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कोर्ट में अभिलेख निरीक्षण व प्रतिलिपि शुल्क दस गुना तक महंगा
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श्रावस्ती। न्याय पाना अब और महंगा हो गया है। अभिलेख निरीक्षण, खोज एवं प्रतिलिपि पाना अब दस गुना तक महंगा हो गया है। इसके लिए जमा होने वाली शुल्क राशि में दस गुना तक बढ़ोत्तरी की गयी है। अपराध के मामलों में यह शुल्क वृद्धि बीस गुना तक होगी। शुल्क वृद्धि का नया फरमान लागू भी कर दिया गया है। इसके साथ ही न्यायालय ने डीएम को भी सूचीबद्ध मामलों में शुल्क बढ़ाने के लिए पत्र भेजा है।
नए शासनादेश के अनुसार जिले में अभिलेखों का निरीक्षण, खोज व नकल प्राप्त करने के लिए अब वादकारियों को दस गुना अधिक पैसा देना होगा। इसके लिए सिविल जज ने एक पत्र भी जारी किया है। इस पत्र में उच्च न्यायालय के आदेश व शासनादेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सामान्य नियमावली सिविल में अभिलेखों का निरीक्षण एवं खोज के लिए कोर्ट फीस पांच रुपया के स्थान पर पचास रुपया देने होंगे।
इसी प्रकार दीवानी के मामलों में प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए वादकारियों को एक हजार शब्दों तक पांच रुपये के स्थान पर पचास रुपये तथा आवश्यक प्रतिलिपि के लिए दस रुपये के स्थान पर सौ रुपया शुल्क के रूप में देना होगा। इसके अतिरिक्त एक हजार शब्द से अधिक शब्द होने पर प्रत्येक 250 शब्द पर पांच रुपये के स्थान पर दस रुपया शुल्क देना होगा। सामान्य नियमावली दांडिक में संशोधन करते हुए अभिलेखों के निरीक्षण के लिए पचास पैसे के स्थान पर शुल्क दस रुपये कर दिया गया है। प्रतिलिपि के मामले में दस रुपये के स्थान पर बीस रुपये किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर जारी शासनादेश सामान्य नियमावली दीवानी एवं सामान्य नियमावली फौजदारी पर ही लागू है। जिला मजिस्ट्रेट व सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के यहां भी कुछ मामले इस श्रेणी के आते हैं। इसलिए सिविल जज की ओर से डीएम को पत्र भेजा गया है। इसमें आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। पहले यह आदेश केवल दीवानी व फौजदारी मामलों में लागू होना था लेकिन राजस्व विभाग के समस्त न्यायालयों में भी शुल्क की बढ़ी हुई दर को लागू कर दिया गया है। इससे अब राजस्व मामलों से जुड़े वादकारियों की जेब पर भी सीधा बोझ पड़ेगा।
मॉडल बार एसोसिएशन ने राजस्व न्यायालयों पर लागू नई शुल्क वृद्धि का विरोध किया है। शुल्क वृद्धि वापस लेने के लिए अधिवक्ताओं ने एक प्रत्यावेदन भी डीएम को सौंपा है। इसमें कहा गया है कि जारी शासनादेश सिविल व फौजदारी से जुड़े मामलों के लिए ही है। इसे राजस्व न्यायालयों पर न लागू किया जाए।
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नए शासनादेश के अनुसार जिले में अभिलेखों का निरीक्षण, खोज व नकल प्राप्त करने के लिए अब वादकारियों को दस गुना अधिक पैसा देना होगा। इसके लिए सिविल जज ने एक पत्र भी जारी किया है। इस पत्र में उच्च न्यायालय के आदेश व शासनादेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सामान्य नियमावली सिविल में अभिलेखों का निरीक्षण एवं खोज के लिए कोर्ट फीस पांच रुपया के स्थान पर पचास रुपया देने होंगे।
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इसी प्रकार दीवानी के मामलों में प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए वादकारियों को एक हजार शब्दों तक पांच रुपये के स्थान पर पचास रुपये तथा आवश्यक प्रतिलिपि के लिए दस रुपये के स्थान पर सौ रुपया शुल्क के रूप में देना होगा। इसके अतिरिक्त एक हजार शब्द से अधिक शब्द होने पर प्रत्येक 250 शब्द पर पांच रुपये के स्थान पर दस रुपया शुल्क देना होगा। सामान्य नियमावली दांडिक में संशोधन करते हुए अभिलेखों के निरीक्षण के लिए पचास पैसे के स्थान पर शुल्क दस रुपये कर दिया गया है। प्रतिलिपि के मामले में दस रुपये के स्थान पर बीस रुपये किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर जारी शासनादेश सामान्य नियमावली दीवानी एवं सामान्य नियमावली फौजदारी पर ही लागू है। जिला मजिस्ट्रेट व सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के यहां भी कुछ मामले इस श्रेणी के आते हैं। इसलिए सिविल जज की ओर से डीएम को पत्र भेजा गया है। इसमें आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। पहले यह आदेश केवल दीवानी व फौजदारी मामलों में लागू होना था लेकिन राजस्व विभाग के समस्त न्यायालयों में भी शुल्क की बढ़ी हुई दर को लागू कर दिया गया है। इससे अब राजस्व मामलों से जुड़े वादकारियों की जेब पर भी सीधा बोझ पड़ेगा।
मॉडल बार एसोसिएशन ने राजस्व न्यायालयों पर लागू नई शुल्क वृद्धि का विरोध किया है। शुल्क वृद्धि वापस लेने के लिए अधिवक्ताओं ने एक प्रत्यावेदन भी डीएम को सौंपा है। इसमें कहा गया है कि जारी शासनादेश सिविल व फौजदारी से जुड़े मामलों के लिए ही है। इसे राजस्व न्यायालयों पर न लागू किया जाए।