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एंबुलेंस में भगवान भरोसे मरीज, ईएमटी को बीपी लेना भी नहीं आता

Thu, 12 May 2022 11:12 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 11:12 PM IST
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God trust patient in ambulance, EMT does not even know how to take BP
श्रावस्ती। एंबुलेंस सेवा 102 व 108 में लाए व ले जाने वाले मरीज भगवान भरोसे ही अस्पताल तक पहुंचते हैं। एंबुलेंस में तैनात ईएमटी ब्लड प्रेशर की नाप लेने में भी सक्षम नहीं है। यहां तक कि एंबुलेंस के अंदर कोई भी चिकित्सीय उपकरण सही नहीं पाए गए। इसका खुलासा मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में हुआ।
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मरीजों को घर से अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी 108 ईएमटीएस व 102 एनएएस सेवा की एंबुलेंस का है। इन एंबुलेंस में चालक के साथ ईएमटी तैनात होते हैं। इसके साथ ही एंबुलेंस जीवन रक्षक उपकरणों से लैस होनी चाहिए। लेकिन मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
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रिपार्ट के अनुसार इन एंबुलेंस में सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी भगवान पर ही है। मिशन निदेशक ने कुछ दिन पूर्व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकौना में संचालित 108 सेवा की एंबुलेंस जिसका नंबर यूपी 32 बीटी 8862 है। उसका निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी राजकुमार जिस पर आपात स्थिति में मरीज को कई प्रकार की सेवाएं देने की जिम्मेदारी है। वह बीपी मशीन से ब्लड प्रेशर की जांच तक नहीं कर सका। जांच के दौरान ईएमटी ने बीपी लेने के दौरान कफ गलत स्थान पर लगाया। जिसके कारण बीपी रीड ही नहीं हो पाया। यहां तक कि ईएमटी इमरजेंसी मैनेजमेंट में दक्ष नहीं था।
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एंबुलेंस में बैठे मरीज को आवश्यकता पड़ने पर कोई भी चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध नहीं थी। जांच अधिकारी ने एंबुलेंस को मात्र परिवहन उपयोग तक ही सीमित माना। एंबुलेंस में एसी व फैन बंद पाए गए। स्टेथोस्कोप पैक्ड पाया गया। जिसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऑक्सीजन उपलब्ध थी लेकिन मास्क बहुत ही गंदा था। बैट्री व इनवर्टर भी खराब पाया गया। जिससे ऑक्सीजन मशीन तक नहीं चल सकी। इसी सीएचसी में तैनात 102 एनएस सेवा की चार एंबुलेंस तैनात हैं। जिसमें से दो मरीजों को लाने के लिए गई थीं। यही नहीं जब इस सेवा के लिए फोन किया गया तो दो घंटे बाद एंबुलेंस अस्पताल में उपलब्ध हो पाई। यहां ईएमटी रामनाथ चौधरी मोजूद थे। लेकिन इनकी भी स्थिति पहले जैसे एंबूलेस की ही थी। यहां तक कि एंबुलेंस के उपकरणों की स्थिति पहले जैसे थी।

वहीं जब संयुक्त जिला चिकित्सालय में संबद्ध 108 एंबुलेंस यूपी 41 जी 3305 का निरीक्षण किया गया तो इसका दरवाजा ही टूटा पाया गया। चालक ने बताया कि वाहन दो दिन से खड़ा था। जबकि पोर्टल पर इसका संचालन दिख रहा था। इस पर तैनात कर्मचारी उपकरणों को चलाने में न तो सक्षम थे और न ही वह आपात स्थिति में किसी भी मरीज को कोई सेवा देने लायक थे। इस पर मिशन निदेशक ने महानिदेशक को पत्र लिखा है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. एपी भार्गव बताते हैं कि मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय का पत्र मिला है। जिसमें संचालित एंबुलेंस में कई कमियां पाई गई हैं।
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