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रोग के लक्षणों की पहचान ही प्रारंभिक बचाव : सीएमओ
Mon, 30 Mar 2026 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 30 Mar 2026 01:01 AM IST
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श्रावस्ती। सिरसिया क्षेत्र के ग्राम मोतीपुर कलां में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें कुल 400 मरीजों का उपचार कर उन्हें विभिन्न रोग के लक्षणों की जानकारी दी गई।
सीएमओ डॉ. एके सिंह ने कहा कि किसी भी रोग के उपचार में उसके लक्षणों को पहचानना ही प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि मरीज रोग के लक्षणों को प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान लेता है, तो उसका उपचार आसान और तीव्र हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह से अधिक समय से खांसी आए, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क चाहिए। यह टीबी का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। एक दिन में दो से तीन बार दस्त व उल्टी होने पर डायरिया होने का संकेत मान लेना चाहिए।
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मल्हीपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि असामान्य तरीके से खुजली, अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब करना व शरीर में दर्द बने रहना भी कई गंभीर बीमारियों के लक्षण हैं। इसलिए जब भी शरीर में कोई समस्या हो, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इससे रोग पर समय से नियंत्रण पाया जा सकता है।
शिविर में हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग, पोषण आकलन तथा स्वास्थ्य परीक्षण कर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस दौरान आईसीएमआर–आरएमआरसी गोरखपुर के डॉ. गौरव राज द्विवेदी, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. रितेश, ओम शिवम व सत्येंद्र आदि मौजूद रहे।
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सीएमओ डॉ. एके सिंह ने कहा कि किसी भी रोग के उपचार में उसके लक्षणों को पहचानना ही प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि मरीज रोग के लक्षणों को प्रारंभिक स्तर पर ही पहचान लेता है, तो उसका उपचार आसान और तीव्र हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह से अधिक समय से खांसी आए, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क चाहिए। यह टीबी का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। एक दिन में दो से तीन बार दस्त व उल्टी होने पर डायरिया होने का संकेत मान लेना चाहिए।
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मल्हीपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि असामान्य तरीके से खुजली, अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब करना व शरीर में दर्द बने रहना भी कई गंभीर बीमारियों के लक्षण हैं। इसलिए जब भी शरीर में कोई समस्या हो, तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इससे रोग पर समय से नियंत्रण पाया जा सकता है।
शिविर में हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग, पोषण आकलन तथा स्वास्थ्य परीक्षण कर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस दौरान आईसीएमआर–आरएमआरसी गोरखपुर के डॉ. गौरव राज द्विवेदी, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. रितेश, ओम शिवम व सत्येंद्र आदि मौजूद रहे।