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दूसरे के काम को अपना बता पैसा निकाल रहा पैक्सफेड
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श्रावस्ती के गिलौला स्थित माडल आंगनबाड़ी केंद्र औरैया निधान
- फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। आंगनबाड़ी विकास का कार्य कोई कर रहा है। लेकिन उसका पैसा पैक्सफेड संस्था निकाल रही है। यही नहीं पहले से विकसित आंगनबाड़ी केंद्र को मनमाने तरीके से अपनी सूची में शामिल करके सीएसआर का पैसा खर्च करने का आरोप संस्था पर लगा है। इन आरोपों की जांच में पुष्टि भी हुई है।
अति पिछड़ा जिला होने के कारण यहां पर सीएसआर सहित कई अन्य तरीके के फंड आते हैं। इससे स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों का पुनरुद्धार किया जाता है। जिले में कुछ ऐसी संस्थाएं कार्यरत हैं जो अपने फंड से इस तरह का विकासात्मक कार्य स्वयं कराती हैं। लेकिन कुछ ऐसी भी संस्थाएं हैं जो दूसरों के कार्य में अपना नाम लिख कर भुगतान करा रही हैं। ऐसा ही मामला सीडीओ ईशान प्रताप सिंह के सामने आया है। सेव द चिल्ड्रेन ने गिलौला के प्राथमिक विद्यालय
औरया निधान में स्थित आंगनबाड़ी भवन के मरम्मत सहित अन्य कार्य कराया था। लेकिन पैक्सफेड संस्था द्वारा उस पर अपना लोगो व पेंट लगा कर सीएसआर के अंतर्गत दी गई राशि से मरम्मत कार्य दिखा कर पैसा निकालने के लिए प्रस्तुत किया गया।
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इस मामले की जब जांच सीडीओ ने कराई तो पैक्सफेड द्वारा किए गए कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। आंगनबाड़ी केंद्र औरैया निधान में संस्था सेव द चिल्ड्रेन द्वारा आंगनबाड़ी कक्षा के चारों दिवारों की वाल पेंटिंग एएलएम किट, हाइजिंग किट विथ जीबर बैग फर्स्ट एड किट, बुक सेफ, शीशा झूला व रॉकिंग चेयर्स दिया गया था। जबकि यहां फ्लोर टॉइल्स एवं शौचालय सीट लगाने का कार्य पूर्व प्रधान ने ही कराया था। अब यहां कोई भी कार्य अवशेष नहीं था। इसके बावजूद पैक्सफेड ने बिना किसी को सूचना दिए मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में औरैया निधान में कुछ मनमाने तरीके से कार्य जिसमें वायरिंग, किचेन, बरामदे में टायल्स का कार्य करना दर्शाया गया। जबकि जांच के दौरान वाल टॉइल्स नहीं पाई गई। किचेन में बने प्लेट फार्म पर टाइल्स नहीं थी। इसके साथ ही अन्य कार्य जो इस्टीमेट में प्राविधानिक थे। वह भी नहीं कराए गए।
पैक्सफेड द्वारा जो झूला लगाया गया है वह इतना मानकविहीन है कि बच्चे इसमें दुर्घटना ग्रस्त हो रहे हैं। यही नहीं इस आंगनबाड़ी केंद्र पर उसे टिफिन की आपूर्ति करनी थी। इसकी जगह में एक खाने का कैशरोल दिया गया है। पूरी जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि पैक्सफेड ने सेव द चिल्ड्रेन द्वारा कराए गए कार्य को अपना दिखाते हुए अपना नाम अंकित किया गया है। यही नहीं सेव द चिलड्रेन द्वारा किए गए कार्य का साक्ष्य मिटाने के लिए बाद में पुताई करा दिया गया। ऐसे में जांच टीम ने अपने निष्कर्ष में पाया कि पैक्सफेड द्वारा वाल पेंटिग का कार्य कराए बिना ही अपना दिखाना अनियमितता की श्रेणी में आता है।
वर्जन
औरैया निधान में कुल चार लाख रुपये का कार्य होना था। इसमें से कुछ कार्य सेव द चिल्ड्रेन द्वारा किया गया। पैक्सफेड का मात्र एक लाख 38 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। जो कार्य उन्होंने कराया था।
-ईशान प्रताप सिंह, सीडीओ
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अति पिछड़ा जिला होने के कारण यहां पर सीएसआर सहित कई अन्य तरीके के फंड आते हैं। इससे स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों का पुनरुद्धार किया जाता है। जिले में कुछ ऐसी संस्थाएं कार्यरत हैं जो अपने फंड से इस तरह का विकासात्मक कार्य स्वयं कराती हैं। लेकिन कुछ ऐसी भी संस्थाएं हैं जो दूसरों के कार्य में अपना नाम लिख कर भुगतान करा रही हैं। ऐसा ही मामला सीडीओ ईशान प्रताप सिंह के सामने आया है। सेव द चिल्ड्रेन ने गिलौला के प्राथमिक विद्यालय
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औरया निधान में स्थित आंगनबाड़ी भवन के मरम्मत सहित अन्य कार्य कराया था। लेकिन पैक्सफेड संस्था द्वारा उस पर अपना लोगो व पेंट लगा कर सीएसआर के अंतर्गत दी गई राशि से मरम्मत कार्य दिखा कर पैसा निकालने के लिए प्रस्तुत किया गया।
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इस मामले की जब जांच सीडीओ ने कराई तो पैक्सफेड द्वारा किए गए कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। आंगनबाड़ी केंद्र औरैया निधान में संस्था सेव द चिल्ड्रेन द्वारा आंगनबाड़ी कक्षा के चारों दिवारों की वाल पेंटिंग एएलएम किट, हाइजिंग किट विथ जीबर बैग फर्स्ट एड किट, बुक सेफ, शीशा झूला व रॉकिंग चेयर्स दिया गया था। जबकि यहां फ्लोर टॉइल्स एवं शौचालय सीट लगाने का कार्य पूर्व प्रधान ने ही कराया था। अब यहां कोई भी कार्य अवशेष नहीं था। इसके बावजूद पैक्सफेड ने बिना किसी को सूचना दिए मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में औरैया निधान में कुछ मनमाने तरीके से कार्य जिसमें वायरिंग, किचेन, बरामदे में टायल्स का कार्य करना दर्शाया गया। जबकि जांच के दौरान वाल टॉइल्स नहीं पाई गई। किचेन में बने प्लेट फार्म पर टाइल्स नहीं थी। इसके साथ ही अन्य कार्य जो इस्टीमेट में प्राविधानिक थे। वह भी नहीं कराए गए।
पैक्सफेड द्वारा जो झूला लगाया गया है वह इतना मानकविहीन है कि बच्चे इसमें दुर्घटना ग्रस्त हो रहे हैं। यही नहीं इस आंगनबाड़ी केंद्र पर उसे टिफिन की आपूर्ति करनी थी। इसकी जगह में एक खाने का कैशरोल दिया गया है। पूरी जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि पैक्सफेड ने सेव द चिल्ड्रेन द्वारा कराए गए कार्य को अपना दिखाते हुए अपना नाम अंकित किया गया है। यही नहीं सेव द चिलड्रेन द्वारा किए गए कार्य का साक्ष्य मिटाने के लिए बाद में पुताई करा दिया गया। ऐसे में जांच टीम ने अपने निष्कर्ष में पाया कि पैक्सफेड द्वारा वाल पेंटिग का कार्य कराए बिना ही अपना दिखाना अनियमितता की श्रेणी में आता है।
वर्जन
औरैया निधान में कुल चार लाख रुपये का कार्य होना था। इसमें से कुछ कार्य सेव द चिल्ड्रेन द्वारा किया गया। पैक्सफेड का मात्र एक लाख 38 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। जो कार्य उन्होंने कराया था।
-ईशान प्रताप सिंह, सीडीओ