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खेत में सड़ने लगी धान की फसल, किसान बेहाल

Thu, 21 Oct 2021 10:39 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 10:39 PM IST
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Paddy crop started rotting in the field, farmers are helpless
टिकुइया जाने वाले मार्ग पर बह रहा बाढ़ का पानी व आते जाते लोग - फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। बाढ़ के कारण फसल अब खेतों में ही सड़ने लगी है। गुरुवार किसान कई स्थानों पर मलबे के रूप में फसल को उठाते हुए देखे गए। वहीं पांचवें दिन भी राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर रही। जिसके चलते किसानों में बेचैनी है।
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बरसात के बाद राप्ती नदी में आई बाढ़ से किसान पहले से ही परेशान था। लेकिन लगातार पांच दिनों से खेत में ही फसल कट कर पड़ी रहने के कारण अब वह सड़ने लगी है। गुरुवार को जमुनहा क्षेत्र में कई स्थानों पर किसान कटी फसल को मलबे के रूप में निकालते हुए दिखाई दिए। यही नहीं किसानों का दावा है कि बाढ़ के कारण उनकी कटी हुई फसल लगभग 50 फीसदी बह गई है। केवल वही फसल बच पाई है, जिसके ऊपर बाढ़ के साथ आया मलबा पट गया था। अब वह मलबे से फसल निकाल रहे हैं।
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ऐसे ही जमुनहा के किसान दयराम का दावा है कि बाढ़ के पानी के साथ कटी फसल बह गई थी। जो फसल काटी नहीं गई थी वह बाढ़ के साथ आए मलबे में दबी है। जिसे अब काट कर निकाला जा रहा है। यह मलबा फसल निकालने से पहले सूख गया तो फसल जमीन के नीचे दब कर रह जाएगी। ऐसी ही स्थिति इकौना में राप्ती नदी के तटीय इलाकों में देखने को मिली। जमुनहा इकौना व हरिहरपुररानी के आंशिक वह इलाके जहां राप्ती नदी का प्रभाव है। वहां की फसल 75 फीसदी से अधिक नष्ट हो चुकी है। जबकि जो फसल खड़ी थी वह नदी के गाद से पटी पड़ी है।
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जलस्तर नहीं हो रहा कम
बुधवार देर रात राप्ती नदी का जलस्तर 128.45 मीटर नापा गया। रात 11 बजे तक यही स्थिति बनी रही। लेकिन गुरुवार सुबह राप्ती का जलस्तर 128 मीटर रहा। पूरे दिन राप्ती की यही स्थिति रही। ऐसे में देखा जाए तो राप्ती नदी औसतन 30 से 40 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

बाढ़ व जलभराव के कारण किसानों को नुकसान हुआ है। इसका मूल्यांकन किया जा रहा है। जल्द ही मूल्यांकन कर किसानों को मुआवजा व अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। -कमल कटियार, उप कृषि निदेशक
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