{"_id":"5fccf8df8ebc3ecfe546f205","slug":"rajbaha-and-kulabs-are-flying-sand-srawasti-news-lko5535002153","type":"story","status":"publish","title_hn":"रजबहा व कुलाबों में उड़ रही रेत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रजबहा व कुलाबों में उड़ रही रेत
विज्ञापन
तुलसीपुर (श्रावस्ती)। गेहूं की बोआई कर चुके किसान अब सिंचाई के लिए परेशान हैं। नहरें लबालब होने के बावजूद अब तक रजबहा व कुलाबों में पानी नहीं छोड़ा गया। इसके चलते उनमें रेत उड़ रही है। जिसे देख किसान परेशान हैं। इसकी शिकायत के बावजूद अधिकारियों के ध्यान न देने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
दिसंबर का पहला सप्ताह बीत चुका है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग की ओर से अब तक रजबहा, कुलाबों में पानी नहीं छोड़ा गया। जबकि मुख्य नहर पानी से लबालब हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह व नवंबर के प्रथम पखवारे में गेहूं की बोआई कर चुके किसान अब सिंचाई के लिए परेशान हैं।
रजबहा व कुलाबों में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण नहर किनारे स्थित खेतों में सिंचाई के लिए किसानों को पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति जमुनहा तहसील क्षेत्र के ग्राम अडऱाई गांव के निकट देखने को मिली। जहां मुख्य सरयू नहर खंड नानपारा में तो पानी छोड़ा गया है।
विज्ञापन
लेकिन सरयू नहर के पास से गुजरे ददौरा रजवाहा व तुलसीपुर रजवाहा में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया। जबकि इन्हीं रजबहों में आने वाले पानी से किसान अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। यही स्थिति गिलौला, इकौना व सोनवा क्षेत्र की भी है। जहां रजबहा व माइनर में पानी न होने के कारण नहर के आसपास के किसान परेशान होकर महंगे दामों में डीजल खरीद कर गेहूं की सिंचाई करने को विवश हैं।
अडऱाई निवासी किसान अमजद अली बताते हैं कि उनका खेत नहर से सटा हुआ है। अगर नहर में पानी छोड़ दिया जाता तो गेहूं की सिंचाई हो जाती। गुड्डू यादव ने कहा कि रजवाहा में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण किसानों को गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिससे लागत बढ़ रही है।
ऐसा ही कहना त्रिभवन वर्मा का भी है। जिनका मानना है कि यदि नहर में पानी छोड़ दिया जाता तो डीजल के पैसे बच जाते। और खेतों की अच्छी ढंग से सिंचाई भी हो जाती। इस बारे में अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडे ने बताया कि नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही रजबहा व माइनरों में भी पानी छोड़ा जाएगा।
विज्ञापन
दिसंबर का पहला सप्ताह बीत चुका है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग की ओर से अब तक रजबहा, कुलाबों में पानी नहीं छोड़ा गया। जबकि मुख्य नहर पानी से लबालब हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह व नवंबर के प्रथम पखवारे में गेहूं की बोआई कर चुके किसान अब सिंचाई के लिए परेशान हैं।
विज्ञापन
रजबहा व कुलाबों में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण नहर किनारे स्थित खेतों में सिंचाई के लिए किसानों को पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति जमुनहा तहसील क्षेत्र के ग्राम अडऱाई गांव के निकट देखने को मिली। जहां मुख्य सरयू नहर खंड नानपारा में तो पानी छोड़ा गया है।
विज्ञापन
लेकिन सरयू नहर के पास से गुजरे ददौरा रजवाहा व तुलसीपुर रजवाहा में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया। जबकि इन्हीं रजबहों में आने वाले पानी से किसान अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। यही स्थिति गिलौला, इकौना व सोनवा क्षेत्र की भी है। जहां रजबहा व माइनर में पानी न होने के कारण नहर के आसपास के किसान परेशान होकर महंगे दामों में डीजल खरीद कर गेहूं की सिंचाई करने को विवश हैं।
अडऱाई निवासी किसान अमजद अली बताते हैं कि उनका खेत नहर से सटा हुआ है। अगर नहर में पानी छोड़ दिया जाता तो गेहूं की सिंचाई हो जाती। गुड्डू यादव ने कहा कि रजवाहा में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण किसानों को गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए पंपिंग सेटों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिससे लागत बढ़ रही है।
ऐसा ही कहना त्रिभवन वर्मा का भी है। जिनका मानना है कि यदि नहर में पानी छोड़ दिया जाता तो डीजल के पैसे बच जाते। और खेतों की अच्छी ढंग से सिंचाई भी हो जाती। इस बारे में अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडे ने बताया कि नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्द ही रजबहा व माइनरों में भी पानी छोड़ा जाएगा।