फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shravasti News ›   Registration for farming, commercial use happening

खेती के लिए पंजीकरण, हो रहा व्यावसायिक उपयोग

Thu, 01 Sep 2022 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 11:48 PM IST
विज्ञापन
Registration for farming, commercial use happening
श्रावस्ती। जिले में खरीदे जाने वाले ट्रैक्टर का विभाग में केवल कृषि कार्य के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। जबकि उसका निजी व व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। इस कार्य में लगे लोग सरकार को क्षति पहुंचाने के साथ ही पंजीयन के नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं। इतना ही नहीं जिले में कॉमर्शियल उपयोग के लिए पंजीकृत सभी छह ट्रॉलियों पर लाखों रुपये का टैक्स बकाया होने के कारण उनका रोड पर चलना प्रतिबंधित किया गया है।
विज्ञापन

जिले में जुलाई तक कुल 11,411 टैक्टर का रजिस्ट्रेशन कराया गया है। इनके रजिस्ट्रेशन में वाहन स्वामियों द्वारा केवल कृषि कार्य के लिए दर्शा कर इसका पंजीयन करा लिया गया है। जिले में एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली का न तो निजी उपयोग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया गया है। और न ही उसका कॉमर्शियल उपयोग के लिए ही रजिस्ट्रेशन कराया गया है। ऐसे में जहां रजिस्ट्रेशन के नाम पर टैक्स की चोरी की गई।
विज्ञापन

वहीं व्यावसायिक पंजीयन के बाद दिए जाने वाले टैक्स की भी चोरी की जा रही है। जबकि देखा जाए तो जिले में स्थापित करीब 116 ईंट-भट्ठों में से अधिकांश भट्ठा संचालकों के पास दो से 10 तक ट्रैक्टर-ट्रॉली मौजूद हैं। जिनका उपयोग उपयोग ईंट ढुलाई के काम में लिया जा रहा है। इतना ही नहीं कोई भी ऐसा ईंट-भट्ठा नहीं है। जहां पांच से 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली पक्की ईंट व मिट्टी की ढुलाई के लिए संबंद्ध न हो। वहीं सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ऐसी भी हैं जिनके संचालकों द्वारा उनका उपयोग लकड़ी, बालू व मिट्टी सहित मौरंग गिट्टी आदि की ढु़लाई के लिए भाड़े पर किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे में केवल कृषि कार्य के रजिस्ट्रेशन कराकर जहां वाहन स्वामियों द्वारा प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का सरकार को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। वहीं उसका व्यवसायिक उपयोग कर रजिस्ट्रेशन की शर्तों की अवहेलना भी की जा रही है। जिले में देखा जाए तो मात्र छह ट्रॉली ही कॉमर्शिय उपयोग के लिए पंजीकृत है। जिन पर करीब पांच लाख रुपये का टैक्स बकाया है। ऐसे में स्वामियों द्वारा इनका मार्ग पर संचालन रोक दिया गया है। ताकि पकड़े जाने पर उसे सीज न किया जा सके।
रजिस्ट्रेशन व परमिट पर यह होता खर्चा
केवल कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर के रजिस्ट्रेशन की कोई फीस नहीं लगती। फाइनेंस कराने पर 1500 रुपये देना पड़ता है। वहीं ट्रॉली के रजिस्ट्रेशन के लिए 1500 फीस, 800 रुपये फिटनेस व 13 हजार रुपये पांच वर्ष के लिए परमिट का जमा करना पड़ता है। इसके साथ ही दो पहिया ट्राली पर 5358 रुपये, चौपहिया ट्राली पर 8037 रुपये एवं छह पहिया ट्राली पर 10716 रुपये वार्षिक टैक्स देना पड़ता है।

चलाया जा रहा अभियान
अभियान चलाकर ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को चिह्नित कराया जा रहा है। जिनका कृषि कार्य के लिए पंजीयन उपयोग किया जा रहा है। ऐसे सभी वाहनों को सीज किया जाएगा। -विनीत कुमार मिश्रा, उप संभागीय परिवहन अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed