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चीनी टेंट में बैठी नेपाली पुलिस का बर्ताव भी हो गया बर्बर, भारतीय बीओपी के सामने एपीएफ ने बनाई बीओपी

Sat, 04 Jul 2020 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा विभाकर शुक्ल, श्रावस्ती
विभाकर शुक्ल, श्रावस्ती Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Jul 2020 06:43 AM IST
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Nepali police sitting in Chinese tent also became barbaric
नेपाली टेंट - फोटो : अमर उजाला

भारत व नेपाल के बीच संबंध खराब करने के लिए नेपाली सेना को चीन सभी साजो सामान उपलब्ध करा रहा है। भारत की सीमा से सटे इलाके में नेपाल ने जो एपीएफ (सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल) के लिए टेंट लगाए हैं वह चीन निर्मित है। इन पर चीनी भाषा में कुछ लिखा है। स्थानीय पुलिस व एसएसबी ने जब मामले की पड़ताल शुरू की तो नेपाली पुलिस ने चीनी भाषा की जगह इन पर एपीएफ लिख दिया। पहले इस तरह के टेंट भारतीय सीमा पर तैनात एसएसबी के कैंप के ठीक सामने लगे थे बाद में इन्हें सीमा क्षेत्र से अंदर कुछ दूरी पर लगा दिया गया। चीनी टेंट में बैठे नेपाल प्रहरी का व्यवहार भी अब चीनी सेना की ही तरह बर्बर होता जा रहा है। गलती से भी सीमा पार करने वाले किसानों के साथ यह लोग अमानवीय व्यवहार करते हैं।

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नेपाल पर चीन के प्रभाव का असर नेपाल की सेना पर भी पड़ रहा है। श्रावस्ती से लगी नेपाल की सीमा पर निगरानी के नाम पर एपीएफ (सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल) की तैनाती है। यह तैनाती उन्हीं स्थानों पर है जहां भारतीय सीमा पर एसएसबी ने अपने बॉर्डर आउट पोस्ट बना रखे हैं। चीन के टेंट में बैठी नेपाली के सशस्त्र प्रहरी बल अब बर्बर हो चुकी है। जिस प्रकार चीन ने किक्किम स्थित नाकुला में निहत्थे भारतीय सैनिकों पर हमला कर उन्हें नुकसान पहुंचाया था। उसी प्रकार श्रावस्ती व बहराइच क्षेत्र के गंगापुर में एपीएफ का मेन कैंप लगा है। इसी के बाद चौफेरी व होलासपुरवा में छोटा कैंप है। इस क्षेत्र में तैनात एपीएफ गलती से भी नेपाल सीमा में घुसने वाले किसानों से बर्बर व्यवहार कर रही है।
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शुक्रवार को ऐसे ही श्रावस्ती का किसान रामदीन मवेशी चराता हुआ गलती से नेपाल सीमा में चला गया था। जिसे एपीएफ के जवानों ने पकड़ कर करीब दो घंटे तक अपने कैंप में पहले एक पैर पर खड़ा रखा। इसके बाद काफी देर तक मुर्गा बनाया। इस तरह की घटना कोदिया, तुरूषमा सहित अन्य गांव के ग्रामीणों के साथ भी हो चुकी हैं।
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कोरोना के बहाने सीमा सील
नेपाल ने कोरोना वायरस के बहाने इस समय अपनी सीमा सील कर दी है। यह बात और है कि श्रावस्ती व बहराइच सहित बलरामपुर से लगी नेपाल की सीमा खुली हुई है। यहां आने जाने के जितने रास्ते हैं उससे ज्यादा पगडंडियों से होकर लोग जाते हैं।

प्रति टेंट में पांच से सात एपीएफ जवान तैनात
श्रावस्ती व बहराइच क्षेत्र में सीमा पर सशस्त्र प्रहरी बल नेपाल द्वारा लगाए गये टेंट में पांच से सात जवान शामिल है। इसमें कौन किस रैंक का है। उसकी पुष्टि नहीं हो सकी। सीमा क्षेत्र के ग्रामीण व चरवाहों की माने तो जमुनहा क्षेत्र की ओर नेपाल के गंगापुर में एपीएफ का मुख्य कैंप है। जहां सौ से अधिक संख्या में जवानों की तैनाती है। इसी प्रकार भगवानपुर, चौफेरी, कालंाफाटा व होलासपुरवा में छोटे कैंप हैं। इस तरह के कैंप श्रावस्ती सीमा से सटे नेपाल की ओर कई और स्थानों पर हैं।

पहली बार नेपाल ने बनाया बीओपी

Nepali police sitting in Chinese tent also became barbaric
ऑब्जर्वेशन पोस्ट - फोटो : अमर उजाला

भारत व नेपाल संबंध के बीच चीन के आ जाने के कारण पहली बार नेपाल ने भी सीमा ऑब्जर्वेशन पोस्ट (बीओपी) का निर्माण किया है। इससे पहले दोनों देशों के सीमा के रखवाली की जिम्मेदारी भारत के पास ही थी। नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में केवल पुलिस (नेपाल प्रहरी) का थाना ही था। इस तरह श्रावस्ती सीमा क्षेत्र में नेपाल की ओर से भगवानपुर व नरैनापुर में थाना था। जबकि सुईया में एक पुलिस चौकी हुआ करती थी। जिसे नेपाल में माओवादी आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने ब्लास्ट कर उड़ा दिया था। माओवादी आंदोलन के दौरान भगवानपुर थाना भी बंद कर दिया गया था। यहां तैनात पुलिस को नरैनापुर थाने में ही शिफ्ट कर दिया गया था। उस दौरान भी नेपाल व भारत दोनों ओर से सीमा की रखवाली का जिम्मा भारत के पास ही था। यह पहला मौका है जब नेपाल ने बॉर्डर पर सशस्त्र प्रहरी तैनात किए हैं।

भूलवश भी मवेशी जाने पर नेपाल पुलिस करती है उत्पीड़न
श्रावस्ती के समानांतर नेपाल क्षेत्र में तैनात एपीएफ के बारे में सागर गांव पंचायत के प्रधान अजय पाठक बताते हैं कि नेपाल के चौफेरी में एपीएफ जवानों के कैंप की तरफ भारतीय लोगों को जाने नही दिया जाता है। उन्हें उत्पीड़न करके भगा दिया जाता है। वहीं कलकलवा के पूर्व प्रधान विनोद वर्मा बताते हैं कि गांव के किसान खेतों में जाते हैं भूलवश मवेशी नेपाल की सीमाओं में चले गये तो दौड़ा कर भगा देते हैं। राप्ती नदी के इस पार खेत में हैं राप्ती के पार नेपाल है। जहां एपीएफ जवानों का डेरा है।

शिकायत मिली तो करेंगे एपीएफ से बात
नेपाली एपीएफ की ओर से भारत के किसी भी नागरिक उत्पीड़न की जानकारी एसएसबी के पास नहीं है। कुछ दिन पूर्व एसएसबी व एपीएफ की ज्वाइंट मीटिंग हुई थी। जिसमें सभी मुद्दों पर वार्ता हुई है। इसके बाद भी यदि किसी भारतीय नागरिक को एपीएफ से शिकायत हो तो वह किसी भी बीओपी कमांडर के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। उसकी शिकायत पर एपीएफ से वार्ता की जाएगी।
-जय सिंह प्रभारी, कमांडेंट एसएसबी

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