{"_id":"5df51b788ebc3e87cf3e1032","slug":"lord-buddha-s-life-character-on-canvas-srawasti-news-lko497763568","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैनवास पर उतारा भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैनवास पर उतारा भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र
विज्ञापन
जेतवन में आयोजित चित्रकार शिविर के दौरान मौजूद चित्रकार व अन्य।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध शिल्प ग्राम जेतवन में राज्य ललित कला अकादमी के तत्वावधान में शनिवार को चित्रकार शिविर का आयोजन किया गया। इसमें चित्रकारों ने भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र को कैनवस पर उतारा। शिविर में देश के कई हिस्सों से चित्रकारों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष भदंत शांत मित्र के साथ ही ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह पुंडीर मौजूद रहे।
भगवान बुद्ध ने अपने जीवन काल का सर्वाधिक वर्षावास श्रावस्ती में बिताया। यहां पर उन्होंने कई बौद्ध सभाएं की। कई उपदेश ऐसे दिए जो जीवन में परिवर्तन लाने वाले हैं। भगवान बुद्ध के इस जीवन चरित्र को कैनवस पर उतारने के लिए राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकार शिविर का आयोजन बुद्ध शिल्प ग्राम जेतवन में किया गया।
इसका शुभारंभ शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष भदंत शांति मित्र व अकादमी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह पुंडीर ने किया। इस दौरान चित्रकारों को संबोधित करते हुए भदंत शांति मित्र ने कहा कि कला एक स्वस्थ और आदर्श भूत ग्रहणी है। वह सदा अपने कार्य करती है। छोटे परिवार से ही समाज और राष्ट्र का कल्याण हो सकता है। भारत बहुत प्राचीन देश है, संसार की सबसे प्राचीन सभ्यता आज तक केवल भारत में ही बची हुई है।
विज्ञापन
संस्कृत संसार की सबसे प्राचीन भाषा है, और वेद सबसे प्राचीनतम ग्रंथ। भारत में नृत्य और संगीत की परंपरा भी बहुत प्राचीन है। इस दौरान सांसद बहराइच अक्षयवर लाल गोंड ने कहा कि श्रम की महत्ता को जिसने जान लिया वह जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता। कहा जाता है कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। इस राष्ट्रीय चित्रकार शिविर में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि के चित्रकार प्रतिभाग कर रहे हैं। इस मौके पर डा. यशवंत सिंह राठौर, श्रवण कुमार द्विवेदी, अखिलेश कुमार तिवारी, दिनेश प्रताप सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
भगवान बुद्ध ने अपने जीवन काल का सर्वाधिक वर्षावास श्रावस्ती में बिताया। यहां पर उन्होंने कई बौद्ध सभाएं की। कई उपदेश ऐसे दिए जो जीवन में परिवर्तन लाने वाले हैं। भगवान बुद्ध के इस जीवन चरित्र को कैनवस पर उतारने के लिए राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकार शिविर का आयोजन बुद्ध शिल्प ग्राम जेतवन में किया गया।
विज्ञापन
इसका शुभारंभ शनिवार को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के अध्यक्ष भदंत शांति मित्र व अकादमी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह पुंडीर ने किया। इस दौरान चित्रकारों को संबोधित करते हुए भदंत शांति मित्र ने कहा कि कला एक स्वस्थ और आदर्श भूत ग्रहणी है। वह सदा अपने कार्य करती है। छोटे परिवार से ही समाज और राष्ट्र का कल्याण हो सकता है। भारत बहुत प्राचीन देश है, संसार की सबसे प्राचीन सभ्यता आज तक केवल भारत में ही बची हुई है।
विज्ञापन
संस्कृत संसार की सबसे प्राचीन भाषा है, और वेद सबसे प्राचीनतम ग्रंथ। भारत में नृत्य और संगीत की परंपरा भी बहुत प्राचीन है। इस दौरान सांसद बहराइच अक्षयवर लाल गोंड ने कहा कि श्रम की महत्ता को जिसने जान लिया वह जीवन में कभी असफल नहीं हो सकता। कहा जाता है कि परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। इस राष्ट्रीय चित्रकार शिविर में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, चंडीगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि के चित्रकार प्रतिभाग कर रहे हैं। इस मौके पर डा. यशवंत सिंह राठौर, श्रवण कुमार द्विवेदी, अखिलेश कुमार तिवारी, दिनेश प्रताप सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।