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शिक्षा के साथ आत्मरक्षा के गुर भी सीखें छात्राएं
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विन्द्रा प्रसाद स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जैता जानकीनगर में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम म
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। जमुनहा के जैता जानकी नगर स्थित बिंद्रा प्रसाद स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सोमवार को अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसकी अध्यक्षता विद्यालय प्रबंध समिति के प्रतिनिधि प्रताप पटेल ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बेटियों को जैसी शिक्षा व संस्कार देते हैं, ठीक उसी तरह उनको आत्मरक्षा के लिए भी तैयार करें। बेटियों को गुड व बैड टच की जानकारी देने के साथ ही उन्हें जूडो-कराटे, कुंग-फू, कुश्ती व दौड़ में भी प्रतिभाग करने को प्रेरित करें।
बेटियों को शिक्षा के साथ युद्ध कौशल भी सीखना चाहिए, तभी वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी और गलत निगाह रखने वालों को ठीक ढंग से सबक भी सिखा सकेंगी। बेटियां किसी भी मामले में बेटों से पीछे नहीं हैं। ऐसे में आत्मरक्षा का गुर सीखने के बाद उनका मनोबल और बढ़ेगा। साथ ही माता-पिता को भी उनको लेकर कोई चिंता नहीं रहेगी। इसलिए गुरुजनों को चाहिए कि वे एक क्लास आत्मरक्षा का भी चलाएं जिसमें बच्चियों को युद्ध कौशल के लिए दक्ष करें।
बेटियों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ-साथ उन्हें खुला आसमान भी दें ताकि वे अच्छे व बुरे की पहचान कर सकें। विद्यालय में पीटी के साथ ही आत्मरक्षा का भी प्रशिक्षण दिलाया जाए। इसके साथ ही अभिभावकों को भी चाहिए कि वे वक्त-बेवक्त विद्यालय जाकर माहौल का हाल लेते रहें। इससे बेटियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।
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-यशवंत कुमार वर्मा, प्रधानाचार्य
बेटियां किसी की मोहताज न रहें, हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकें, इसके लिए अच्छी शिक्षा बहुत जरूरी है। बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के साथ ही आत्मरक्षा के गुर भी सिखवाएं ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
-महिमा मिश्रा, शिक्षिका
जिस घर में बेटियों की किलकारी गूंजती है व महिलाएं खिलखिलाती हैं, उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। जहां बहू-बेटियों को प्रताड़ित किया जाता है, वहां सदैव निर्धनता बनी रहती है। इसलिए बहू-बेटियों को खुला असमान दें।
-ममता पटेल, शिक्षिका
माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी बेटियों से खुल कर बात करें। उन्हें सही व गलत के बारे में बताएं। यदि उनके साथ कोई दुर्व्यवहार करे तो उन्हें इतना खुलापन जरूर दें कि वे बेझिझक अभिभावकों को आपबीती बता सकें।
-पूनम सिद्धार्थ, शिक्षिका
महिलाओं व बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। गंदी सोच रखने वाले को सबक सिखाने के साथ ही उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जाए ताकि कोई दूसरा ऐसी हिम्मत न कर सके।
-चांदनी मिश्रा
बेटियां कब तक खुद को असुरक्षित महसूस करती रहेंगी। आज जरूरत इस बात की है कि उन्हें शिक्षा के साथ ही आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाएं ताकि वे घर से बाहर निकलें तो माता-पिता को किसी तरह की चिंता न सताए।
-आराधना पटेल
जो लोग बेटियों पर गलत निगाह रखते हैं, उन्हें यह शर्म आनी चाहिए कि उनके घर में भी बहन-बेटियां हैं। जो व्यवहार वह अपनी बहन बेटियों के लिए बर्दाश्त नहीं कर सकते, वैसा व्यवहार दूसरे की बहन-बेटी के साथ भी न करें।
-अर्चना पटेल
लड़कियों को चाहिए कि वे विद्यालय आते-जाते समय समूह में चलें। घर से बाहर निकलते समय पूरी तरह निडर होकर जाएं। यदि कोई उनके साथ अभद्रता करे तो अंजाम की परवाह किए बिना उसको सबक जरूर सिखाएं।
-अर्चना मौर्या
गलती अक्सर लड़के ही करते हैं जिसका खामियाजा बेटियों को भुगतना पड़ता है। चाहे सामाजिक रूप से हो अथवा मानसिक रूप से, उंगलियां हमेशा बेटियों पर ही उठती हैं। यह सोच एकदम से बदलनी होगी।
-मौसम मिश्रा
आज के माहौल में यह समझ पाना असंभव हो रहा है कि कौन अच्छा है, कौन नहीं। इसलिए किसी को भी इतना महत्व न दें कि वह आपका फायदा उठा सके। एक मर्यादा तक ही किसी को महत्व दें।
-साक्षी वर्मा
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बेटियों को शिक्षा के साथ युद्ध कौशल भी सीखना चाहिए, तभी वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी और गलत निगाह रखने वालों को ठीक ढंग से सबक भी सिखा सकेंगी। बेटियां किसी भी मामले में बेटों से पीछे नहीं हैं। ऐसे में आत्मरक्षा का गुर सीखने के बाद उनका मनोबल और बढ़ेगा। साथ ही माता-पिता को भी उनको लेकर कोई चिंता नहीं रहेगी। इसलिए गुरुजनों को चाहिए कि वे एक क्लास आत्मरक्षा का भी चलाएं जिसमें बच्चियों को युद्ध कौशल के लिए दक्ष करें।
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बेटियों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान देने के साथ-साथ उन्हें खुला आसमान भी दें ताकि वे अच्छे व बुरे की पहचान कर सकें। विद्यालय में पीटी के साथ ही आत्मरक्षा का भी प्रशिक्षण दिलाया जाए। इसके साथ ही अभिभावकों को भी चाहिए कि वे वक्त-बेवक्त विद्यालय जाकर माहौल का हाल लेते रहें। इससे बेटियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।
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-यशवंत कुमार वर्मा, प्रधानाचार्य
बेटियां किसी की मोहताज न रहें, हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकें, इसके लिए अच्छी शिक्षा बहुत जरूरी है। बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने के साथ ही आत्मरक्षा के गुर भी सिखवाएं ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
-महिमा मिश्रा, शिक्षिका
जिस घर में बेटियों की किलकारी गूंजती है व महिलाएं खिलखिलाती हैं, उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। जहां बहू-बेटियों को प्रताड़ित किया जाता है, वहां सदैव निर्धनता बनी रहती है। इसलिए बहू-बेटियों को खुला असमान दें।
-ममता पटेल, शिक्षिका
माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी बेटियों से खुल कर बात करें। उन्हें सही व गलत के बारे में बताएं। यदि उनके साथ कोई दुर्व्यवहार करे तो उन्हें इतना खुलापन जरूर दें कि वे बेझिझक अभिभावकों को आपबीती बता सकें।
-पूनम सिद्धार्थ, शिक्षिका
महिलाओं व बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। गंदी सोच रखने वाले को सबक सिखाने के साथ ही उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जाए ताकि कोई दूसरा ऐसी हिम्मत न कर सके।
-चांदनी मिश्रा
बेटियां कब तक खुद को असुरक्षित महसूस करती रहेंगी। आज जरूरत इस बात की है कि उन्हें शिक्षा के साथ ही आत्मरक्षा के गुर भी सिखाए जाएं ताकि वे घर से बाहर निकलें तो माता-पिता को किसी तरह की चिंता न सताए।
-आराधना पटेल
जो लोग बेटियों पर गलत निगाह रखते हैं, उन्हें यह शर्म आनी चाहिए कि उनके घर में भी बहन-बेटियां हैं। जो व्यवहार वह अपनी बहन बेटियों के लिए बर्दाश्त नहीं कर सकते, वैसा व्यवहार दूसरे की बहन-बेटी के साथ भी न करें।
-अर्चना पटेल
लड़कियों को चाहिए कि वे विद्यालय आते-जाते समय समूह में चलें। घर से बाहर निकलते समय पूरी तरह निडर होकर जाएं। यदि कोई उनके साथ अभद्रता करे तो अंजाम की परवाह किए बिना उसको सबक जरूर सिखाएं।
-अर्चना मौर्या
गलती अक्सर लड़के ही करते हैं जिसका खामियाजा बेटियों को भुगतना पड़ता है। चाहे सामाजिक रूप से हो अथवा मानसिक रूप से, उंगलियां हमेशा बेटियों पर ही उठती हैं। यह सोच एकदम से बदलनी होगी।
-मौसम मिश्रा
आज के माहौल में यह समझ पाना असंभव हो रहा है कि कौन अच्छा है, कौन नहीं। इसलिए किसी को भी इतना महत्व न दें कि वह आपका फायदा उठा सके। एक मर्यादा तक ही किसी को महत्व दें।
-साक्षी वर्मा