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Shravasti News: 25 हजार रुपये महीना कमा रहीं नीतू
Mon, 01 Dec 2025 12:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 01 Dec 2025 12:54 AM IST
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दुग्ध एटीएम वाहन के साथ मौजूद नीतू यादव व अन्य महिलाएं। - संवाद
श्रावस्ती। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा संचालित समूह से जुड़कर इकौना के कैलाशपुर निवासी नीतू यादव हर महीने 25 हजार रुपये कमा रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है।
अपने संघर्षों की कहानी बयां करते हुए नीतू ने बताया कि उनके पास आजीविका का मुख्य साधन कृषि व मजदूरी था, हमेशा तंगी बनी रहती थी। समय से काम न मिलने पर उधार भी लेना पड़ता था। इस बीच वर्ष 2024 में समूह गठन के लिए कुछ दीदियां गांव आईं। उन्होंने समूह से जुड़कर बचत करने का सुझाव दिया। साथ ही समूह से ऋण लेकर खुद का रोजगार शुरू करने की भी सलाह दी।
दीदियों की सलाह पर वह संतोषी स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। नीतू ने आगे बताया कि आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने दूध डेयरी का काम शुरू किया। काम शुरू करने के दौरान उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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बताया कि शुरुआती लाभ सिर्फ पांच से छह हजार ही हुआ, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा। उन्होंने घर-घर जाकर दूध बेचने की ठान ली। बचाए गए रुपयों से मिल्क एटीएम मशीन खरीदी और बड़े स्तर पर दूध आपूर्ति का काम शुरू कर दिया।
शुरुआत में लोगों ने उनसे दूध लेने में हिचक दिखाई, लेकिन बाद में लोग जुड़ते चले गए। नीतू बताती हैं कि वर्तमान में वह दुग्ध कारोबार से प्रतिमाह 25 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही कई अन्य महिलाओं को भी इस कार्य में लगा लिया है।
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अपने संघर्षों की कहानी बयां करते हुए नीतू ने बताया कि उनके पास आजीविका का मुख्य साधन कृषि व मजदूरी था, हमेशा तंगी बनी रहती थी। समय से काम न मिलने पर उधार भी लेना पड़ता था। इस बीच वर्ष 2024 में समूह गठन के लिए कुछ दीदियां गांव आईं। उन्होंने समूह से जुड़कर बचत करने का सुझाव दिया। साथ ही समूह से ऋण लेकर खुद का रोजगार शुरू करने की भी सलाह दी।
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दीदियों की सलाह पर वह संतोषी स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। नीतू ने आगे बताया कि आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने दूध डेयरी का काम शुरू किया। काम शुरू करने के दौरान उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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बताया कि शुरुआती लाभ सिर्फ पांच से छह हजार ही हुआ, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा। उन्होंने घर-घर जाकर दूध बेचने की ठान ली। बचाए गए रुपयों से मिल्क एटीएम मशीन खरीदी और बड़े स्तर पर दूध आपूर्ति का काम शुरू कर दिया।
शुरुआत में लोगों ने उनसे दूध लेने में हिचक दिखाई, लेकिन बाद में लोग जुड़ते चले गए। नीतू बताती हैं कि वर्तमान में वह दुग्ध कारोबार से प्रतिमाह 25 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इसके साथ ही कई अन्य महिलाओं को भी इस कार्य में लगा लिया है।