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स्वच्छ व निर्मल गांव का सपना धूमिल कर रहे जिम्मेदार
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जमुनहा (श्रावस्ती)। स्वच्छ व निर्मल गांव के सपने को साकार करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रति वर्ष जिले में करोड़ों रुपये खर्च भी हो रहे हैं। गांव को स्वच्छ व निर्मल बनाने की जिम्मेदारी निभाने वालों की लापरवाही के कारण गांव गंदगी से पटे हुए हैं। जहां बजबजाती नालियां, मार्ग पर फैला नालियों का मलवा व नाला बनी गांव की गलियां ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रही है।
जमुनहा विकास क्षेत्र के नासिरगंज को क्षेत्र के प्रमुख बाजार का दर्जा प्राप्त है। नासिरगंज बाजार दो ग्राम पंचायत महदेवा व चंदन कोटिया के मध्य स्थित है। दो ग्राम पंचायतों के बीच बसे इस बाजार में जहां आसपास क्षेत्र के गांव से लोग नियमित खरीदारी के लिए आते हैं। जिनका सामना बाजार में प्रवेश के साथ ही मार्ग पर फैले नालियों के मलबे से होता है। बरदेहरा बदला मार्ग के दोनों पटरियों पर बसे इस गांव में ऐसा नहीं है कि नालियों का निर्माण नहीं कराया गया। लेकिन इनकी सफाई की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी अपने दायित्वों से मुंह मोड़ रहे हैं। अल्पसंख्यक बाहुल्य इस बाजार में बनी सभी नालियां पूरी तरह से चोक हैं। इसके कारण नालियों का पानी गलियों में भरा रहता है।
इस कारण जहां लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है। वहीं बरसात बाद निकलने वाली धूप व मलबे से उठने वाली दुर्गंध के कारण स्थानीय निवासियों को संक्रामक रोग का खतरा सता रहा है। स्थानीय निवासी नाजिम हैदर की मानें तो बाजार में आने जाने के लिए वर्षों पूर्व बनी सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे इनमें गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में बरसात व लोगों के घरों का पानी प्रत्येक मौसम में मार्ग पर जमा रहता है। जिस पर न तो ग्राम प्रधान दे रहे हैं और न ही सफाई कर्मी। शादाब हुसैन बताते हैं कि नासिरगंज बाजार दो ग्राम पंचायत महदेवा व चंदन कोटिया में आता है। इसके बावजूद यहां अपेक्षित विकास नही हो रहा है। शालू व बिन्नू का आरोप हैं कि दो ग्राम पंचायतों के बीच बसे इस बाजार के विकास में बार्डर की बात कह दोनों ही प्रधान अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं जिला पंचायत व लोकनिर्माण विभाग भी मार्ग मरम्मत में रुचि नहीं ले रहा है। जिससे लोगों की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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जमुनहा विकास क्षेत्र के नासिरगंज को क्षेत्र के प्रमुख बाजार का दर्जा प्राप्त है। नासिरगंज बाजार दो ग्राम पंचायत महदेवा व चंदन कोटिया के मध्य स्थित है। दो ग्राम पंचायतों के बीच बसे इस बाजार में जहां आसपास क्षेत्र के गांव से लोग नियमित खरीदारी के लिए आते हैं। जिनका सामना बाजार में प्रवेश के साथ ही मार्ग पर फैले नालियों के मलबे से होता है। बरदेहरा बदला मार्ग के दोनों पटरियों पर बसे इस गांव में ऐसा नहीं है कि नालियों का निर्माण नहीं कराया गया। लेकिन इनकी सफाई की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी अपने दायित्वों से मुंह मोड़ रहे हैं। अल्पसंख्यक बाहुल्य इस बाजार में बनी सभी नालियां पूरी तरह से चोक हैं। इसके कारण नालियों का पानी गलियों में भरा रहता है।
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इस कारण जहां लोगों को आवागमन में असुविधा हो रही है। वहीं बरसात बाद निकलने वाली धूप व मलबे से उठने वाली दुर्गंध के कारण स्थानीय निवासियों को संक्रामक रोग का खतरा सता रहा है। स्थानीय निवासी नाजिम हैदर की मानें तो बाजार में आने जाने के लिए वर्षों पूर्व बनी सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे इनमें गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में बरसात व लोगों के घरों का पानी प्रत्येक मौसम में मार्ग पर जमा रहता है। जिस पर न तो ग्राम प्रधान दे रहे हैं और न ही सफाई कर्मी। शादाब हुसैन बताते हैं कि नासिरगंज बाजार दो ग्राम पंचायत महदेवा व चंदन कोटिया में आता है। इसके बावजूद यहां अपेक्षित विकास नही हो रहा है। शालू व बिन्नू का आरोप हैं कि दो ग्राम पंचायतों के बीच बसे इस बाजार के विकास में बार्डर की बात कह दोनों ही प्रधान अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। वहीं जिला पंचायत व लोकनिर्माण विभाग भी मार्ग मरम्मत में रुचि नहीं ले रहा है। जिससे लोगों की मुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
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