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Shravasti News: उमड़-घुमड़ कर आए काले बदरा, मौसम खुशगवार
Fri, 30 Jun 2023 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 30 Jun 2023 11:46 PM IST
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- फुहार तक सिमटी बारिश, खेतों में नमी न आने से किसान परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। तराई क्षेत्र में उमड़-घुमड़ कर आए काले बदरा केवल फुहार तक ही सिमटे रहे। हालांकि इससे खुशगवार बने मौसम के कारण लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली लेकिन खेतों में नमी न हो पाने से किसान परेशानहाल हैं। बृहस्पतिवार मध्य रात से ही आसमान पर घने काले बादल छाने लगे थे। इस दौरान चल रही पूर्वा हवाओं ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी। दिन भर छाए बादल बस रिमझिम तक ही सीमित रहे।
ठीकठाक बारिश की जगह सिर्फ बूंदाबांदी होने के कारण धरती की तपन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आषाढ़ के अंतिम सप्ताह में भी बादलों के दगा देने से किसानों की मुश्किलें बढ़ने लगी है। जरूरत के अनुसार बरसात न होने के कारण जहां असिंचित सिरसिया के तराई क्षेत्र में किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं, वहीं जिले के अन्य हिस्सों में धान की नर्सरी कर चुके किसान धान की रोपाई के लिए आसमान की ओर निहार रहे हैं। हालांकि मौसम के इस रुख से नर्सरी डाल चुके किसानों को कुछ राहत भी मिलेगी। उनका कहना है कि यदि मौसम ऐसा ही रहा तो धान की नर्सरी का तेजी से विकास होगा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। तराई क्षेत्र में उमड़-घुमड़ कर आए काले बदरा केवल फुहार तक ही सिमटे रहे। हालांकि इससे खुशगवार बने मौसम के कारण लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली लेकिन खेतों में नमी न हो पाने से किसान परेशानहाल हैं। बृहस्पतिवार मध्य रात से ही आसमान पर घने काले बादल छाने लगे थे। इस दौरान चल रही पूर्वा हवाओं ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दी। दिन भर छाए बादल बस रिमझिम तक ही सीमित रहे।
ठीकठाक बारिश की जगह सिर्फ बूंदाबांदी होने के कारण धरती की तपन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आषाढ़ के अंतिम सप्ताह में भी बादलों के दगा देने से किसानों की मुश्किलें बढ़ने लगी है। जरूरत के अनुसार बरसात न होने के कारण जहां असिंचित सिरसिया के तराई क्षेत्र में किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं, वहीं जिले के अन्य हिस्सों में धान की नर्सरी कर चुके किसान धान की रोपाई के लिए आसमान की ओर निहार रहे हैं। हालांकि मौसम के इस रुख से नर्सरी डाल चुके किसानों को कुछ राहत भी मिलेगी। उनका कहना है कि यदि मौसम ऐसा ही रहा तो धान की नर्सरी का तेजी से विकास होगा। संवाद
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