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Shravasti News: 123 वर्ष के इतिहास में भिनगा में तीसरी बार नहीं मिला किसी को मौका
Fri, 21 Apr 2023 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 21 Apr 2023 11:17 PM IST
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आरक्षण बनी बाधा नहीं तो पांचवी बार इकौना में होता निवर्तमान अध्यक्ष परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। नोटिफाइड एरिया से नगर पालिका परिषद तक के भिनगा के सफर मे किसी भी अध्यक्ष को तीसरी बार सत्ता नहीं मिली। वहीं नगर पंचायत इकौना के 48 वर्ष के इतिहास में यदि आरक्षण खेल न बिगाड़ता तो निवर्तमान अध्यक्ष का परिवार पांचवी बार मैदान में होता।
1899 में नोटिफाइड एरिया बनी भिनगा में पहली बार 1901 में मतदान कराया गया। तब पहली बार महेंद्र विक्रम सिंह अध्यक्ष बने। बाद में 1988 में नगर पंचायत और वर्ष 2017 में नगर पालिका परिषद बनी। इस बीच 123 वर्ष में कभी भी भिनगा में अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित नहीं हुआ। न ही भिनगा वासियों ने कभी किसी महिला को अपना प्रतिनिधि ही चुना। इतना ही नहीं यहां किसी को भी तीसरी बार अध्यक्ष की कुर्सी नसीब नहीं हुई। पहली बार मोहम्मद नजीर ने 1940 से 1947 तक व दूसरी बार 1957 से 1960 तक अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। इनके बाद तपस्वी सिंह ने 1956 से 1957 तक व 1962 से 1964 तक अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। राम प्रताप गुप्ता 1953 में एक वर्ष व बाद में 1964 से 1971 तक अध्यक्ष रहे। इनके बाद यार मोहम्मद अंसारी ने 1988 से 1994 तक व बाद में एक वर्ष के लिए 1994 में अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। इसके बाद नादिर शाह ने 2003 से लेकर 2013 तक अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाया। इसके बाद 2013 से 2023 तक निवर्तमान अध्यक्ष अजय आर्य का कब्जा रहा। वहीं 1975 में नगर पंचायत बनी इकौना में पहली बार हुए चुनाव में निवर्तमान अध्यक्ष के पिता सालिगराम गुप्ता उर्फ महाशय ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। जो चार वर्ष तक ही अध्यक्ष रह सके। इसके बाद वर्ष 1995 में हुए चुनाव में ज्ञानवती देवी अध्यक्ष चुनी गई थी। उनके बाद 2000 में महमूद आलम नयमी अध्यक्ष बने। इसके बाद से लगातार तीन बार जितेंद्र गुप्ता उर्फ गुड्डू अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहे। इस बार यह सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित हो गई। भाजपा से प्रत्याशी बनाए जाने के बावजूद निवर्तमान अध्यक्ष की पत्नी रेनू गुप्ता का जाति प्रमाण पत्र स्थगित हो जाने से वह मैदान से बाहर हो गई। आरक्षण बाधा न बनता तो निवर्तमान अध्यक्ष का परिवार पांचवी बार मैदान में होता। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। नोटिफाइड एरिया से नगर पालिका परिषद तक के भिनगा के सफर मे किसी भी अध्यक्ष को तीसरी बार सत्ता नहीं मिली। वहीं नगर पंचायत इकौना के 48 वर्ष के इतिहास में यदि आरक्षण खेल न बिगाड़ता तो निवर्तमान अध्यक्ष का परिवार पांचवी बार मैदान में होता।
1899 में नोटिफाइड एरिया बनी भिनगा में पहली बार 1901 में मतदान कराया गया। तब पहली बार महेंद्र विक्रम सिंह अध्यक्ष बने। बाद में 1988 में नगर पंचायत और वर्ष 2017 में नगर पालिका परिषद बनी। इस बीच 123 वर्ष में कभी भी भिनगा में अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित नहीं हुआ। न ही भिनगा वासियों ने कभी किसी महिला को अपना प्रतिनिधि ही चुना। इतना ही नहीं यहां किसी को भी तीसरी बार अध्यक्ष की कुर्सी नसीब नहीं हुई। पहली बार मोहम्मद नजीर ने 1940 से 1947 तक व दूसरी बार 1957 से 1960 तक अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। इनके बाद तपस्वी सिंह ने 1956 से 1957 तक व 1962 से 1964 तक अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। राम प्रताप गुप्ता 1953 में एक वर्ष व बाद में 1964 से 1971 तक अध्यक्ष रहे। इनके बाद यार मोहम्मद अंसारी ने 1988 से 1994 तक व बाद में एक वर्ष के लिए 1994 में अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। इसके बाद नादिर शाह ने 2003 से लेकर 2013 तक अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्जा जमाया। इसके बाद 2013 से 2023 तक निवर्तमान अध्यक्ष अजय आर्य का कब्जा रहा। वहीं 1975 में नगर पंचायत बनी इकौना में पहली बार हुए चुनाव में निवर्तमान अध्यक्ष के पिता सालिगराम गुप्ता उर्फ महाशय ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाला। जो चार वर्ष तक ही अध्यक्ष रह सके। इसके बाद वर्ष 1995 में हुए चुनाव में ज्ञानवती देवी अध्यक्ष चुनी गई थी। उनके बाद 2000 में महमूद आलम नयमी अध्यक्ष बने। इसके बाद से लगातार तीन बार जितेंद्र गुप्ता उर्फ गुड्डू अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहे। इस बार यह सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित हो गई। भाजपा से प्रत्याशी बनाए जाने के बावजूद निवर्तमान अध्यक्ष की पत्नी रेनू गुप्ता का जाति प्रमाण पत्र स्थगित हो जाने से वह मैदान से बाहर हो गई। आरक्षण बाधा न बनता तो निवर्तमान अध्यक्ष का परिवार पांचवी बार मैदान में होता। संवाद
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