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गुरु तेगबहादुर को मिली थी हिंद के चादर की उपाधि : भानु
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संघ कार्यालय में गुरुवाणी का संकीर्तन करते लोग।
- फोटो : संघ कार्यालय में गुरुवाणी का संकीर्तन करते लोग।
श्रावस्ती। भिनगा के केशव नगर स्थित संघ कार्यालय में मंगलवार को गुरु तेग बहादुर की 350 वीं शहीदी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान संकीर्तन कर उन्हें नमन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान आरएसएस के जिला प्रचारक भानु प्रकाश ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने अपने आपको कुर्बान कर दिया था। इसी लिए उन्हें हिंद के चादर की उपाधि भी मिली थी। गुरु तेग बहादुर ने अपने जीवनकाल में मुगल आक्रांताओं का पुरजोर विरोध किया और कभी उनके सामने घुटने नहीं टेके।
मुगल शासक औरंगजेब ने उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, लेकिन वह झुके नहीं और औरंगजेब ने सबके सामने उनका सिर कटवा दिया था। उन्होंने कहा कि सिख संप्रदाय के गुरु अपने त्याग व बलिदान के लिए जाने जाते हैं। सिख गुरुओं ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए तलवार उठाई। इस दौरान संकीर्तन का आयोजन किया गया, सिख गुरूओं ने गुरबाणी सुनाई। इस मौके पर बाबूराम, बलविंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, अर्शदीप सिंह, परविंदर सिंह, सम्मी, गुरदेव सिंह, तेजपाल सिंह सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम के दौरान आरएसएस के जिला प्रचारक भानु प्रकाश ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने अपने आपको कुर्बान कर दिया था। इसी लिए उन्हें हिंद के चादर की उपाधि भी मिली थी। गुरु तेग बहादुर ने अपने जीवनकाल में मुगल आक्रांताओं का पुरजोर विरोध किया और कभी उनके सामने घुटने नहीं टेके।
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मुगल शासक औरंगजेब ने उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, लेकिन वह झुके नहीं और औरंगजेब ने सबके सामने उनका सिर कटवा दिया था। उन्होंने कहा कि सिख संप्रदाय के गुरु अपने त्याग व बलिदान के लिए जाने जाते हैं। सिख गुरुओं ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए तलवार उठाई। इस दौरान संकीर्तन का आयोजन किया गया, सिख गुरूओं ने गुरबाणी सुनाई। इस मौके पर बाबूराम, बलविंदर सिंह, गुरविंदर सिंह, अर्शदीप सिंह, परविंदर सिंह, सम्मी, गुरदेव सिंह, तेजपाल सिंह सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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