{"_id":"621d0b5bb20d4f37561c858c","slug":"political-parties-engaged-in-post-poll-multiplication-math-srawasti-news-lko6197303180","type":"story","status":"publish","title_hn":"मतदान के बाद के गुणा गणित में लगे राजनीतिक दल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मतदान के बाद के गुणा गणित में लगे राजनीतिक दल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रावस्ती। पांचवें चरण का चुनाव जिले में संपन्न हो गया। दोनों विधानसभा सीटों पर 60 फीसदी का आंकड़ा छूते-छूते रह गया। मतदान के दूसरे दिन सोमवार को भाजपा प्रत्याशियों के खेमे में हलचल रही। प्रत्याशी संगठन के साथ बैठे रहे तो भिनगा में बसपा सहित अन्य दलों का शटर गिर गया। प्रत्याशी महीनों की नींद पूरी करने के लिए घर जा चुके थे।
विधानसभा चुनाव का पांचवां पड़ाव जिले में पूरा हो गया। भिनगा व श्रावस्ती विधानसभा सीट पर 60 फीसदी मतदान का आंकड़ा छूते-छूते रह गया। दोनों सीटों पर इस बार वोट प्रतिशत कम रहा। लेकिन राजनीतिक दलों में उल्लास व मतदान के बाद की गुणा गणित के लिए हलचल बना रहा।
भिनगा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी पदम सेन चौधरी जिला महामंत्री दिवाकर शुक्ल, रमन सिंह, रणबीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष रंजय कैराती सहित अन्य समर्थकों के साथ मतदान की गुणा गणित करते देखे गए। किस क्षेत्र में किस ट्रेंड पर मतदान हुआ। कहां पर किस जाति का मतदान के दिन दबदबा रहा। इसकी पड़ताल प्रत्याशी बूथ वार कर रहे थे। सभी की निगाहें अनुसूचित जाति वोटरों की ओर थी। गुणा गणित इस पर बैठाया जा रहा था कि भाजपा को इस बार अनुसूचित जाति के अधिकांश मत मिले। लेकिन यह आंकड़ा कितने फीसदी पहुंचा। इसको लेकर चर्चा थी। इस चर्चा में प्रत्याशी सहित उनके समर्थक इस निष्कर्ष पर थे कि उन्हें भाजपा के परंपरागत वोट जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग, सभी सामान्य वर्ग जिसमें ब्राह्मण क्षत्रिय व कायस्थ शामिल थे।
विज्ञापन
इसके साथ ही पिछड़ी जातियों में कुर्मी का आधा से अधिक व कुछ यादव का भी समर्थन मिला है। वहीं सपा के खेमे में मुस्लिम यादव व कुर्मी वोटरों को लेकर गुणा गणित की जा रही थी। सबसे अधिक दांव इस बात का था कि कुर्मी वोटर उनके पक्ष में कितने हैं व भाजपा के खेमे में कितने चले गए। जबकि इस सीट पर बसपा उम्मीदवार अलीमुद्दीन के चुनाव कार्यालय का शटर गिरा हुआ था। यही स्थिति श्रावस्ती सीट पर भी देखने को मिली। भाजपा उम्मीदवार रामफेरन पांडे के आवास पर चुनावी गुणा गणित व पड़े मतों के बीच अपने मत का अंदाजा लगाया जा रहा था। यहां भी बसपा व कांग्रेस को मिले मत के आधार पर जीत के आंकड़े बुने जा रहे थे।
यहां भी यह माना गया कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी हाजी मोहम्मद रमजान 10 हजार से अधिक मुस्लिम मतों का आंकड़ा पार करते हैं तो निर्णय भाजपा की ओर होगा। लेकिन यदि उनकी संख्या इसके नीचे होती है तो जीत का आंकड़ा सपा प्रत्याशी असलम रायनी की ओर जाएगा। जबकि बसपा प्रत्याशी नीतू मिश्रा के खेमे में दलित ब्राह्मण व कुछ मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन की चर्चा थी। वह भी इस महासंग्राम में अपने आप को विजेता की श्रेणी में रखे हुए हैं। लेकिन इस विधानसभा सीट पर सभी का मानना था कि मुकाबला त्रिकोणात्मक हुआ है। नतीजा चौंकाने वाला होगा।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव का पांचवां पड़ाव जिले में पूरा हो गया। भिनगा व श्रावस्ती विधानसभा सीट पर 60 फीसदी मतदान का आंकड़ा छूते-छूते रह गया। दोनों सीटों पर इस बार वोट प्रतिशत कम रहा। लेकिन राजनीतिक दलों में उल्लास व मतदान के बाद की गुणा गणित के लिए हलचल बना रहा।
विज्ञापन
भिनगा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी पदम सेन चौधरी जिला महामंत्री दिवाकर शुक्ल, रमन सिंह, रणबीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष रंजय कैराती सहित अन्य समर्थकों के साथ मतदान की गुणा गणित करते देखे गए। किस क्षेत्र में किस ट्रेंड पर मतदान हुआ। कहां पर किस जाति का मतदान के दिन दबदबा रहा। इसकी पड़ताल प्रत्याशी बूथ वार कर रहे थे। सभी की निगाहें अनुसूचित जाति वोटरों की ओर थी। गुणा गणित इस पर बैठाया जा रहा था कि भाजपा को इस बार अनुसूचित जाति के अधिकांश मत मिले। लेकिन यह आंकड़ा कितने फीसदी पहुंचा। इसको लेकर चर्चा थी। इस चर्चा में प्रत्याशी सहित उनके समर्थक इस निष्कर्ष पर थे कि उन्हें भाजपा के परंपरागत वोट जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग, सभी सामान्य वर्ग जिसमें ब्राह्मण क्षत्रिय व कायस्थ शामिल थे।
विज्ञापन
इसके साथ ही पिछड़ी जातियों में कुर्मी का आधा से अधिक व कुछ यादव का भी समर्थन मिला है। वहीं सपा के खेमे में मुस्लिम यादव व कुर्मी वोटरों को लेकर गुणा गणित की जा रही थी। सबसे अधिक दांव इस बात का था कि कुर्मी वोटर उनके पक्ष में कितने हैं व भाजपा के खेमे में कितने चले गए। जबकि इस सीट पर बसपा उम्मीदवार अलीमुद्दीन के चुनाव कार्यालय का शटर गिरा हुआ था। यही स्थिति श्रावस्ती सीट पर भी देखने को मिली। भाजपा उम्मीदवार रामफेरन पांडे के आवास पर चुनावी गुणा गणित व पड़े मतों के बीच अपने मत का अंदाजा लगाया जा रहा था। यहां भी बसपा व कांग्रेस को मिले मत के आधार पर जीत के आंकड़े बुने जा रहे थे।
यहां भी यह माना गया कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी हाजी मोहम्मद रमजान 10 हजार से अधिक मुस्लिम मतों का आंकड़ा पार करते हैं तो निर्णय भाजपा की ओर होगा। लेकिन यदि उनकी संख्या इसके नीचे होती है तो जीत का आंकड़ा सपा प्रत्याशी असलम रायनी की ओर जाएगा। जबकि बसपा प्रत्याशी नीतू मिश्रा के खेमे में दलित ब्राह्मण व कुछ मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन की चर्चा थी। वह भी इस महासंग्राम में अपने आप को विजेता की श्रेणी में रखे हुए हैं। लेकिन इस विधानसभा सीट पर सभी का मानना था कि मुकाबला त्रिकोणात्मक हुआ है। नतीजा चौंकाने वाला होगा।