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बारिश और तेज हवा ने बढ़ाई ठंड
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खैरीमोड़ के निकट भिनगा बहराइच मार्ग पर व्याप्त जलभराव।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। तराई में बुधवार रात को मौसम अचानक बदल गया। देर रात शुरू हुई बूंदाबांदी रुक रुक कर गुरुवार को भी पूरे दिन जारी रही। बारिश के साथ चल रही तेज हवा ने जिले में ठंड का सितम भी बढ़ा दिया है। वहीं सड़क पर फिसलन की समस्या उत्पन्न हो गई। इससे दिन भर लोग घरों में ही कैद रहे। उधर जरूरी काम से निकले लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।
तराई का मौसम बुधवार रात अचानक बदल गया। देर रात समूचे जिले में शुरू हुई बूंदाबांदी गुरुवार को भी दिन भर रुक रुक कर जारी रही। इसके चलते मौसम अचानक ठंडा हो गया। इसके साथ ही लगातार चल रही बर्फीली हवा ने ठिठुरन बढ़ा दी है। इससे मौसम का पारा ढाई डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस बूंदाबांदी का भले ही गेहूं की फसलों पर कोई प्रभाव न पड़ा हो, लेकिन मार्गों पर कीचड़ व फिसलन की समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
तराई में खराब मौसम के कारण चाहे बाजार हो या मार्ग सूने सूने नजर आए। वहीं विद्यालय खुला होने के बावजूद बच्चे स्कूल जाने से कतराते देखे गए। जिले पड़ने वाली कड़ाके की ठंड के बीच अलाव की आंच पूरी तरह से ठंडी पड़ चुकी है। अलाव नहीं जलने के कारण नगरीय क्षेत्रों में लोगों को ठंड से कांपते देखा गया। लोग ठंड से बचने के लिए घरों में अलाव आदि का सहारा लेने को विवश रहे।
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इस बारे में फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के मौसम विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. एमबी सिंह ने बताया कि तापमान में अभी उतार चढ़ाव का क्रम जारी रहेगा। शुक्रवार को भी कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बरसात की संभावना जताई जा रही है।
गेहूं को फायदा तो अन्य फसलें हो सकतीं हैं प्रभावित
बुधवार रात से ही लगातार हो रही बरसात से गेहूं के किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। उनकी फसलों को मुफ्त में पानी मिल रहा है। इसके चलते उनकी लागत कम हो जाएगी। वहीं आलू, सरसों व अन्य दलहनी फसलों की खेती करने वाले किसानों के चेहरों पर सिकन देखने को मिल रही है। इसका कारण बरसात का पानी खेतों में जमा होने के कारण आलू में सड़न व झुलसा रोग होने की संभावना है। वहीं दलहनी व तिलहनी फसलों में भी कीटों के लगने का खतरा बढ़ गया है। इससे उत्पादकता पर भी असर पड़ेगा।
फसलें बचाने के लिए करें उपाय
बरसात से आलू, राई सरसों, मसूर, तोरिया, चना, मटर व अलसी की फसल को नुकसान है। इसके साथ ही अरहर में फली छेदक कीट बढ़ने की संभावना बढ़ी है। इसके लिए नीम आयल 250 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से एक हजार लीटर पानी में घोल डाल कर छिड़काव करें। मटर के लिए डाउनीमिलिड्यू 800-1000 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। घुलनशील सल्फर तीन किलोग्राम प्रति हेक्टर में प्रयोग करें। आलू को झुलसा से बचाने के लिए माइकोजेल 75 प्रतिशत 2.50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर में इस्तेमाल किया जा सकता है। माहू के लिए क्लोरोपायरीफास का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है। - आरपी राना, उप निदेशक कृषि
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तराई का मौसम बुधवार रात अचानक बदल गया। देर रात समूचे जिले में शुरू हुई बूंदाबांदी गुरुवार को भी दिन भर रुक रुक कर जारी रही। इसके चलते मौसम अचानक ठंडा हो गया। इसके साथ ही लगातार चल रही बर्फीली हवा ने ठिठुरन बढ़ा दी है। इससे मौसम का पारा ढाई डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस बूंदाबांदी का भले ही गेहूं की फसलों पर कोई प्रभाव न पड़ा हो, लेकिन मार्गों पर कीचड़ व फिसलन की समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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तराई में खराब मौसम के कारण चाहे बाजार हो या मार्ग सूने सूने नजर आए। वहीं विद्यालय खुला होने के बावजूद बच्चे स्कूल जाने से कतराते देखे गए। जिले पड़ने वाली कड़ाके की ठंड के बीच अलाव की आंच पूरी तरह से ठंडी पड़ चुकी है। अलाव नहीं जलने के कारण नगरीय क्षेत्रों में लोगों को ठंड से कांपते देखा गया। लोग ठंड से बचने के लिए घरों में अलाव आदि का सहारा लेने को विवश रहे।
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इस बारे में फसल अनुसंधान केंद्र बहराइच के मौसम विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. एमबी सिंह ने बताया कि तापमान में अभी उतार चढ़ाव का क्रम जारी रहेगा। शुक्रवार को भी कहीं तेज तो कहीं रिमझिम बरसात की संभावना जताई जा रही है।
गेहूं को फायदा तो अन्य फसलें हो सकतीं हैं प्रभावित
बुधवार रात से ही लगातार हो रही बरसात से गेहूं के किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। उनकी फसलों को मुफ्त में पानी मिल रहा है। इसके चलते उनकी लागत कम हो जाएगी। वहीं आलू, सरसों व अन्य दलहनी फसलों की खेती करने वाले किसानों के चेहरों पर सिकन देखने को मिल रही है। इसका कारण बरसात का पानी खेतों में जमा होने के कारण आलू में सड़न व झुलसा रोग होने की संभावना है। वहीं दलहनी व तिलहनी फसलों में भी कीटों के लगने का खतरा बढ़ गया है। इससे उत्पादकता पर भी असर पड़ेगा।
फसलें बचाने के लिए करें उपाय
बरसात से आलू, राई सरसों, मसूर, तोरिया, चना, मटर व अलसी की फसल को नुकसान है। इसके साथ ही अरहर में फली छेदक कीट बढ़ने की संभावना बढ़ी है। इसके लिए नीम आयल 250 लीटर प्रति हेक्टेअर की दर से एक हजार लीटर पानी में घोल डाल कर छिड़काव करें। मटर के लिए डाउनीमिलिड्यू 800-1000 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें। घुलनशील सल्फर तीन किलोग्राम प्रति हेक्टर में प्रयोग करें। आलू को झुलसा से बचाने के लिए माइकोजेल 75 प्रतिशत 2.50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर में इस्तेमाल किया जा सकता है। माहू के लिए क्लोरोपायरीफास का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकती है। - आरपी राना, उप निदेशक कृषि