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सात माह में बन जाएगी राप्ती योजक नहर
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श्रावस्ती में बनाई जा रही राप्ती योजक नहर।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। राप्ती योजक नहर सात माह में जिले में पूरी हो जाएगी। इस परियोजना के पूरा होते ही यह सरयू योजक राष्ट्रीय परियोजना से जुड़ जाएगी। इसके बाद श्रावस्ती में लगभग 48500 हेक्टेअर भूमि सिंचित हो सकेगी। वहीं चौदह अन्य जिलों को भी इस परियोजना का लाभ मिलेगा।
यह परियोजना जिले में मार्च 2020 में पूरी होनी है। अभी मुख्य नहर का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि साइफन व माइनर का निर्माण कराया जा रहा है। जिले में यह नहर 134 किलोमीटर है। जबकि इससे पूर्व 229 किलोमीटर नहरों का निर्माण पहले ही किया जा चुका था। वह भी इस परियोजना से जुड़ चुकी है।
अधिशासी अभियंता, सरयू नहर खंड छह/ नोडल अधिकारी अजय कुमार ने कहा कि कोशिश है कि मार्च 2020 तक जिले में राप्ती योजक नहर का कार्य पूरा हो जाएगा। इससे सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना लगभग पूरी हो जाएगी। इस परियोजना के पूरा होते ही श्रावस्ती ही नहीं पूर्वांचल के चौदह जिलों के खेतों को पानी मिलेगा।
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इन जिलों को मिलेगा लाभ
श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, पूर्वी कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर सहित 14 जिले को इस परियोजना का लाभ मिलना है। इन जिलों में 9349 किलोमीटर नहरें होंगी। इनसे 9250 किलोमीटर माइनर की शाखाएं गुजरेंगी। इससे हर खेत तक पानी पहुंच सकेगा। श्रावस्ती में ही इस नहर से 48500 हेक्टेअर व 14 जिलों को मिला कर 12 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी।
एक नजर में परियोजना
सरयू परियोजना में वर्ष 1982-1983 से कार्य प्रारंभ हुआ। यह परियोजना कई बार पुनरीक्षित की जा चुकी है । सरयू परियोजना को वर्ष 2012-2013 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। 10 फरवरी 2000 में इस परियोजना के तहत नहर का कार्य 9,205.00 किलोमीटर, नाले 9000 किमी. एवं नलकूप कार्य 3600 निर्माण किये जाने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2013 में इस परियोजना के तहत बस्ती में 299.83 किमी, संतकबीर नगर में 76-90 किमी, बहराइच में 219.94 किमी, गोरखपुर में 1976.09 किमी, बलरामपुर में 300.59 किमी, सिद्धार्थनगर में 905.51 किमी ड्रेन प्रस्तावित किया गया था। इसमें सरयू परियोजना कमांड में श्रावस्ती, गोंडा की स्थिति का उल्लेख नहीं था। ऐसी स्थिति में सरयू परियोजना के अंतर्गत प्रावधानित 9000 किमी ड्रेन के बाद वर्ष 2013 में श्रावस्ती, गोंडा को इस परियोजना में शामिल किया गया। 2014 में इस परियोजना के तहत ड्रेन की लंबाई में वृद्धि की गई।
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यह परियोजना जिले में मार्च 2020 में पूरी होनी है। अभी मुख्य नहर का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि साइफन व माइनर का निर्माण कराया जा रहा है। जिले में यह नहर 134 किलोमीटर है। जबकि इससे पूर्व 229 किलोमीटर नहरों का निर्माण पहले ही किया जा चुका था। वह भी इस परियोजना से जुड़ चुकी है।
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अधिशासी अभियंता, सरयू नहर खंड छह/ नोडल अधिकारी अजय कुमार ने कहा कि कोशिश है कि मार्च 2020 तक जिले में राप्ती योजक नहर का कार्य पूरा हो जाएगा। इससे सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना लगभग पूरी हो जाएगी। इस परियोजना के पूरा होते ही श्रावस्ती ही नहीं पूर्वांचल के चौदह जिलों के खेतों को पानी मिलेगा।
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इन जिलों को मिलेगा लाभ
श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, पूर्वी कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर सहित 14 जिले को इस परियोजना का लाभ मिलना है। इन जिलों में 9349 किलोमीटर नहरें होंगी। इनसे 9250 किलोमीटर माइनर की शाखाएं गुजरेंगी। इससे हर खेत तक पानी पहुंच सकेगा। श्रावस्ती में ही इस नहर से 48500 हेक्टेअर व 14 जिलों को मिला कर 12 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी।
एक नजर में परियोजना
सरयू परियोजना में वर्ष 1982-1983 से कार्य प्रारंभ हुआ। यह परियोजना कई बार पुनरीक्षित की जा चुकी है । सरयू परियोजना को वर्ष 2012-2013 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। 10 फरवरी 2000 में इस परियोजना के तहत नहर का कार्य 9,205.00 किलोमीटर, नाले 9000 किमी. एवं नलकूप कार्य 3600 निर्माण किये जाने का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2013 में इस परियोजना के तहत बस्ती में 299.83 किमी, संतकबीर नगर में 76-90 किमी, बहराइच में 219.94 किमी, गोरखपुर में 1976.09 किमी, बलरामपुर में 300.59 किमी, सिद्धार्थनगर में 905.51 किमी ड्रेन प्रस्तावित किया गया था। इसमें सरयू परियोजना कमांड में श्रावस्ती, गोंडा की स्थिति का उल्लेख नहीं था। ऐसी स्थिति में सरयू परियोजना के अंतर्गत प्रावधानित 9000 किमी ड्रेन के बाद वर्ष 2013 में श्रावस्ती, गोंडा को इस परियोजना में शामिल किया गया। 2014 में इस परियोजना के तहत ड्रेन की लंबाई में वृद्धि की गई।