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सकुशल घर पहुंचा मेडकल छात्र, भाव विभोर हुए परिवारीजन
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यूक्रेन से वापस लौटा इकौना के भटपुरवा निवासी मेडिकल का छात्र
- फोटो : SRAWASTI
इकौना/कटरा (श्रावस्ती)। यूक्रेन व रूस के बीच चल रहे युद्ध के बीच सूमी शहर में फंसा मेडिकल अंतिम वर्ष का छात्र सकुशल घर लौट आया। जिसे देख परिवारीजन भाव विभोर हो गए।
नवीन मॉर्डन थाना क्षेत्र के चैनपुर के मजरा भटपुरवा निवासी दिनेश कुमार चौहान पुत्र रक्षाराम चौहान यूक्रेन के सूमी शहर में रहता था। जहां वह मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। दिनेश मेडिकल अंतिम वर्ष का छात्र था। युक्रेन व रूस के बीच चल रहे युद्ध के कारण वह सूमी शहर में फंस गया। आसपास हो रही बमबारी से बचने के लिए वह हॉस्टल के बंकर में छिपा था। जहां वह फंसा हुआ था। जिसकी सूचना के बाद परिवारीजनों का रो-रो कर हाल बेहाल था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से सूमी में सीजफायर हुआ। तब आठ मार्च की सुबह वह रेडक्रॉस की सुरक्षा में छात्र पोलैंड बॉर्डर पहुंचा। जहां से उसे सभी सरकारी औपचारिकताएं पूरी करके दूतावास अधिकारी होटल ले गए। बाद में शाम की फ्लाइट से चलकर 11 मार्च सुबह दिल्ली पहुंचा। दिल्ली से अधिकारियों ने उसे शुक्रवार देर शाम वाहन से घर पहुंचाया। दिनेश के घर वापसी के बाद माता-पिता सहित परिवार के अन्य सदस्यों की आंखें खुशी से डबडबा आईं। दिनेश ने बताया कि वहां होने वाले धमाकों के बीच हर पल वह भय के साए में जी रहा था।
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नवीन मॉर्डन थाना क्षेत्र के चैनपुर के मजरा भटपुरवा निवासी दिनेश कुमार चौहान पुत्र रक्षाराम चौहान यूक्रेन के सूमी शहर में रहता था। जहां वह मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। दिनेश मेडिकल अंतिम वर्ष का छात्र था। युक्रेन व रूस के बीच चल रहे युद्ध के कारण वह सूमी शहर में फंस गया। आसपास हो रही बमबारी से बचने के लिए वह हॉस्टल के बंकर में छिपा था। जहां वह फंसा हुआ था। जिसकी सूचना के बाद परिवारीजनों का रो-रो कर हाल बेहाल था।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से सूमी में सीजफायर हुआ। तब आठ मार्च की सुबह वह रेडक्रॉस की सुरक्षा में छात्र पोलैंड बॉर्डर पहुंचा। जहां से उसे सभी सरकारी औपचारिकताएं पूरी करके दूतावास अधिकारी होटल ले गए। बाद में शाम की फ्लाइट से चलकर 11 मार्च सुबह दिल्ली पहुंचा। दिल्ली से अधिकारियों ने उसे शुक्रवार देर शाम वाहन से घर पहुंचाया। दिनेश के घर वापसी के बाद माता-पिता सहित परिवार के अन्य सदस्यों की आंखें खुशी से डबडबा आईं। दिनेश ने बताया कि वहां होने वाले धमाकों के बीच हर पल वह भय के साए में जी रहा था।
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