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स्नान दान के साथ शुरू हुआ कार्तिक मेला, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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भिनगा के राजघाट मेले में महिला को गाय की बछिया के साथ पुण्यदान कराते पुरोहित।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। जिले के विभिन्न जलाशयों के साथ सीताद्वार झील, राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा मेले का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने स्नान दान किया। यह कार्तिक पूर्णिमा मेला सीताद्वार में पांच दिन तक चलेगा। जबकि भिनगा के हरिहरपुररानी स्थित लखरांव में तीन दिन मेला आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा में दिन सूर्योदय से पूर्व जलाशयों में स्नानदान, हवन पूजन एवं उपासना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार आज ही के दिन श्रीहरी विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसके चलते मंगलवार को इकौना के टड़वा महंथ स्थित सीताद्वार झील किनारे विशाल मेले का आयोजन किया गया। जहां पवित्र सीताद्वार झील में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
सिरसिया के कोयलहवा के जनकपुर स्थित पंचमुखी हनुमान के दर्शन को जन सैलाब उमड़ा। हजारों की संख्या में पड़ोसी राष्ट्र नेपाल सहित अनुसूचित जनजाति (थारू) के लोगों ने मंदिर में पहुंच कर पारंपरिक ढंग से पूजन अर्चन कर हनुमान जी की कृपा प्राप्त की।
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सिरसिया के ही विभूतिनाथ मंदिर में भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके साथ ही सिरसिया के तालबघौड़ा, हरिहरपुररानी के लखरांव, लबेदपुर के राजघाट स्थित बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर, जमुनहा में राप्ती नदी के तट पर स्थित जगपतिनाथ, गिलौला के बेलकर में डूबकी लगाई।
इसके अलावा प्रहलादा कुट्टी, दिकौली के सगरा, खुरहुरी मोड़, बरदेहरा, भंगहा बाजार स्थित हनुमान मंदिर, भकला कुट्टी के कुड़िया समय स्थान, लेंगड़ी गूलर, कुर्बेनी, बैदौरा सहित कई अन्य स्थानों पर स्थित जलाशयों के किनारे विशाल मेले का आयोजन किया गया। जहां भारी संख्या में पहुंचे क्षेत्रवासियों द्वारा स्नान दान कर मेले का आनंद लिया। इकौना के सीताद्वार में पांच दिन व हरिहरपुररानी के लखरांव में कल गुरुवार तक मेले का आयोजन किया जाएगा। सभी स्थानों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
जिले के सभी मेलों में प्रतिबंध के बाद भी सिंगल यूज पालीथिन का धड़ल्ले से प्रयोग किया गया। एक तरफ जहां दुकानदारों ने सामान देने के लिए कैरीबैग का प्रयोग किया। वहीं पानी का पाउच भी खुले आम बेचा गया। इतना ही नहीं कुछ लोगों द्वारा पालीथिन में हैंडपंप का पानी भर कर बेचा गया।
कार्तिक पूर्णिमा मेले में पुलिस की मौजूदगी में खुलेआम दुकानदारों ने होटल आदि पर घरेलू गैस सिलेंडर का कामर्शियल प्रयाग किया। हजारों की भीड़ के बीच में प्रयुक्त होने वाले इन गैस सिलेंडरों के आसपास न तो आग बुझाने का कोई प्रबंध किया गया था। और न ही अगिभनशमन वाहनों के पहुंचने के लिए पर्याप्त मार्ग ही दिखा।
कार्तिक पूर्णिमा मेले में यू तो देशी व चायनीज खिलौने बच्चों की पहली पसंद बने रहे। लेकिन मिट्टी से बने स्थानीय खिलौने ने भी मेले में लोगों को खूब आकर्षित किया। यही कारण था कि सिर्फ बच्चे ही नहीं युवतियां भी मिट्टी के खिलौने की खरीदारी करती दिखी। वहीं लोगों ने गृह उपयोगी वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी किया।
जिले में आयोजित कार्तिक पूर्णिमा मेले में आने वाले मेलार्थियों की पहली पसंद गन्ना व सिंगाड़ा ही रही। इसके साथ ही मूंगफली, चाट, पानी पूरी, मिठाई जलेबी की भी जमकर खरीदारी की गई। इतना ही नहीं लोग लाई चूरा बतासा व गट्टे की खरीदारी मे भी पीछे नहीं रहे।
मेले में सौंदर्य प्रसाधन आदि की दुकानों पर सर्वाधिक भीड़ देखने को मिली। वहीं मेहंदी व गोदना गोदवाने के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ी। इसमें सिर्फ महिलाएं, युवतियां व बच्चियां ही नहीं युवक भी पीछे नहीं रहे।
कार्तिक पूर्णिमा मेले में आने वाली ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं व युवतियां ट्रैक्टर ट्राली, टैंपो आदि वाहनों पर मंगलगीत गाते हुए आती जाती दिखीं। वहीं मेले में मिलने वाली परिवार की महिलाओं को गले लगा कर करुण क्रंदन भी करती नजर आई।
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ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा में दिन सूर्योदय से पूर्व जलाशयों में स्नानदान, हवन पूजन एवं उपासना करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार आज ही के दिन श्रीहरी विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इसके चलते मंगलवार को इकौना के टड़वा महंथ स्थित सीताद्वार झील किनारे विशाल मेले का आयोजन किया गया। जहां पवित्र सीताद्वार झील में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
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सिरसिया के कोयलहवा के जनकपुर स्थित पंचमुखी हनुमान के दर्शन को जन सैलाब उमड़ा। हजारों की संख्या में पड़ोसी राष्ट्र नेपाल सहित अनुसूचित जनजाति (थारू) के लोगों ने मंदिर में पहुंच कर पारंपरिक ढंग से पूजन अर्चन कर हनुमान जी की कृपा प्राप्त की।
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सिरसिया के ही विभूतिनाथ मंदिर में भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसके साथ ही सिरसिया के तालबघौड़ा, हरिहरपुररानी के लखरांव, लबेदपुर के राजघाट स्थित बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर, जमुनहा में राप्ती नदी के तट पर स्थित जगपतिनाथ, गिलौला के बेलकर में डूबकी लगाई।
इसके अलावा प्रहलादा कुट्टी, दिकौली के सगरा, खुरहुरी मोड़, बरदेहरा, भंगहा बाजार स्थित हनुमान मंदिर, भकला कुट्टी के कुड़िया समय स्थान, लेंगड़ी गूलर, कुर्बेनी, बैदौरा सहित कई अन्य स्थानों पर स्थित जलाशयों के किनारे विशाल मेले का आयोजन किया गया। जहां भारी संख्या में पहुंचे क्षेत्रवासियों द्वारा स्नान दान कर मेले का आनंद लिया। इकौना के सीताद्वार में पांच दिन व हरिहरपुररानी के लखरांव में कल गुरुवार तक मेले का आयोजन किया जाएगा। सभी स्थानों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।
जिले के सभी मेलों में प्रतिबंध के बाद भी सिंगल यूज पालीथिन का धड़ल्ले से प्रयोग किया गया। एक तरफ जहां दुकानदारों ने सामान देने के लिए कैरीबैग का प्रयोग किया। वहीं पानी का पाउच भी खुले आम बेचा गया। इतना ही नहीं कुछ लोगों द्वारा पालीथिन में हैंडपंप का पानी भर कर बेचा गया।
कार्तिक पूर्णिमा मेले में पुलिस की मौजूदगी में खुलेआम दुकानदारों ने होटल आदि पर घरेलू गैस सिलेंडर का कामर्शियल प्रयाग किया। हजारों की भीड़ के बीच में प्रयुक्त होने वाले इन गैस सिलेंडरों के आसपास न तो आग बुझाने का कोई प्रबंध किया गया था। और न ही अगिभनशमन वाहनों के पहुंचने के लिए पर्याप्त मार्ग ही दिखा।
कार्तिक पूर्णिमा मेले में यू तो देशी व चायनीज खिलौने बच्चों की पहली पसंद बने रहे। लेकिन मिट्टी से बने स्थानीय खिलौने ने भी मेले में लोगों को खूब आकर्षित किया। यही कारण था कि सिर्फ बच्चे ही नहीं युवतियां भी मिट्टी के खिलौने की खरीदारी करती दिखी। वहीं लोगों ने गृह उपयोगी वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी किया।
जिले में आयोजित कार्तिक पूर्णिमा मेले में आने वाले मेलार्थियों की पहली पसंद गन्ना व सिंगाड़ा ही रही। इसके साथ ही मूंगफली, चाट, पानी पूरी, मिठाई जलेबी की भी जमकर खरीदारी की गई। इतना ही नहीं लोग लाई चूरा बतासा व गट्टे की खरीदारी मे भी पीछे नहीं रहे।
मेले में सौंदर्य प्रसाधन आदि की दुकानों पर सर्वाधिक भीड़ देखने को मिली। वहीं मेहंदी व गोदना गोदवाने के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ी। इसमें सिर्फ महिलाएं, युवतियां व बच्चियां ही नहीं युवक भी पीछे नहीं रहे।
कार्तिक पूर्णिमा मेले में आने वाली ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं व युवतियां ट्रैक्टर ट्राली, टैंपो आदि वाहनों पर मंगलगीत गाते हुए आती जाती दिखीं। वहीं मेले में मिलने वाली परिवार की महिलाओं को गले लगा कर करुण क्रंदन भी करती नजर आई।