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अब दिग्गज बिछा रहे जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बिसात

Thu, 06 May 2021 10:01 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 06 May 2021 10:01 PM IST
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Now the veteran is laying the board for the post of District Panchayat President
श्रावस्ती। जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर अब जिले के दिग्गजों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसमें भाजपा की ओर से दो नामों तो सपा की ओर से एक नाम की चर्चा है। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा के संभावित उम्मीदवार सत्ता की हनक तो सपा अपने जातीय समीकरण को आधार मान रही है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए अब जिले में गुणा गणित तेज हो गई है। इस पद के लिए जिले में अभी तक तीन नामों की चर्चा शुरू हुई है। इसमें भाजपा की ओर से पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, मंडल में सबसे कम उम्र का जिला पंचायत सदस्य देव प्रताप सिंह का नाम चर्चा में है। जबकि सपा की ओर से भी अध्यक्ष पद के लिए अपनी गुणा गणित लगाई जा रही है। सपा की ओर से संभावना है कि जिला पंचायत सदस्य बने इंद्र बहादुर यादव को आगे किया जाएगा। इसी संभावनाओं को लेकर उनके नाम की चर्चा शुरू हुई है। लेकिन यह पद आसानी से किसी भी के खाते में जाने वाला नहीं है। इसका कारण है कि भाजपा के समर्थन से केवल चार प्रत्याशी ही जीत कर आए हैं।
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इसमें से स्वयं पूर्व सांसद दद्दन मिश्र, विशंभर श्रीवास्तव, प्रभात वर्मा व अंशू सिंह का नाम शामिल है। अंशू सिंह जिला महामंत्री रणबीर सिंह की पुत्रवधू हैं। इसके अतिरिक्त 22 जिला पंचायत सदस्यों में तीन सदस्य अल्प संख्यक समुदाय से हैं व तीन सदस्य यादव व दो कुर्मी वर्ग से आते हैं। जिन पर सपा अपना दावा ठोक रही है। ऐसे में यदि सपा के दावों को माना जाए तो अल्पसंख्यक के साथ साथ यादव व कुर्मी अपने साथ होने का दावा कर रहे हैं। जबकि भाजपा भी अपने साथ अनुसूचित जाति पार्टी समर्थन से जीते प्रत्याशी के साथ व्यक्तिगत व्यवहार व सत्ता की हनक को मिलाकर अपना दावा प्रस्तुत कर रहा है। यह बात और है कि भाजपा अपनी आंतरिक गुटबाजी के कारण पहले ही नुकसान में है।
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इकौना क्षेत्र से भाजपा विधायक होने के बावजूद एक भी पार्टी समर्थित उम्मीदवार जीत कर नहीं आया। वहीं जो भी जीत कर आया वह अपने दम पर आया। ऐसे में अध्यक्षीय गुणा गणित में गुटबाजी साफ तौर पर दिखाई दे रही है। एक तरफ जहां भाजपा का एक गुट आंतरिक रूप से सपा के खेमे में खड़ा दिखाई दे रहा है तो कुछ भाजपा समर्थन से जीते उम्मीदवार भी अभी प्रत्याशी घोषित होने के इंतजार में हैं। यदि प्रत्याशी उनके अनुकूल नहीं रहा तो वह भी भाजपा को छोड़ कर खेमा बदलने में पीछे नहीं रहेंगे। ऐसे में यदि पार्टी ने सोच समझ कर व निर्विवादित व्यक्ति को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया तो यह भी संभव है कि सत्ता पक्ष होने के बावजूद भाजपा का एक बड़ा गुट आंतरिक रूप से विपक्ष के खेमें में खड़ा दिखाई दे। भाजपा व सपा की स्थिति अध्यक्ष को लेकर क्या बनेगी इसका फैसला तो दो एक दिन में भाजपा द्वारा जारी प्रत्याशी समर्थित सूची से ही हो जाएगा।
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