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स्वस्थ रहने के लिए भारतीय विज्ञान को होगा समझना

Sat, 13 Feb 2021 10:59 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Feb 2021 10:59 PM IST
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Indian science will have to be understood to be healthy
सेमिनार का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि व मौजूद लोग। - फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। महामाया राजकीय महाविद्यालय कटरा में शनिवार से दो दवसीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज व महामाया राजकीय महाविद्यालय श्रावस्ती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार का केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रयागराज विभागाध्यक्ष संस्कृति पाली एवं प्राच्य भाषा विभाग प्रोफेसर ने मां सरस्वती जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर व माल्यार्पण करके किया।
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इस दौरान मुख्य अतिथि प्रोफेसर उमा कांत यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृत में कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए उपाय बताए गए हैं। दूरी बनाने के कारण ही हमारे देश में कोरोना महामारी विकराल रूप धारण कर पाई। प्राचीन उपायों को अपनाकर हम कोरोना जैसी महामारी को हरा सकते हैं। दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक ने पारंपरिक ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए दूरी बनाकर रहना एक सबसे बड़ा अत्यंत कारगर उपाय है। उन्होंने योग चिंतन पर भी प्रकाश डाला।
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सेमिनार में अयोध्या एवं देवीपाटन मंडल प्रभारी लखनऊ क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रोफेसर आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि पुरानी पद्धति के अनुसार इस कोरोना काल में काढ़ा पीना उपयुक्त बताया गया। सभी को पुरानी परंपराओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बिहार विद्यालय एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अनिल प्रताप गिरी ने कहा कि भारतीय बौद्धिक परंपरा को जब तक हम सब लोग नहीं समझेंगे तब तक कोविड-19 महामारी बीमारी को कोई भी नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा कि वेद और मंत्र से पुरानी परंपराएं प्रारंभ हुई हैं जो आध्यात्मिक व शांति जीवन सुख के लिए काम करती हैं। जब तक हम पुरानी परंपराओं को नहीं अपनाएंगे या धर्म कर्म करने में सार्थक प्रयास नहीं करेंगे। तब तक योग विज्ञान का जीवन निरर्थक है। कोरोना काल में फिजिकल व मेंटली फिट होने के लिए भारतीय विज्ञान को समझना होगा।
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सेमिनार को प्रो. श्याम नारायण वर्मा, महामाया राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो धर्मेंद्र कुमार ने भी संबोधित किया। इस मौके पर भोपाल के प्रो. अच्छेलाल, बभनान महाविद्यालय प्रो. रुदल कुमार, गोरखपुर के प्रो. सूर्यकांत त्रिपाठी, प्रो. चंद्रकांत मिश्रा, बलरामपुर एमएलके महाविद्यालय के प्रो. विमल प्रकाश, हाईकोर्ट अधिवक्ता प्रो. साकेत कुमार तिवारी, गोरखपुर के प्रो. सुरेंद्र कुमार गुप्ता, प्रयागराज के प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
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