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Shravasti News: खेतों में रोकें खरपतवार, करें दवा का छिड़काव
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गिलौला के ककंधू में फसल प्रदर्शन करते कृषि वैज्ञानिक व किसान
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए सिंचाई कर चुके किसान खेतों में खरपतवार रोकने के लिए दवा के साथ ही यूरिया का छिड़काव करें। यह सलाह कृषि वैज्ञानिक व केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने दी। वह गुरुवार को प्रक्षेत्र परीक्षण एवं तकनीकी प्रदर्शन के लिए टीम के साथ ककंधू एवं गिलौली पहुंचे थे। इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में जाकर फसलों का निरीक्षण भी किया।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या की ओर से जिले में कृषि विज्ञान केंद्र का संचालन किया जा रहा है। गब्बापुर में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से गिलौला विकास क्षेत्र के ककंधू व गिलौली गांव में 15 हेक्टेयर भूमि में 30 किसानों के खेतों पर गेहूं की नवीनतम प्रजाति डीवीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222 व डीबीडब्ल्यू 252 की बुआई कराई गई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रोहित कुमार पांडे किसानों को सलाह दी कि सिंचाई का कार्य पूरा कर चुके किसान तत्काल अपने खेत में यूरिया व नैनों का छिड़काव सुनिश्चित कराएं।
डॉ. रामभरोसे ने किसानों को सलाह दी कि खेत में ज्यादा खरपतवार होने से उर्वरक की आधी शक्ति खरपतवार में चली जाती है। इसका फसल को पूरा फायदा नहीं मिलता। इससे फसल कमजोर होने के साथ पैदावार भी कम होती है। इससे किसानों को नुकसान होता है। डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को खरपतवार प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए इससे बचाव के लिए खेत में सल्फोसल्फ्यूरान दवा की 33 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 400 से 500 लीटर पानी में घोलकर फ्लैट नोजिल से छिड़काव कराने की सलाह भी दी।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या की ओर से जिले में कृषि विज्ञान केंद्र का संचालन किया जा रहा है। गब्बापुर में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से गिलौला विकास क्षेत्र के ककंधू व गिलौली गांव में 15 हेक्टेयर भूमि में 30 किसानों के खेतों पर गेहूं की नवीनतम प्रजाति डीवीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222 व डीबीडब्ल्यू 252 की बुआई कराई गई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रोहित कुमार पांडे किसानों को सलाह दी कि सिंचाई का कार्य पूरा कर चुके किसान तत्काल अपने खेत में यूरिया व नैनों का छिड़काव सुनिश्चित कराएं।
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डॉ. रामभरोसे ने किसानों को सलाह दी कि खेत में ज्यादा खरपतवार होने से उर्वरक की आधी शक्ति खरपतवार में चली जाती है। इसका फसल को पूरा फायदा नहीं मिलता। इससे फसल कमजोर होने के साथ पैदावार भी कम होती है। इससे किसानों को नुकसान होता है। डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को खरपतवार प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए इससे बचाव के लिए खेत में सल्फोसल्फ्यूरान दवा की 33 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 400 से 500 लीटर पानी में घोलकर फ्लैट नोजिल से छिड़काव कराने की सलाह भी दी।
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