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श्रावस्ती:पिता के बाद घायल बेटे ने भी तोड़ा दम, 10 माह के भीतर पिता व दोनों बेटों की मौत से गम में डूबा परिवार
Tue, 03 Nov 2026 08:13 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, (गिलौला) श्रावस्ती
अमर उजाला नेटवर्क, (गिलौला) श्रावस्ती
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 03 Nov 2026 08:13 PM IST
सार
टक्कर इतनी जोरदार थी कि पारसनाथ मौर्य की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज बहराइच ले जाया गया। जहां, इलाज के दौरान सुरेंद्र की भी मौत हो गई।
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घटना में मृत व विलाप करते परिजन।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
गिलौला के सिसवारा-गिलौला मार्ग पर तेज रफ्तार बोलेरो व ई रिक्शा की टक्कर में पिता की मौत के बाद रात में घायल बेटे ने भी दम तोड़ दिया। दो मौतों से घर में चीख-पुकार मच गई। मंगलवार को पिता-पुत्र के शवों को एक साथ जलाया गया। इस दौरान सभी की आंखें नम रहीं।
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गिलौला कस्बा निवासी पारसनाथ मौर्य (70) सोमवार देर शाम बेटे सुरेंद्र मौर्य (30) के साथ ई रिक्शा से जानकीनगर गए थे। वहां से वापस घर लौट रहे थे। इस दौरान सिसवारा-गिलौला मार्ग पर असवा के पास उनके ई रिक्शे से तेज रफ्तार बोलेरो टकरा गई।
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टक्कर इतनी जोरदार थी कि पारसनाथ मौर्य की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज बहराइच ले जाया गया। जहां, इलाज के दौरान सुरेंद्र की भी मौत हो गई। सुरेंद्र के मौत की सूचना से परिजनों में चीख पुकार मच गई। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव घर पहुंचे तो मौजूद सभी लोगों की आंख नम हो गई। पिता-पुत्र का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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10 माह के भीतर पिता व दो बेटों की मौत से गम में डूबा परिवार
सड़क हादसे में पिता-पुत्र की एक साथ हुई मौत से जहां कस्बे में मातम जैसा सन्नाटा दिखा तो वहीं लोग 10 माह में तीन-तीन मौतों की भी चर्चा करते दिखे। सभी रोते-बिलखते परिजनों को ढाढ़स बंधवाते दिखे। स्थानीय लोगों ने बताया कि मूल रूप से जानकीनगर खुर्द के रहने वाले पारसनाथ मौर्य 20 वर्ष पहले गिलौला बाजार आए थे और सब्जी की दुकान खोली थी।
सब्जी बेच कर उन्होंने पांच साल पहले राजकीय पशु चिकित्सालय के पास बौद्ध परिपथ के किनारे मकान बनवाया और परिवार के साथ यहीं रहने लगे। पारसनाथ के चार बेटे हरिश्चंद्र, शत्रुघ्न, मनीष व सुरेंद्र में से मनीष की 10 माह पहले हार्ट अटैक पड़ने से मौत हो गई थी। परिवार मनीष की मौत का सदमा भूले भी नहीं थे कि सोमवार को परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। हादसे में पारसनाथ व बेटे सुरेंद्र की मौत से परिवार टूट गया।
सुरेंद्र की पत्नी सुषमा देवी कुछ-कुछ देर पर अचेत होती रही। वहीं, चार वर्षीय बेटी आराध्या और तीन वर्षीय बेटा अनूप भी सभी को रोता देख पिता के बारे में पूछते रहे।
सब्जी बेच कर उन्होंने पांच साल पहले राजकीय पशु चिकित्सालय के पास बौद्ध परिपथ के किनारे मकान बनवाया और परिवार के साथ यहीं रहने लगे। पारसनाथ के चार बेटे हरिश्चंद्र, शत्रुघ्न, मनीष व सुरेंद्र में से मनीष की 10 माह पहले हार्ट अटैक पड़ने से मौत हो गई थी। परिवार मनीष की मौत का सदमा भूले भी नहीं थे कि सोमवार को परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। हादसे में पारसनाथ व बेटे सुरेंद्र की मौत से परिवार टूट गया।
सुरेंद्र की पत्नी सुषमा देवी कुछ-कुछ देर पर अचेत होती रही। वहीं, चार वर्षीय बेटी आराध्या और तीन वर्षीय बेटा अनूप भी सभी को रोता देख पिता के बारे में पूछते रहे।