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Shravasti News: बौद्ध व रामायण सर्किट का केंद्र बिंदु बने श्रावस्ती
Sat, 14 Jun 2025 02:44 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sat, 14 Jun 2025 02:44 AM IST
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लखनऊ में मुख्यमंत्री से भेंटकर जिले के विकास की चर्चा करते श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय।
श्रावस्ती। अयोध्या की तर्ज पर लवकुश की जन्मस्थली श्रावस्ती का भी सर्वांगीण विकास हो। इसे बौद्ध व रामायण सर्किट का केंद्र बिंदु बनाया जाए। इसके लिए विशेष प्राधिकरण का गठन किया जाए। इससे अति पिछड़े क्षेत्र में शामिल श्रावस्ती जिले का सर्वांगीण विकास होगा। ये बातें शुक्रवार को श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर कहीं।
विधायक ने मुख्यमंत्री को बताया कि इकौना के ग्राम टड़वा महंत स्थित सीताद्वार में महर्षि वाल्मीकि आश्रम है। यहां सैकड़ों एकड़ में फैली सीताद्वार झील का कायाकल्प कर इसे ईको टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे न सिर्फ जिले का चहुंमुखी विकास होगा, बल्कि लवकुश की जन्मस्थली को अयोध्या की तर्ज पर पौराणिक पहचान भी मिलेगी। महाकवि कालीदास के रघुवंशम महाकाव्य में श्रावस्ती को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र लव की राजधानी बताई गई है। यही नहीं तथागत भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक 24 वर्षावास श्रावस्ती में बिताया। इसे जैन तीर्थंकर भगवान संभवनाथ की जन्मस्थली होने का भी गौरव हासिल है। ऐसे में श्रावस्ती की पहचान श्रीराम के गौरव का प्रतीक इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण के लिए श्रावस्ती विशेष विकास प्राधिकरण का गठन कर उसके तहत बौद्ध व रामायण सर्किट के केंद्र बिंदु श्रावस्ती को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाए।
विधायक ने मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भी सौंपा। इस पर मुख्यमंत्री ने इन दोनों प्रस्तावों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया है।
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विधायक ने मुख्यमंत्री को बताया कि इकौना के ग्राम टड़वा महंत स्थित सीताद्वार में महर्षि वाल्मीकि आश्रम है। यहां सैकड़ों एकड़ में फैली सीताद्वार झील का कायाकल्प कर इसे ईको टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे न सिर्फ जिले का चहुंमुखी विकास होगा, बल्कि लवकुश की जन्मस्थली को अयोध्या की तर्ज पर पौराणिक पहचान भी मिलेगी। महाकवि कालीदास के रघुवंशम महाकाव्य में श्रावस्ती को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र लव की राजधानी बताई गई है। यही नहीं तथागत भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के सर्वाधिक 24 वर्षावास श्रावस्ती में बिताया। इसे जैन तीर्थंकर भगवान संभवनाथ की जन्मस्थली होने का भी गौरव हासिल है। ऐसे में श्रावस्ती की पहचान श्रीराम के गौरव का प्रतीक इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण के लिए श्रावस्ती विशेष विकास प्राधिकरण का गठन कर उसके तहत बौद्ध व रामायण सर्किट के केंद्र बिंदु श्रावस्ती को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाए।
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विधायक ने मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भी सौंपा। इस पर मुख्यमंत्री ने इन दोनों प्रस्तावों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया है।
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