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सौतेली मां के हत्यारे को आजीवन कारावास
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श्रावस्ती। संपत्ति के लालच में पांच वर्ष पूर्व सोनवा थाना क्षेत्र के नासिरगंज में एक महिला की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतका के पिता की तहरीर पर पुलिस ने सौतेले पुत्र पर मामला दर्ज किया था। जिस पर सुनवाई के बाद बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय ने आरोपी सौतेले पुत्र पर दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाया।
इस मामले में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि सोनवा थाना क्षेत्र के नासिरगंज निवासिनी एक महिला की 21 फरवरी 2017 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। इस मामले में थाना क्षेत्र के अचरौरा शाहपुर निवासी सोमई पुत्र लालता प्रसाद ने सोनवा पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें उसने कहा था कि उसने अपनी पुत्री मैना देवी का विवाह नासिरगंज निवासी चिंताराम पुत्र सुखदेव उर्फ बाउर के साथ किया था। पीड़ित की पुत्री नासिरगंज में अपने घर पर रह रही थी। जिसकी संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई है। पुलिस द्वारा लाश का पोस्टमार्टम कराया गया। जिसमें मृतका के शरीर पर दो चोट के निशान थे। उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। विवेचना के दौरान प्रकाश में आया कि सौतेले पुत्र सीताराम पुत्र चिंताराम ने ही संपत्ति के लालच में अपनी मां की हत्या की है। वह अपने पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति में आधा हिस्सा सौतेली मां को मिलने से नाराज रहता था।
इस मामले में पुलिस द्वारा सीताराम को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले का विचारण अपर जिला सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) अजय कुमार सिंह ने किया। जिन्होंने अभियोजन के तर्कों व गवाहों के बयान व उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीताराम को दोषी करार देते हुए उसे सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी को 50,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज कुमार गुप्ता कर रहे थे।
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इस मामले में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि सोनवा थाना क्षेत्र के नासिरगंज निवासिनी एक महिला की 21 फरवरी 2017 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। इस मामले में थाना क्षेत्र के अचरौरा शाहपुर निवासी सोमई पुत्र लालता प्रसाद ने सोनवा पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें उसने कहा था कि उसने अपनी पुत्री मैना देवी का विवाह नासिरगंज निवासी चिंताराम पुत्र सुखदेव उर्फ बाउर के साथ किया था। पीड़ित की पुत्री नासिरगंज में अपने घर पर रह रही थी। जिसकी संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई है। पुलिस द्वारा लाश का पोस्टमार्टम कराया गया। जिसमें मृतका के शरीर पर दो चोट के निशान थे। उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। विवेचना के दौरान प्रकाश में आया कि सौतेले पुत्र सीताराम पुत्र चिंताराम ने ही संपत्ति के लालच में अपनी मां की हत्या की है। वह अपने पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति में आधा हिस्सा सौतेली मां को मिलने से नाराज रहता था।
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इस मामले में पुलिस द्वारा सीताराम को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामले का विचारण अपर जिला सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) अजय कुमार सिंह ने किया। जिन्होंने अभियोजन के तर्कों व गवाहों के बयान व उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीताराम को दोषी करार देते हुए उसे सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आरोपी को 50,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अभियोजन पक्ष की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पंकज कुमार गुप्ता कर रहे थे।
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