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एसएनसीयू में दो घंटे के अंतराल पर तीन नवजात की मौत से हड़कंप
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एसएनसीयू में 2 घंटे के अंतराल पर तीन नवजात की मौत से हड़कंप
-- बिजली गुल होने से ऑक्सीजन प्लांट बंद होने का आरोप
-- अस्पताल प्रशासन का इंकार, गंभीर स्थिति में थे तीनों नवजात
फोटो - 06,07
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। संयुक्त जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न क्रिटिकल यूनिट) में भर्ती तीन नवजात शिशुओं की मौत दो घंटा दस मिटन के अंतराल पर हो जाने से हड़कंप है। इस दौरान अस्पताल में बिजली भी गुल थी। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि बिजली न आने के कारण यूनिट का ऑक्सीजन प्लांट बंद हो जाने के कारण ही तीनों नवजात की मौत हुई है। इसे लेकर उन्होंने कुछ देर तक का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया। सोमवार को हुई इस घटना की जानकारी के बाद सीएमओ ने भी अस्पताल पहुंचकर एसएनसीयू का जायजा लिया। उन्होंने यूनिट में ऑक्सीजन की कमी के आरोप को खारिज करते हुए बताया कि तीनों नवजात की मृत्यु उनकी क्रिटिकल स्थिति के कारण हुई थी। सीएमओ डॉ. शारदा प्रसाद तिवारी ने बताया कि बिजली बाधित होने के दौरान यूनिट को जेनरेटर से बिजली सप्लाई मिल रही थी।
इस संबंध में अस्पताल की सीएमएस डा. जेता सिंह ने बताया है कि एसएनसीयू वार्ड में जिन तीन नवजात शिशुओं की मृत्यु हुई है, उनमें नवजात शिशु (बेबी आफ पिंकी) को 02 अगस्त को ही सुबह 6 बजे गैसपिंग की अवस्था में भर्ती कराया गया था। अंडरवेट बेबी मात्र 1.800 किग्रा का था। इसी कारण काफी प्रयास के बाद भी उसकी मृत्यु दोपहर 12 बजे हो गई। उन्होंने बताया कि दूसरे नवजात शिशु (बेबी आफ शीला) को 31 जुलाई की दोपहर 3:15 बजे भर्ती किया गया था। प्रसव के समय बच्चा रोया नही था और वह बर्थ एस्पिया का शिकार था। इसी कारण उसकी मृत्यु भी दो अगस्त को दोपहर 2:05 बजे हो गयी जबकि नवजात शिशु (बेबी आफ सोनू) को 31 जुलाई को सुबह चार बजे भर्ती किया गया था। नवजात ने प्रसव के दौरान गंदा पानी पी लिया था। इसी कारण उसे सांस लेने मे कठिनाई हो रही थी। इसकी मृत्यु भी दो अगस्त को दोपहर एक बजे हुई। इससे साफ होता है कि किसी भी नवजात शिशु की मृत्यु का कारण आक्सीजन की आपूर्ति बाधित होना नहीं है।
सीएमएस ने माना घंटों गुल थी बिजली
सीएमएस ने बताया कि यह बात सही है कि दो अगस्त को सुबह सात बजे से चिकित्सालय मे विद्युत आपूर्ति बाधित थी। इस कारण जेनरेटर के माध्यम से चिकित्सालय एवं एसएनसीयू वार्ड में विद्युत आपूर्ति कराई जा रही थी। इस दौरान सिर्फ शाम को चार बजे करीब 15 से 20 मिनट के लिए ही जेनरेटर को बंद किया गया था। दूसरी तरफ अधिशासी अभियंता विद्युत डीपी सिंह ने बताया कि बारिश के समय मीटर व वीसीबी रूम मे सीलन के कारण सर्किट ब्रेक हुआ था। कुछ घंटों में इस फाल्ट को ठीक कराकर विद्युत आपूर्ति बहाल करा दी गयी थी।
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बिना बजट के कैसे चला अस्पताल का जेनरेटर
अस्पताल की सीएमएस डा. जेता सिंह ने कुछ दिन पहले ही बताया था कि संयुक्त जिला चिकित्सालय में डीजल मद में बजट का पैसा न मिलने के कारण जेनरेटर संचालित करने में परेशानी हो रही है। डीजल मद में आवंटित बजट राशि दिलवाने के लिए डीएम के माध्यम से निदेशक को भी एक पत्र भेजा गया था। अब तीन नवजात की एक ही दिन में दो घंटे के अंतराल पर हुई मौत के बाद अस्पताल प्रशासन दूसरी मद के पैसों के सहारे अस्पताल में जेनरेटर संचालित कर बिजली सप्लाई बाधित न होने का दावा कर रहा है।
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-- बिजली गुल होने से ऑक्सीजन प्लांट बंद होने का आरोप
-- अस्पताल प्रशासन का इंकार, गंभीर स्थिति में थे तीनों नवजात
फोटो - 06,07
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। संयुक्त जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न क्रिटिकल यूनिट) में भर्ती तीन नवजात शिशुओं की मौत दो घंटा दस मिटन के अंतराल पर हो जाने से हड़कंप है। इस दौरान अस्पताल में बिजली भी गुल थी। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि बिजली न आने के कारण यूनिट का ऑक्सीजन प्लांट बंद हो जाने के कारण ही तीनों नवजात की मौत हुई है। इसे लेकर उन्होंने कुछ देर तक का आरोप लगाते हुए हंगामा भी किया। सोमवार को हुई इस घटना की जानकारी के बाद सीएमओ ने भी अस्पताल पहुंचकर एसएनसीयू का जायजा लिया। उन्होंने यूनिट में ऑक्सीजन की कमी के आरोप को खारिज करते हुए बताया कि तीनों नवजात की मृत्यु उनकी क्रिटिकल स्थिति के कारण हुई थी। सीएमओ डॉ. शारदा प्रसाद तिवारी ने बताया कि बिजली बाधित होने के दौरान यूनिट को जेनरेटर से बिजली सप्लाई मिल रही थी।
इस संबंध में अस्पताल की सीएमएस डा. जेता सिंह ने बताया है कि एसएनसीयू वार्ड में जिन तीन नवजात शिशुओं की मृत्यु हुई है, उनमें नवजात शिशु (बेबी आफ पिंकी) को 02 अगस्त को ही सुबह 6 बजे गैसपिंग की अवस्था में भर्ती कराया गया था। अंडरवेट बेबी मात्र 1.800 किग्रा का था। इसी कारण काफी प्रयास के बाद भी उसकी मृत्यु दोपहर 12 बजे हो गई। उन्होंने बताया कि दूसरे नवजात शिशु (बेबी आफ शीला) को 31 जुलाई की दोपहर 3:15 बजे भर्ती किया गया था। प्रसव के समय बच्चा रोया नही था और वह बर्थ एस्पिया का शिकार था। इसी कारण उसकी मृत्यु भी दो अगस्त को दोपहर 2:05 बजे हो गयी जबकि नवजात शिशु (बेबी आफ सोनू) को 31 जुलाई को सुबह चार बजे भर्ती किया गया था। नवजात ने प्रसव के दौरान गंदा पानी पी लिया था। इसी कारण उसे सांस लेने मे कठिनाई हो रही थी। इसकी मृत्यु भी दो अगस्त को दोपहर एक बजे हुई। इससे साफ होता है कि किसी भी नवजात शिशु की मृत्यु का कारण आक्सीजन की आपूर्ति बाधित होना नहीं है।
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सीएमएस ने माना घंटों गुल थी बिजली
सीएमएस ने बताया कि यह बात सही है कि दो अगस्त को सुबह सात बजे से चिकित्सालय मे विद्युत आपूर्ति बाधित थी। इस कारण जेनरेटर के माध्यम से चिकित्सालय एवं एसएनसीयू वार्ड में विद्युत आपूर्ति कराई जा रही थी। इस दौरान सिर्फ शाम को चार बजे करीब 15 से 20 मिनट के लिए ही जेनरेटर को बंद किया गया था। दूसरी तरफ अधिशासी अभियंता विद्युत डीपी सिंह ने बताया कि बारिश के समय मीटर व वीसीबी रूम मे सीलन के कारण सर्किट ब्रेक हुआ था। कुछ घंटों में इस फाल्ट को ठीक कराकर विद्युत आपूर्ति बहाल करा दी गयी थी।
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अस्पताल की सीएमएस डा. जेता सिंह ने कुछ दिन पहले ही बताया था कि संयुक्त जिला चिकित्सालय में डीजल मद में बजट का पैसा न मिलने के कारण जेनरेटर संचालित करने में परेशानी हो रही है। डीजल मद में आवंटित बजट राशि दिलवाने के लिए डीएम के माध्यम से निदेशक को भी एक पत्र भेजा गया था। अब तीन नवजात की एक ही दिन में दो घंटे के अंतराल पर हुई मौत के बाद अस्पताल प्रशासन दूसरी मद के पैसों के सहारे अस्पताल में जेनरेटर संचालित कर बिजली सप्लाई बाधित न होने का दावा कर रहा है।