कदम पर बेटियों को ही अपमानित होना पड़ता है। जब तक यह भेद भाव समाज में रहेगा, तब तक बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। - सीमा खातून
हर साल रावण का पुतला दहन किया जाता है लेकिन लोग खुद के अंदर छिपे रावण को कभी नहीं जलाते। आज के समाज से तो रावण अच्छा था, जिसने माता सीता को हाथ तक नहीं लगाया था। आज तो लोग रिश्तों की मर्यादाओं को तार तार करने से नहीं चूकते हैं। - आरती
देश में हो रही घटनाओं से माताओं व बेटियों में दहशत है। वह यह निर्णय नहीं ले पा रही हैं कि वह किसके साथ सुरक्षित हैं और किसके साथ नहीं। विद्यालय परिसर, रास्ते, बस व ट्रेन हर जगह उनको नजरें घूरती रहती है। समाज में बदलाव के लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। - श्रद्धा सिंह
‘मत छेड़ किसी की बेटी को पाप होगा, आज नहीं तो कल तू भी किसी की बेटी का बाप होगा’ जिस दिन लोगों के अंदर यह भावना होगी उस दिन कोई भी बहन बेटी खुद को असुरक्षित महसूस नहीं करेगी। वह किसी भी समय कहीं भी आसानी से आ जा सकेंगी। - शिल्पा पांडेय
देश के कानून में तत्काल संशोधन किया जाए। बालक-बालिकाओं व महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के लिए अपराधियों को तत्काल सजा का प्रावधान किया जाए। निर्भया जैसे मामलों को नियमित सुनवाई कर पंद्रह दिन के अंदर दोषी को सजा देने का नियम किया जाए। - रेहनुमा खातून